सरकार वापस लेगी दागियों को बचाने वाला अध्यादेश
नई दिल्ली।। सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश पर मचे बवाल के बीच सरकार और कांग्रेस चर्चाओं का दौर जारी है। पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की और इसके बाद पार्टी कोर ग्रुप में इस पर चर्चा हुई। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक, कांग्रेस कोर ग्रुप ने अध्यादेश को वापस लेने का फैसला किया है। दोपहर साढ़े बारह बजे पीएम राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे।
कोर ग्रुप की बैठक में आम राय बनी है कि अध्यादेश के खिलाफ जनभावना है और राष्ट्रपति ने इसे लौटा दिया तो सरकार की और किरकिरी हो जाएगी। इसलिए इसे वापस ले लिया जाना चाहिए। हालांकि, इस बारे में औपचारिक फैसला शाम को कैबिनेट की मीटिंग में सहयोगी पार्टियों के मंत्रियों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
गौरतलब है कि एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी राहुल गांधी के बयान पर नाराजगी जताते हुए कह चुके हैं कि उनकी पार्टी सरकार की सहयोगी है और वे राहुल गांधी के अनुयायी नहीं है। एनसीपी के साथ-साथ नैशनल कॉन्फ्रेंस भी इस मसले पर यूपीए समन्वय समिति की बैठक बुलाने की मांग कर चुकी है।
इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सुबह पौने दस बजे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मिलने उनके आवास पहुंचे। करीब आधे घंटे दोनों के बीच बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने पीएम से कहा कि उन्होंने अध्यादेश को लेकर जनभावना का इजहार किया था, सरकार या कैबिनेट का अपमान करना उनका मकसद नहीं था। राहुल ने पीएम से कहा कि राष्ट्रपति ने भी अध्यादेश को लेकर एतराज जताया था।
गौरतलब है कि मंगलवार को अमेरिका से लौटते वक्त पीएम ने कहा था कि वह राहुल से मुलाकात कर यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर अध्यादेश को लेकर उनकी नाराजगी क्यों है और इसे लेकर उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया। गौरतलब है कि दागी नेताओं की सदयस्यता बचाने वाले अध्यादेश के बारे में राहुल ने कहा था कि इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।
पीएम ने मंगलवार को अमेरिका से लौटते हुए इस्तीफे की संभावना से इनकार करते हुए कहा था, 'अध्यादेश लाने का फैसला कांग्रेस कोर ग्रुप और कैबिनेट ने लिया था। मैं राहुल से बात कर समझने की कोशिश करूंगा कि उनके मन में क्या मसला उन्हें परेशान कर रहा था।' पीएम ने कहा कि कांग्रेस का कोई भी सदस्य यदि कोई मसला उठाता है तो उस पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है।
कोर ग्रुप की बैठक में आम राय बनी है कि अध्यादेश के खिलाफ जनभावना है और राष्ट्रपति ने इसे लौटा दिया तो सरकार की और किरकिरी हो जाएगी। इसलिए इसे वापस ले लिया जाना चाहिए। हालांकि, इस बारे में औपचारिक फैसला शाम को कैबिनेट की मीटिंग में सहयोगी पार्टियों के मंत्रियों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
गौरतलब है कि एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी राहुल गांधी के बयान पर नाराजगी जताते हुए कह चुके हैं कि उनकी पार्टी सरकार की सहयोगी है और वे राहुल गांधी के अनुयायी नहीं है। एनसीपी के साथ-साथ नैशनल कॉन्फ्रेंस भी इस मसले पर यूपीए समन्वय समिति की बैठक बुलाने की मांग कर चुकी है।
इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सुबह पौने दस बजे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मिलने उनके आवास पहुंचे। करीब आधे घंटे दोनों के बीच बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने पीएम से कहा कि उन्होंने अध्यादेश को लेकर जनभावना का इजहार किया था, सरकार या कैबिनेट का अपमान करना उनका मकसद नहीं था। राहुल ने पीएम से कहा कि राष्ट्रपति ने भी अध्यादेश को लेकर एतराज जताया था।
गौरतलब है कि मंगलवार को अमेरिका से लौटते वक्त पीएम ने कहा था कि वह राहुल से मुलाकात कर यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर अध्यादेश को लेकर उनकी नाराजगी क्यों है और इसे लेकर उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया। गौरतलब है कि दागी नेताओं की सदयस्यता बचाने वाले अध्यादेश के बारे में राहुल ने कहा था कि इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।
पीएम ने मंगलवार को अमेरिका से लौटते हुए इस्तीफे की संभावना से इनकार करते हुए कहा था, 'अध्यादेश लाने का फैसला कांग्रेस कोर ग्रुप और कैबिनेट ने लिया था। मैं राहुल से बात कर समझने की कोशिश करूंगा कि उनके मन में क्या मसला उन्हें परेशान कर रहा था।' पीएम ने कहा कि कांग्रेस का कोई भी सदस्य यदि कोई मसला उठाता है तो उस पर फिर से विचार करने की जरूरत होती है।

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