न्यूयॉर्क पुलिस के लिए मस्जिदें आतंकी संगठन
न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क
पुलिस ने सभी मस्जिदों को गोपनीय रूप से आतंकवादी संगठन करार दिया है। यानी
अब वहां पुलिस को मस्जिदों में होने वाले भाषण और संदेशों को रिकॉर्ड करने
और इमामों की जासूसी करने की छूट मिल जाएगी और इसके लिए सबूत की जरूरत
नहीं होगी। इसके अलावा मस्जिदों में नमाज पढ़ने वाला कोई भी शख्स जांच और
निगरानी की जद में आ सकता है। इस फरमान से अमेरिका में रहने वाला हर
मुस्लिम सकते में है।
अमेरिका
की मस्जिदों से आने वाली अजान की आवाज शायद अब इतिहास बन जाए। कितने दिन
तक कोई जान जोखिम में डालकर इन मस्जिदों में आकर खुदा का नाम लेगा। शायद ही
ऐसा कोई होगा जो खुदा की इस चौखट से सीधे पुलिस के पचड़े में फंस जाए। जी
हां, न्यूयॉर्क में तो ये जल्द ही हकीकत बन सकती है। अमेरिका भर में भी
ज्यादा देर नहीं लगेगी। न्यूयॉर्क पुलिस ने एक खुफिया आदेश निकाला है जिसके
मुताबिक राज्य की सारी मस्जिदें आतंकी संगठन हैं। यानि मस्जिदों में आतंकी
तैयार किए जाते हैं। पुलिस के इस अजब फरमान से लोग सदमे में हैं।
अगर
ये आदेश लागू होता है तो सारी मस्जिदें आतंक का केंद्र मानी जाएंगी। जिसके
चलते पुलिस यहां होने वाली तकरीर को रिकॉर्ड कर सकेगी। इमामों पर जासूसी
कर सकेगी। जो मस्जिद में नमाज पढ़ने जाएंगे उन्हें संदिग्ध माना जाएगा।
यानि उनसे कभी भी कहीं भी पूछताछ की जाएगी। इसके लिए पुलिस को किसी सबूत की
जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
इस
तरह के फरमान से ना सिर्फ मुस्लिम संगठन बल्कि अमेरिका के कई दूसरे संगठन
भी हैरान हैं। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज की हिना शम्सी कहती हैं कि न्यूयॉर्क
पुलिस के काम पर किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन वो ऐसा काम नहीं कर सकती कि
किसी के धर्म और रंग के आधार पर इस तरह की कार्रवाई करे।
असल
में 9/11 हमले के बाद न्यूयॉर्क पुलिस ने करीब एक दर्जन मस्जिदों को जांच
के दायरे में रखा। इसे टेररिज्म इंटरप्रइजेज इन्वेस्टीगेशन का नाम दिया
गया। इसके तहत पुलिस ने मस्जिदों में अपने मुखबिर और जासूस भेजे। मुसलमानों
से पूछताछ की गई, मगर ये बेहद खुफिया दस्तावेज लीक हो गए।
न्यूयॉर्क
शहर में 70 हजार से ज्यादा मुसलमान रहते हैं और ये अमेरिका का सबसे ज्यादा
मुस्लिम आबादी वाला शहर है। न्यूयॉर्क में मस्जिदें भी सबसे ज्यादा हैं।
यानि 250 से ज्यादा मस्जिदों पर न्यूयॉर्क पुलिस के इस खुफिया फरमान का असर
पड़ना तय है। मगर क्या इसका असर अमेरिका के 26 लाख से ज्यादा मुसलमानों पर
भी पड़ेगा ये देखना बाकी है।

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