महंगाई को देखते हुए रेपो रेट में इजाफा जरूरी था- राजन
मुंबई। आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि हाल में उठाए गए कदमों
को धीरे-धीरे वापस लेंगे। उन्होंने नई मौद्रिक नीति की तरफदारी करते हुए
कहा कि महंगाई को देखते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी भी जरूरी थी। लेकिन रेपो
रेट में आगे बढ़ोतरी होगी या नहीं, यह अभी कह पाना मुश्किल है।
राजन ने मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा पर अपने वक्वव्य में कहा है कि औद्योगिक क्षेत्र में कमजोरी और शहरी मांग की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुद्रास्फीति और मुदास्फीति संबंधी प्रत्याशाओं पर अंकुश बनाए रखने की आवश्यकता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीति को और अधिक सहनीय स्तर पर लाने के लिए आवश्यक है कि रेपो दर को 0.25 प्रतिशत और बढ़ा दिया जाए।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक को वृद्धि दर की चिंता नहीं, आज की नीति का आशय यह बताना है कि कोष की लागत बहुत अधिक उंची है ।
राजन ने कहा कि रुपया में गिरावट, तेल की उंची कीमतों का मुद्रास्फीति पर असर होगा और हम मुद्रास्फीति के घोर विरोधी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई द्वारा हाल ही में किए गए उपायों के बल पर बैंकों ने चार दिन में 1.4 अरब डालर जुटाए हैं। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विदेशी धन के लिए वातावरण सुधारने के साथ साथ रुपए की कीमत को तय करने वाले आतरिक कारकों पर भी ध्यान दिया गया है। इन कारकों में राजकोषीय घाटा और घरेलू मुद्रास्फीति मुख्य है।
राजन ने कहा कि आरबीआई की सीपीआई और डब्ल्यूपीआई दोनों महंगाई दरों पर कड़ी नजर बनी हुई है। हालांकि रुपये में गिरावट और कच्चे तेल कीमतों से महंगाई पर असर पड़ेगा। लिहाजा 6-12 महीने के नजरिए से महंगाई दर पर फोकस करना होगा। रुपये में गिरावट, तेल कीमतें और ऊंची महंगाई दर से आरबीआई चिंतित है।
उन्होंने कहा कि एमएसएफ रेट में कटौती से बैंकों के कॉस्ट ऑफ फंड में कमी आएगी। एमएसएफ में 0.75 फीसदी की कटौती काफी अहम है। राजन ने जोर देकर कहा कि महंगाई को अनुमानित दायरे में लाने पर ही अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधरेगी।
राजन ने मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा पर अपने वक्वव्य में कहा है कि औद्योगिक क्षेत्र में कमजोरी और शहरी मांग की मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुद्रास्फीति और मुदास्फीति संबंधी प्रत्याशाओं पर अंकुश बनाए रखने की आवश्यकता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीति को और अधिक सहनीय स्तर पर लाने के लिए आवश्यक है कि रेपो दर को 0.25 प्रतिशत और बढ़ा दिया जाए।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक को वृद्धि दर की चिंता नहीं, आज की नीति का आशय यह बताना है कि कोष की लागत बहुत अधिक उंची है ।
राजन ने कहा कि रुपया में गिरावट, तेल की उंची कीमतों का मुद्रास्फीति पर असर होगा और हम मुद्रास्फीति के घोर विरोधी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई द्वारा हाल ही में किए गए उपायों के बल पर बैंकों ने चार दिन में 1.4 अरब डालर जुटाए हैं। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विदेशी धन के लिए वातावरण सुधारने के साथ साथ रुपए की कीमत को तय करने वाले आतरिक कारकों पर भी ध्यान दिया गया है। इन कारकों में राजकोषीय घाटा और घरेलू मुद्रास्फीति मुख्य है।
राजन ने कहा कि आरबीआई की सीपीआई और डब्ल्यूपीआई दोनों महंगाई दरों पर कड़ी नजर बनी हुई है। हालांकि रुपये में गिरावट और कच्चे तेल कीमतों से महंगाई पर असर पड़ेगा। लिहाजा 6-12 महीने के नजरिए से महंगाई दर पर फोकस करना होगा। रुपये में गिरावट, तेल कीमतें और ऊंची महंगाई दर से आरबीआई चिंतित है।
उन्होंने कहा कि एमएसएफ रेट में कटौती से बैंकों के कॉस्ट ऑफ फंड में कमी आएगी। एमएसएफ में 0.75 फीसदी की कटौती काफी अहम है। राजन ने जोर देकर कहा कि महंगाई को अनुमानित दायरे में लाने पर ही अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधरेगी।

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