अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी के पर कतरने की तैयारी
वाशिंगटन। अमेरिकी संसद की एक अहम समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी
(एनएसए) की निगरानी गतिविधियों को सीमित करने वाले एक विधेयक को मंजूरी दे
दी है। इसका मकसद निगरानी को और पारदर्शी बनाना और लोगों में उस विश्वास को
फिर से बहाल करना है जिसे बड़े पैमाने पर फोन टेप किए जाने का खुलासा होने
से चोट पहुंची है। सीनेट के इस कदम का गूगल, याहू सहित छह अमेरिकी कंपनियों
ने स्वागत किया है। इन कंपनियों के भी डाटा केंद्रों में एनएसए ने सेंध
लगाई है।
सीनेट की प्रवर समिति ने शुक्रवार को एनएसए के पर कतरने वाले विदेशी
खुफिया निगरानी सुधार विधेयक (एफआइएसए) को 11 के मुकाबले 4 मतों से पारित
किया। इस विधेयक में अमेरिकी पैट्रियट अधिनियम के तहत एकमुश्त फोन टेप करने
पर रोक लगाने सहित कई प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। एफआइएसए के तहत
जानबूझकर अनधिकृत रूप से डाटा इकट्ठा कर उसके उपयोग को अपराध माना जाएगा और
इसके लिए दस वर्ष जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। कांग्रेस (संसद) के
दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट में पास होने के बाद यह
विधेयक कानून बन जाएगा। समिति की अध्यक्ष और सीनेटर डियाने फेस्टिन ने कहा
कि एनएसए का फोन रिकार्ड करने का कार्यक्रम कानून के तहत है और मेरा मानना
है कि इसने देश की सुरक्षा में अहम योगदान दिया है। लेकिन इसके बावजूद
इसमें और पारदर्शिता लाई जाना चाहिए। यही नहीं, जनता की निजता की सुरक्षा
का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।
इस बीच, एनएसए के इंटरनेट निगरानी कार्यक्रम का खुलासा होने से नाराज
गूगल, याहू, माइक्रोसाफ्ट, एप्पल, एओएल और फेसबुक ने इस विधेयक का समर्थन
किया है। सीनेटरों को लिखे पत्र में इन कंपनियों ने कहा है कि एनएसए के बड़े
पैमाने पर फोन रिकार्ड करने पर अंकुश लगाने वाले सांसदों के इस प्रस्ताव
का हम स्वागत करते हैं। गौरतलब है कि पूर्व सीआइए कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन
द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों से एनएसए की करतूतों से पर्दा हटा। एनएसए
द्वारा जर्मनी और फ्रांस सहित 35 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की टेलीफोन पर
की गई बातचीत की निगरानी का खुलासा होने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में
खासी नाराजगी है।
केरी ने स्वीकारा, एनएसए ने लांघी हदविदेश मंत्री जॉन केरी ने
अप्रत्याशित रूप से स्वीकार किया कि कुछ मामलों में अमेरिकी जासूसी ने हद
को पार किया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि निर्दोष लोगों को खुफिया
निगरानी कार्यक्रम के तहत प्रताड़ित नहीं किया गया है। उनकी यह स्वीकारोक्ति
वीडियो लिंक के माध्यम से लंदन में एक वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित करने
के दौरान सामने आई। केरी ने कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस
प्रक्रिया में मासूम लोग प्रताड़ित नहीं हो रहे हैं। लेकिन जानकारी हासिल
करने के प्रयास में कुछ मामलों में अनुपयुक्त तरीके अपनाए गए हैं।

No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com