विजय के अर्धशतक से भारत अच्छे स्कोर की ओर
लंदन : शुरुआती तीन विकेट जल्दी गंवाने के बावजूद मुरली विजय के जुझारू अर्धशतक की मदद से भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे क्रिकेट टेस्ट के तीसरे दिन आज 145 रन की बढ़त बना ली है।तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक भारत ने चार विकेट पर 169 रन बना लिये थे। विजय (नाबाद 59) और चेतेश्वर पुजारा (43) ने दूसरे विकेट के लिये 78 रन की साझेदारी की।
तीसरे दिन के आखिर में विजय के साथ कप्तान महेंद्र सिंह धौनी 51 गेंद में 12 रन बनाकर खेल रहे हैं। दोनों ने पांचवें विकेट की अटूट साझेदारी में 46 रन जोड़ लिये हैं।विजय ने आज 190 गेंद की अपनी पारी में जबर्दस्त संयम का प्रदर्शन किया। उन्होंने पारी में सात ही चौके लगाये लेकिन ऑफ स्टम्प से बाहर जाती गेंदों से छेड़खानी नहीं करने में उन्होंने समझदारी दिखाई।
भारत का इरादा 250 रन का लक्ष्य देने का होगा ताकि भुवनेश्वर कुमार एंड कंपनी को मिल रही मदद का फायदा उठाकर जीत दर्ज कर सके। भुवनेश्वर ने पहली पारी में 82 रन देकर छह विकेट लिये। इंग्लैंड पहली पारी में 319 रन बनाकर सिर्फ 24 रन की बढ़त ले सका।
इंग्लैंड के लिए पुजारा को पवेलियन भेजकर शीर्षक्रम का पतन शुरू किया। विराट कोहली (0) दूसरी पारी में भी नाकाम रहे। एक समय पर एक विकेट पर 118 रन से भारत का स्कोर तीन ओवर के भीतर चार विकेट पर 123 रन हो गया।
पहली पारी में शतक जमाने वाले अजिंक्य रहाणे ने स्टुअर्ट ब्रॉड की उछाल लेती गेंद पर मैट प्रायर को कैच थमा दिया। शिखर धवन (31) ने शुरुआत अच्छी की लेकिन बड़ा स्कोर नहीं बना सके जिससे तीसरे क्रिकेट टेस्ट में अंतिम एकादश में उनका चयन संदिग्ध लग रहा है। धवन ने अपनी पारी में चार चौके लगाये लेकिन बेन स्टोक्स को एक खराब शॉट खेलकर प्वाइंट में जो रूट को कैच दे बैठे।
विजय और पुजारा ने हालांकि गेंदबाजों को जल्दी कामयाबी हाथ नहीं लगने दी। दोनों ने 18वें ओवर में 50 रन की साझेदारी पूरी की। प्लंकेट और मोईन अली ने इस सत्र में गेंदबाजी की। इससे पहले भुवनेश्वर ने लगातार दूसरे मैच में पांच विकेट लेकर लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया। पहले दिन अजिंक्य रहाणे ने वहां नाम दर्ज कराया था।
उत्तरप्रदेश के इस तेज गेंदबाज का यह प्रदर्शन किसी भारतीय का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले 1936 में अमर सिंह ने इस मैदान पर 35 रन देकर छह विकेट लिये थे। रविंद्र जडेजा को दो जबकि मोहम्मद शमी और मुरली विजय को एक एक विकेट मिले।
ऐसी पिच पर जहां भुवनेश्वर ने अपनी बलखाती गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान किया, उनके सीनियर साथी ईशांत शर्मा को 24 ओवर में एक भी विकेट नहीं मिल सका। सुबह के सत्र में इंग्लैंड 76 रन से पीछे था और उसके चार विकेट शेष थे। मैदान पर छाये बादलों को देखकर फ्लड लाइटस पहले घंटे में ही चालू कर दी गई।
शमी और ईशांत पहले स्पैल में प्रभावी नहीं रहे जिससे मैट प्रायर और लियाम प्लंकेट को खुलकर खेलने का मौका मिला। प्रायर ने 42 गेंद में 23 रन बनाये जबकि प्लंकेट ने 79 गेंद में आठ चौकों की मदद से नाबाद 55 रन बनाये।
तीसरे दिन के आखिर में विजय के साथ कप्तान महेंद्र सिंह धौनी 51 गेंद में 12 रन बनाकर खेल रहे हैं। दोनों ने पांचवें विकेट की अटूट साझेदारी में 46 रन जोड़ लिये हैं।विजय ने आज 190 गेंद की अपनी पारी में जबर्दस्त संयम का प्रदर्शन किया। उन्होंने पारी में सात ही चौके लगाये लेकिन ऑफ स्टम्प से बाहर जाती गेंदों से छेड़खानी नहीं करने में उन्होंने समझदारी दिखाई।
भारत का इरादा 250 रन का लक्ष्य देने का होगा ताकि भुवनेश्वर कुमार एंड कंपनी को मिल रही मदद का फायदा उठाकर जीत दर्ज कर सके। भुवनेश्वर ने पहली पारी में 82 रन देकर छह विकेट लिये। इंग्लैंड पहली पारी में 319 रन बनाकर सिर्फ 24 रन की बढ़त ले सका।
इंग्लैंड के लिए पुजारा को पवेलियन भेजकर शीर्षक्रम का पतन शुरू किया। विराट कोहली (0) दूसरी पारी में भी नाकाम रहे। एक समय पर एक विकेट पर 118 रन से भारत का स्कोर तीन ओवर के भीतर चार विकेट पर 123 रन हो गया।
पहली पारी में शतक जमाने वाले अजिंक्य रहाणे ने स्टुअर्ट ब्रॉड की उछाल लेती गेंद पर मैट प्रायर को कैच थमा दिया। शिखर धवन (31) ने शुरुआत अच्छी की लेकिन बड़ा स्कोर नहीं बना सके जिससे तीसरे क्रिकेट टेस्ट में अंतिम एकादश में उनका चयन संदिग्ध लग रहा है। धवन ने अपनी पारी में चार चौके लगाये लेकिन बेन स्टोक्स को एक खराब शॉट खेलकर प्वाइंट में जो रूट को कैच दे बैठे।
विजय और पुजारा ने हालांकि गेंदबाजों को जल्दी कामयाबी हाथ नहीं लगने दी। दोनों ने 18वें ओवर में 50 रन की साझेदारी पूरी की। प्लंकेट और मोईन अली ने इस सत्र में गेंदबाजी की। इससे पहले भुवनेश्वर ने लगातार दूसरे मैच में पांच विकेट लेकर लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया। पहले दिन अजिंक्य रहाणे ने वहां नाम दर्ज कराया था।
उत्तरप्रदेश के इस तेज गेंदबाज का यह प्रदर्शन किसी भारतीय का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले 1936 में अमर सिंह ने इस मैदान पर 35 रन देकर छह विकेट लिये थे। रविंद्र जडेजा को दो जबकि मोहम्मद शमी और मुरली विजय को एक एक विकेट मिले।
ऐसी पिच पर जहां भुवनेश्वर ने अपनी बलखाती गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान किया, उनके सीनियर साथी ईशांत शर्मा को 24 ओवर में एक भी विकेट नहीं मिल सका। सुबह के सत्र में इंग्लैंड 76 रन से पीछे था और उसके चार विकेट शेष थे। मैदान पर छाये बादलों को देखकर फ्लड लाइटस पहले घंटे में ही चालू कर दी गई।
शमी और ईशांत पहले स्पैल में प्रभावी नहीं रहे जिससे मैट प्रायर और लियाम प्लंकेट को खुलकर खेलने का मौका मिला। प्रायर ने 42 गेंद में 23 रन बनाये जबकि प्लंकेट ने 79 गेंद में आठ चौकों की मदद से नाबाद 55 रन बनाये।

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