पत्नी जशोदाबेन पर मोदी को हाई कोर्ट का नोटिस
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी संसदीय सीट से निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर उनको नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने वाराणसी से कांग्रेस प्रत्याशी रहे अजय राय और एक अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री को नोटिस भेजने के साथ अखबारों में प्रकाशन का भी निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामांकन के दौरान मोदी ने हलफनामे में पत्नी जशोदाबेन के पैन कार्ड के ब्यौरे और आय के कॉलम खाली छोड़े हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। इसके साथ ही मोदी पर निर्धारित सीमा से ज्यादा पैसा चुनाव में खर्च करने का भी आरोप लगाया गया है। उन पर आरोप है कि चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि लोकसभा उम्मीदवार प्रचार पर 70 लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं करे, जबकि मोदी के चुनाव प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। याचिका में मोदी पर टोपियां, टी-शर्ट, आदि बांटकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
अहमदाबाद में खारिज हुआ था मामला
अहमदाबाद में इसके पहले आम आदमी पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विधानसभा चुनाव में पत्नी का नाम नहीं बताने पर याचिका दायर की गई थी, जिसको अहमदाबाद कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अहमदाबाद कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए निश्चित समय-सीमा खत्म हो जाने के कारण कोई केस नहीं बनता है।
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामांकन के दौरान मोदी ने हलफनामे में पत्नी जशोदाबेन के पैन कार्ड के ब्यौरे और आय के कॉलम खाली छोड़े हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। इसके साथ ही मोदी पर निर्धारित सीमा से ज्यादा पैसा चुनाव में खर्च करने का भी आरोप लगाया गया है। उन पर आरोप है कि चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि लोकसभा उम्मीदवार प्रचार पर 70 लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं करे, जबकि मोदी के चुनाव प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। याचिका में मोदी पर टोपियां, टी-शर्ट, आदि बांटकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
अहमदाबाद में खारिज हुआ था मामला
अहमदाबाद में इसके पहले आम आदमी पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विधानसभा चुनाव में पत्नी का नाम नहीं बताने पर याचिका दायर की गई थी, जिसको अहमदाबाद कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अहमदाबाद कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए निश्चित समय-सीमा खत्म हो जाने के कारण कोई केस नहीं बनता है।

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