स्विस बैंक खाताधारकों की सूची हासिल करने के हो रहे प्रयास : जेटली
नई दिल्ली : सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह स्विटजरलैंड में अवैध बैंक खाताधारकों की सूची हासिल करने के लिए सभी प्रयास कर रही है और इस संबंध में सबूत एकत्र किए जा रहे हैं।वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों के जवाब में बताया कि भारत स्विस प्रशासन के साथ संवाद प्रक्रिया में है और स्विस कानूनों के मापदंडों के तहत देश के सर्वश्रेष्ठ हित में एक समझौते पर हस्ताक्षर करेगा।उन्होंने बताया कि अवैध बैंक खाताधारकों की सूची उपलब्ध कराने के बारे में भारत द्वारा लिखे जाने के बाद स्विस प्रशासन ने कुछ कानूनी मुद्दे उठाए हैं।
जेटली ने स्विटजरलैंड के बैंकों में भारतीयों के काले धन के मसले पर अनुपूरक सवालों के जवाब में कहा, ‘‘ हम स्विस प्रशासन के साथ बात कर रहे हैं और जो भी सर्वश्रेष्ठ समझौता होगा, उनके कानूनों के अनुसार , हम उसे करेंगे।’’ वित्त मंत्री ने बताया कि अवैध बैंक खाताधारकों के संबंध में सूचना साझा करने के लिए भारत और स्विटजरलैंड के बीच जो संधि है वह भविष्य की है और इसीलिए यूरोपीय देश ऐसे खाताधारकों की पिछली सूची पर सहयोग नहीं कर रहा था।उन्होंने कहा, ‘भारत और स्विटजरलैंड के बीच की संधि भविष्य की प्रकृति की है और इसीलिए वे पहले दिए गए नामों के संबंध में सहयोग नहीं करेंगे।’
जेटली ने कहा, ‘लेकिन इस संबंध में हम स्विस प्रशासन के साथ हरसंभव प्रयास करेंगे। इस सूची के समर्थन में भारत सरकार जरूरी सबूत हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।’ जेटली ने कहा कि भारत को 700 अवैध स्विस बैंक खाताधारकों की सूची मिली थी जिसे फ्रांसीसी सरकार से इस शर्त पर हासिल किया गया था कि नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत को लिसटेनस्टेन बैंक से भी पूर्व में इस प्रकार की एक अन्य सूची मिली थी जिसके बाद भारत सरकार ने भारतीयों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने बताया कि चिन्हित किए गए ऐसे सभी लोगों के खिलाफ आयकर और आपराधिक प्रक्रिया की कार्रवाई शुरू की गयी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि स्विस बैंक में 700 अवैध भारतीय खाताधारकों की सूची फ्रांसीसी सरकार से मिली थी जिसे यह एचएसबीसी बैंक के डाटा से प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा, ‘जब फ्रांसीसी सरकार ने भारत सरकार को यह सूची दी थी तो भारत से उस समय एक हलफनामा लिया गया था। फ्रांसिसी सरकार ने इस पूर्व शर्त के साथ सूची दी थी कि इस सूची के नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।’
उन्होंने कहा, ‘हमने उन नामों को चिन्हित करने का प्रयास किया था। देश में ऐसे जितने भी लोगों की पहचान की गयी है उनके खिलाफ आयकर कार्यवाही शुरू की गई है।’ सत्ता में आने के तुरंत बाद नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा गठित किए गए विशेष जांच दल का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि टीम इन सारे मुद्दों को देखना चाहती है और जो भी ब्यौरा एसआईटी मांगेगा उसे वह उपलब्ध कराया जाएगा।
स्विटजरलैंड द्वारा भारत को ऐसे अवैध खाताधारकों की सूची भारत को उपलब्ध कराए जाने संबंधी रिपोर्टों के बारे में जेटली ने बताया कि सरकार ने स्विस प्रशासन को लिखा था जिसने जवाब में बताया कि उनके पास अलग से कोई सूची नहीं है। उन्होंने बताया, ‘अब जब हमने स्विटजरलैंड से सबूत मांगे तो उन्होंने कुछ कानूनी मुद्दे उठाए हैं।’ उन्होंने साथ ही कहा कि मौजूदा सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस सरकार के आने के बाद से ही उसने यह मुद्दा पूरी गंभीरता के साथ स्विस प्रशासन के साथ उठाया है।
जेटली ने कहा, ‘भारत के साथ स्विटजरलैंड का इस संबंध में 2011 से प्रभावी एक समझौता है। इसका अनुच्छेद 26 भारत और स्विटजरलैंड संबंधी सूचना के आदान प्रदान को नियमित करता है।’ उन्होंने कहा, ‘ये समझौते स्विस कानूनों की सीमाओं के मद्देनजर किए गए थे। इस मामले में स्विस कानून भी आकार लेने की प्रक्रिया में हैं। हम भावी बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं जिन पर उस देश में चर्चा हो रही है।’
जेटली ने यह भी कहा कि कानून के तहत विदेश में खाता खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे खातों के बारे में सूचनाएं जुटा रही है जो आरबीआई की अनुमति के बिना खोले गए और इस प्रकार के वे अवैध हैं।
जेटली ने स्विटजरलैंड के बैंकों में भारतीयों के काले धन के मसले पर अनुपूरक सवालों के जवाब में कहा, ‘‘ हम स्विस प्रशासन के साथ बात कर रहे हैं और जो भी सर्वश्रेष्ठ समझौता होगा, उनके कानूनों के अनुसार , हम उसे करेंगे।’’ वित्त मंत्री ने बताया कि अवैध बैंक खाताधारकों के संबंध में सूचना साझा करने के लिए भारत और स्विटजरलैंड के बीच जो संधि है वह भविष्य की है और इसीलिए यूरोपीय देश ऐसे खाताधारकों की पिछली सूची पर सहयोग नहीं कर रहा था।उन्होंने कहा, ‘भारत और स्विटजरलैंड के बीच की संधि भविष्य की प्रकृति की है और इसीलिए वे पहले दिए गए नामों के संबंध में सहयोग नहीं करेंगे।’
जेटली ने कहा, ‘लेकिन इस संबंध में हम स्विस प्रशासन के साथ हरसंभव प्रयास करेंगे। इस सूची के समर्थन में भारत सरकार जरूरी सबूत हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।’ जेटली ने कहा कि भारत को 700 अवैध स्विस बैंक खाताधारकों की सूची मिली थी जिसे फ्रांसीसी सरकार से इस शर्त पर हासिल किया गया था कि नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत को लिसटेनस्टेन बैंक से भी पूर्व में इस प्रकार की एक अन्य सूची मिली थी जिसके बाद भारत सरकार ने भारतीयों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने बताया कि चिन्हित किए गए ऐसे सभी लोगों के खिलाफ आयकर और आपराधिक प्रक्रिया की कार्रवाई शुरू की गयी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि स्विस बैंक में 700 अवैध भारतीय खाताधारकों की सूची फ्रांसीसी सरकार से मिली थी जिसे यह एचएसबीसी बैंक के डाटा से प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा, ‘जब फ्रांसीसी सरकार ने भारत सरकार को यह सूची दी थी तो भारत से उस समय एक हलफनामा लिया गया था। फ्रांसिसी सरकार ने इस पूर्व शर्त के साथ सूची दी थी कि इस सूची के नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।’
उन्होंने कहा, ‘हमने उन नामों को चिन्हित करने का प्रयास किया था। देश में ऐसे जितने भी लोगों की पहचान की गयी है उनके खिलाफ आयकर कार्यवाही शुरू की गई है।’ सत्ता में आने के तुरंत बाद नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा गठित किए गए विशेष जांच दल का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि टीम इन सारे मुद्दों को देखना चाहती है और जो भी ब्यौरा एसआईटी मांगेगा उसे वह उपलब्ध कराया जाएगा।
स्विटजरलैंड द्वारा भारत को ऐसे अवैध खाताधारकों की सूची भारत को उपलब्ध कराए जाने संबंधी रिपोर्टों के बारे में जेटली ने बताया कि सरकार ने स्विस प्रशासन को लिखा था जिसने जवाब में बताया कि उनके पास अलग से कोई सूची नहीं है। उन्होंने बताया, ‘अब जब हमने स्विटजरलैंड से सबूत मांगे तो उन्होंने कुछ कानूनी मुद्दे उठाए हैं।’ उन्होंने साथ ही कहा कि मौजूदा सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस सरकार के आने के बाद से ही उसने यह मुद्दा पूरी गंभीरता के साथ स्विस प्रशासन के साथ उठाया है।
जेटली ने कहा, ‘भारत के साथ स्विटजरलैंड का इस संबंध में 2011 से प्रभावी एक समझौता है। इसका अनुच्छेद 26 भारत और स्विटजरलैंड संबंधी सूचना के आदान प्रदान को नियमित करता है।’ उन्होंने कहा, ‘ये समझौते स्विस कानूनों की सीमाओं के मद्देनजर किए गए थे। इस मामले में स्विस कानून भी आकार लेने की प्रक्रिया में हैं। हम भावी बदलावों पर करीब से नजर रख रहे हैं जिन पर उस देश में चर्चा हो रही है।’
जेटली ने यह भी कहा कि कानून के तहत विदेश में खाता खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे खातों के बारे में सूचनाएं जुटा रही है जो आरबीआई की अनुमति के बिना खोले गए और इस प्रकार के वे अवैध हैं।

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