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ट्राई संशोधन बिल पास...

नई दिल्ली। मोदी सरकार के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का रास्ता साफ होता दिख रहा है। कांग्रेस, राजद, आप और आरएसपी के भारी विरोध के बीच मिश्रा की नियुक्ति से जुड़ा ट्राई संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है। विधेयक को लेकर विपक्ष में बिखराव साफ नजर आया। पहले विरोध कर रही तृणमूल भी विधेयक के समर्थन में आ गई। इससे विधेयक का राज्यसभा में भी पारित होने की संभावना है।

कांग्रेस, राजद, आप और माकपा ने विधेयक के विरोध में वॉकआउट किया। इसके बाद विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। वॉकआउट करने वाली पार्टियों ने भी विधेयक पर बहस के दौरान कहा कि उन्हें नृपेंद्र मिश्रा की ईमानदारी पर कोई शक नहीं है, लेकिन वे किसी भी लोकतांत्रिक नियमों और प्रक्रिया को तोड़े जाने के खिलाफ हैं। बहस का जवाब देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ट्राई कानून में मौजूद विसंगति को दूर करना है। मौजूदा कानून के मुताबिक ट्राई का पूर्व चेयरमैन रिटायर होने के दो साल बाद प्राइवेट नौकरी तो कर सकता है, लेकिन सरकारी नहीं।

सियायत भी तेज

मिश्रा की नियुक्ति के मसले पर सियासत भी तेज हो गई है। जदयू इस विधेयक का विरोध कर रही है जबकि राकांपा, बसपा और अन्नाद्रमुक ने विधेयक का समर्थन किया। करुणानिधि की पार्टी द्रमुक ने अभी तक इस मसले पर पत्ते नहीं खोले हैं। इससे मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है।

तृणमूल का यू-टर्न

तृणमूल कांग्रेस ने भी अब इस मसले पर 'यू-टर्न' ले लिया है। पार्टी ने विधेयक का समर्थन कर दिया। पार्टी नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री को किसी भी अधिकारी की नियुक्ति का अधिकार है। हालांकि, तृणमूल सांसद सौगत राय ने इससे पहले विधेयक का जमकर विरोध किया था।

नृपेंद्र मिश्रा : मोदी के सारथी

मिश्रा 2006 से 2009 के बीच ट्राई [भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण] के अध्यक्ष रह चुके हैं और 2009 में ही रिटायर हुए। ट्राई कानून इसके अध्यक्षों और सदस्यों को पद छोड़ने के बाद केंद्र या राज्य सरकारों में किसी अन्य पद पर नियुक्ति से प्रतिबंधित करता है। कानून का ये प्रावधान, जो मिश्रा को प्रधान सचिव नियुक्त करने के आडे़ आ सकता था, मोदी सरकार ने इसके संशोधन के लिए अध्यादेश लागू किया। अध्यादेश की जगह लेने के लिए विधेयक लाया गया है।

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