जानिये क्या होता है BUK MISSILE सिस्टम
नई दिल्ली : रूस की सीमा के समीप युद्ध प्रभावित यूक्रेन में गुरुवार देर रात मलेशियाई एयरलाइंस के एक विमान को ‘आतंकियों’ ने मार गिराया। मलेशियाई विमान एमएच-17 को निशाना बनाने में कथित तौर पर जिस बक मिसाइल लांचर का इस्तेमाल हुआ, उसका निर्माण रूस ने सोवियत संघ के अस्तित्व में होने के दौरान 1979 में किया था। बक मिसाइल लांचर से 72 हजार फीट तक हवा में मार की जा सकती है। यूक्रेन की सीमा में आतंकवादियों ने जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ‘बक’ का इस्तेमाल कर विमान को मार गिराया।
बक मिसाइल सिस्टम से 50 फीट से लेकर 72000 फीट की ऊंचाई तक एयरक्राफ्ट (लक्ष्य) को निशाना बनाया जा सकता है। गौर हो कि मलेशियाई विमान को 33000 फीट की ऊंचाई पर निशाना बनाया गया। बक मिसाइल सिस्टम से तीन-तीन मिसाइल टारगेट पर एक साथ छोड़ी जा सकती हैं। इसके चलते लक्ष्य को भेदने की गुंजाइश काफी अधिक होती है। बक मिसाइल सिस्टम को पूर्व सोवियत यूनियन और रसियन फेडरेशन ने डिजाइन किया था। इन मिसाइलों को क्रूज मिसाइल और अज्ञात विमानों पर हमलों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। 17 जनवरी, 1972 को मिसाइल बनाने का काम शुरू किया गया था।
रक्षा उपकरणों के जानकारों के अनुसार, बक मिसाइल सिस्टम (कोड भाषा में एसए 11 गैडफ्लाई) एक रूस निर्मित मध्यम रेंज का जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। इस मिसाइल को उच्च दर्जे के एयरक्राफ्ट और क्रूज मिसाइलों से रक्षा के मद्देनजर तैयार किया गया है। एसए-11 यानी बक मिसाइल सिस्टम अपने पिछले संस्करण एसए-6 से अधिक उन्नत है। वैसे इस एक रॉकेट पर तीन मिसाइलें लैस की जाती हैं और इसकी दिशा निर्धारित करने के लिए रडार प्रणाली भी होती है। वहीं, एक अन्य रॉकेट पर लक्ष्य बताने वाला स्नो ड्रिफ्ट रडार भी मौजूद होता है।
बक मिसाइल लांचर आधुनिक रडार से लैस है। इसके चलते एक साथ कई मिसाइलें विभिन्न दिशाओं में दागी जा सकती हैं। इस मिसाइल लांचर के आधुनिक मॉडल के जरिये ड्रोन विमानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। रूस ने ऐसे मिसाइल सिस्टम सीरिया समेत कई देशों को बेचे हैं।
हालांकि यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों ने इतनी क्षमता की मिसाइल अपने पास होने से इन्कार किया है, लेकिन पश्चिमी देशों की एक समाचार एजेंसी के संवाददाता ने दावा किया है कि उसने बक मिसाइल लांचर जैसा हथियार इन विद्रोहियों के पास देखा है। विद्रोहियों के पास अन्य आधुनिक हथियार भी हैं। इनमें से अधिकांश वही हैं जो रूसी सेना के पास रहे हैं। यूक्रेन, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस गुपचुप रूप से विद्रोहियों को आधुनिक हथियार दे रहा है। लंदन स्थित सैन्य मामलों के एक रूसी विशेषज्ञ इगोर सुत्यागिन के अनुसार यूक्रेनी विद्रोहियों के पास इतनी क्षमता नहीं कि वे विमान को मिसाइल से भेद सकें। उन्होंने बक लांचर सिस्टम के इस्तेमाल के लिए किसी विशेषज्ञ की सेवाएं ली हो सकती हैं। यूक्रेन सेना के पास भी बक लांचर सिस्टम है। इगोर के मुताबिक पिछले दिनों विद्रोहियों ने इस लांचर सिस्टम से लैस यूक्रेन के एक सैन्य अड्डे पर कब्जा कर लिया था, लेकिन वह उनके काम का नहीं, क्योंकि वे इस सिस्टम का उपयोग करना नहीं जानते।
सैन्य मामलों के एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक विमान को गिराने का काम किसी सैन्य तंत्र के बस का ही है। या तो रूसी सेना की ओर से मिसाइल दागी गई या फिर यूक्रेन की ओर से। अगर विद्रोहियों ने यह काम किया है तो उन्हें रूस का सहयोग मिला होगा। विशेषज्ञों के अनुसार चूंकि नाटो का निगरानी तंत्र मिसाइल के स्रोत के बारे में नहीं जान सका है, इसलिए मलेशियाई विमान किसकी मिसाइल की चपेट में आया, इस गुत्थी को सुलझाना मुश्किल हो सकता है।
गौर हो कि रूस की सीमा के समीप युद्ध प्रभावित यूक्रेन में गुरुवार देर रात मलेशियाई एयरलाइंस के एक विमान को ‘आतंकियों’ ने मार गिराया, जिससे उसमें सवार सभी 295 लोगों की मौत हो गई।ऐसा माना जा रहा है कि आतंकियों ने इसे रूसी विमान समझकर निशाना बनाया। हिंद महासागर में मलेशियाई विमान एमएच 370 के रहस्यमय ढंग से लापता होने के चार महीने बाद यह हादसा हुआ है। मलेशियाई एयरलाइंस का विमान बोइंग 777 एम्सटर्डम से कुआलालंपुर जा रहा था। उसमें 280 यात्री और चालक दल के 15 सदस्य मौजूद थे।
बक मिसाइल सिस्टम से 50 फीट से लेकर 72000 फीट की ऊंचाई तक एयरक्राफ्ट (लक्ष्य) को निशाना बनाया जा सकता है। गौर हो कि मलेशियाई विमान को 33000 फीट की ऊंचाई पर निशाना बनाया गया। बक मिसाइल सिस्टम से तीन-तीन मिसाइल टारगेट पर एक साथ छोड़ी जा सकती हैं। इसके चलते लक्ष्य को भेदने की गुंजाइश काफी अधिक होती है। बक मिसाइल सिस्टम को पूर्व सोवियत यूनियन और रसियन फेडरेशन ने डिजाइन किया था। इन मिसाइलों को क्रूज मिसाइल और अज्ञात विमानों पर हमलों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। 17 जनवरी, 1972 को मिसाइल बनाने का काम शुरू किया गया था।
रक्षा उपकरणों के जानकारों के अनुसार, बक मिसाइल सिस्टम (कोड भाषा में एसए 11 गैडफ्लाई) एक रूस निर्मित मध्यम रेंज का जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। इस मिसाइल को उच्च दर्जे के एयरक्राफ्ट और क्रूज मिसाइलों से रक्षा के मद्देनजर तैयार किया गया है। एसए-11 यानी बक मिसाइल सिस्टम अपने पिछले संस्करण एसए-6 से अधिक उन्नत है। वैसे इस एक रॉकेट पर तीन मिसाइलें लैस की जाती हैं और इसकी दिशा निर्धारित करने के लिए रडार प्रणाली भी होती है। वहीं, एक अन्य रॉकेट पर लक्ष्य बताने वाला स्नो ड्रिफ्ट रडार भी मौजूद होता है।
बक मिसाइल लांचर आधुनिक रडार से लैस है। इसके चलते एक साथ कई मिसाइलें विभिन्न दिशाओं में दागी जा सकती हैं। इस मिसाइल लांचर के आधुनिक मॉडल के जरिये ड्रोन विमानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। रूस ने ऐसे मिसाइल सिस्टम सीरिया समेत कई देशों को बेचे हैं।
हालांकि यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों ने इतनी क्षमता की मिसाइल अपने पास होने से इन्कार किया है, लेकिन पश्चिमी देशों की एक समाचार एजेंसी के संवाददाता ने दावा किया है कि उसने बक मिसाइल लांचर जैसा हथियार इन विद्रोहियों के पास देखा है। विद्रोहियों के पास अन्य आधुनिक हथियार भी हैं। इनमें से अधिकांश वही हैं जो रूसी सेना के पास रहे हैं। यूक्रेन, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस गुपचुप रूप से विद्रोहियों को आधुनिक हथियार दे रहा है। लंदन स्थित सैन्य मामलों के एक रूसी विशेषज्ञ इगोर सुत्यागिन के अनुसार यूक्रेनी विद्रोहियों के पास इतनी क्षमता नहीं कि वे विमान को मिसाइल से भेद सकें। उन्होंने बक लांचर सिस्टम के इस्तेमाल के लिए किसी विशेषज्ञ की सेवाएं ली हो सकती हैं। यूक्रेन सेना के पास भी बक लांचर सिस्टम है। इगोर के मुताबिक पिछले दिनों विद्रोहियों ने इस लांचर सिस्टम से लैस यूक्रेन के एक सैन्य अड्डे पर कब्जा कर लिया था, लेकिन वह उनके काम का नहीं, क्योंकि वे इस सिस्टम का उपयोग करना नहीं जानते।
सैन्य मामलों के एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक विमान को गिराने का काम किसी सैन्य तंत्र के बस का ही है। या तो रूसी सेना की ओर से मिसाइल दागी गई या फिर यूक्रेन की ओर से। अगर विद्रोहियों ने यह काम किया है तो उन्हें रूस का सहयोग मिला होगा। विशेषज्ञों के अनुसार चूंकि नाटो का निगरानी तंत्र मिसाइल के स्रोत के बारे में नहीं जान सका है, इसलिए मलेशियाई विमान किसकी मिसाइल की चपेट में आया, इस गुत्थी को सुलझाना मुश्किल हो सकता है।
गौर हो कि रूस की सीमा के समीप युद्ध प्रभावित यूक्रेन में गुरुवार देर रात मलेशियाई एयरलाइंस के एक विमान को ‘आतंकियों’ ने मार गिराया, जिससे उसमें सवार सभी 295 लोगों की मौत हो गई।ऐसा माना जा रहा है कि आतंकियों ने इसे रूसी विमान समझकर निशाना बनाया। हिंद महासागर में मलेशियाई विमान एमएच 370 के रहस्यमय ढंग से लापता होने के चार महीने बाद यह हादसा हुआ है। मलेशियाई एयरलाइंस का विमान बोइंग 777 एम्सटर्डम से कुआलालंपुर जा रहा था। उसमें 280 यात्री और चालक दल के 15 सदस्य मौजूद थे।

No comments
सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com