अच्छे दिन : टमाटर से सस्ता हुआ पेट्रोल
रीवा : जीएसटी का असर और कहीं दिखे न दिखे,सब्जियों में जरूर उतर आया है। क्योंकि सब्जियों की आवक कम हो जाने से इनके भावों में भी तेजी बनी हई है। सबसे ज्यादा दाम टमाटर के उछले हैं। शहर का सब्जी मंडी में मंगलवार को टमाटर 80 से 90 रुपये किलो बिका। इस संबंध में थोक सब्जी व्यापारियों का कहना है कि टमाटर बाहरी मंडियों से मंगाए जा रहे हैं। वहीं के निर्धारित किये गये रेट के मुताबिक हम लोग उठाव कर रहे हैं।
गर्मी के महीने महज 4-5 रुपये किलो की दर से मिलने वाला टमाटर अब 100 रुपये के आसपास पहुंचने को आतुर है। आलम यह है कि टमाटर पेट्रोल से भी मंहगा हो चला। जिसे खरीदना आम उपभोक्ताओं के बूते में नहीं। जीएसटी लागू होने के पश्चात सब्जियों की कीमत इस कदर चढ़ना लोगों को रास नहीं आ रहा है। दूसरी तरफ स्थानीय सब्जी उत्पादकों को हैरत है कि सरकार जहां एक तरफ किसानों के लिये बड़ी-बड़ी बातें करती है मगर मंडी पर उसका नियंत्रण फेल है।
दलालों और जमाखोरों ने मंडी को मौसमी कमाई का सबसे बड़ा जरिया बना रखा है। इधर आमजनों का कहना कि जिस तरह जीएसटी में प्रत्येक वस्तुओं की कीमत फिक्स की गयी है तो सब्जियों में क्यों न हो सकी। क्या ज्ीएसटी केवल कार्पोरेट और उद्योगपतियों के लिये बना है। जबकि आम जनता के लिये सबसे जरूरी सब्जी है।
थोक सब्जी व्यापारियों के मुताबिक भिंडी,लौकी, करेला की आवक बामुश्किल 5-6 टन के आसपास रह गई है। जबकि इनकी आवक दोगुना रहती है। बताया जाता है कि बारिश में देरी के कारण और जीएसटी के बाद सब्जियों के भाव बढ़कर दोगुना हो गए हैं। ज्यादातर सब्जियां फुटकर में 30 से 60 रुपए किलो बिक रहीं हैं। केले, सेब, अनार जैसे फल भी महंगे हो गए हैं।
सब्जी मंडी में सिर्फ आलू और प्याज के भाव ने मामूली बढ़त ली है। इनके भाव लगभग स्थिर है। कारण यह है इन्हें बाहर से नहीं मंगवाना पड़ रहा है। स्टोर में इनका पर्याप्त स्टाक है।
अधिकांश टमाटर बाहर से आता है। 4 से5 गाड़ी ही टमाटर आ रहा है। इस वजह से इसके दाम 80-90 रुपए किलो बने हुए हैं। लोकल टमाटर करीब महीने भी बाद तैयार होगा। मंडी में ज्यादातर सब्जी बाहर से मंगाई जा रही है। गाड़ी का भाड़ा, हम्माली वगैरह लगती है। इस कारण थोक में ही सब्जियों के दाम 20 से 30 रुपए किलो के बीच पड़ रहा है। फुटकर में यही सब्जी 40 से 60 रुपए किलो में बिक रही है।
दरअसल शहर से लगे गांवों में सब्जियों की बोवनी पिछले महीने हो गई थी। किसानों ने पुराने पानी से जो फसल लगा रखी थी, वही मंडी में आ रही है। इसलिए सब्जियों की आवक कम है। वैसे अब किसानों ने बोवनी कर ली है। लेकिन जल्दी तैयार होने वाली सब्जी इस बार 15 से 20 दिन की देरी से मंडी में आएंगी। बैंगन, करेला की आवक इन दिनों काफी कम हो रही है।
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