मैहर नवरात्र में बह रही भक्ति की गंगा, तीसरे दिन भी लगा हुआ हैं भक्तो का तांता
सतना। शारदीय नवरात्र पर मैहर धाम इन दिनों भक्ति हो गया है। त्रिकूट पर्वत पर विराज माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्त शारदा मां की भक्ति में लीन हो गए है। चारों तरफ भक्ति की बयार बह रही है। नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की तृतीय शक्ति का मां चंद्रघंटा की पूजा की गई। पंडितों की मानें तो नवरात्रि विग्रह के तीसरे मां का पूजन किया जाता है।
इस दिन मां का स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी लिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मेला के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था बनाई है। जगह-जगह पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी मेला व्यवस्था में नजर आए। सीसीटीवी कैमरे से पल-पल की निगरानी की जा रही है।
भक्तों का तांता
गौरतलब है कि, मां शारदा धाम मैहर में देशभर के लाखों भक्त रोजाना पहुंच रहे है। बैरियर बंधे से लेकर माता के दर तक भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिर तक पहुंचने वाले भक्त सीढ़ी, रोपवे का सहारा ले रहे है। भक्त बारी-बारी से कृमश: माता के दर्शन कर रहे है।
गौरतलब है कि, मां शारदा धाम मैहर में देशभर के लाखों भक्त रोजाना पहुंच रहे है। बैरियर बंधे से लेकर माता के दर तक भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिर तक पहुंचने वाले भक्त सीढ़ी, रोपवे का सहारा ले रहे है। भक्त बारी-बारी से कृमश: माता के दर्शन कर रहे है।
खुफिया एजेंसिया सतर्क
सुरक्षा की द्रष्टि से कई खुफिया एजेंसिया सतर्क है। मेला क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की निगरानी की जा रही है। हालांकि ऐहतियातन शारदा प्रबंध समिति ने कुछ रेस्क्यू रास्ते बनाए हुए है। जिनको विपरीत परिस्थतियों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सुरक्षा की द्रष्टि से कई खुफिया एजेंसिया सतर्क है। मेला क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की निगरानी की जा रही है। हालांकि ऐहतियातन शारदा प्रबंध समिति ने कुछ रेस्क्यू रास्ते बनाए हुए है। जिनको विपरीत परिस्थतियों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
तीसरे दिन की पूजा का अधिक महत्व
चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है। चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। इनके दस हाथ हैं। दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं। इनका वाहन सिंह है। इनके घंटे की भयानक चडंध्वनि से दानव, अत्याचारी, दैत्य, राक्षस डरते रहते हैं। नवरात्र की तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्तव है।
चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है। चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। इनके दस हाथ हैं। दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं। इनका वाहन सिंह है। इनके घंटे की भयानक चडंध्वनि से दानव, अत्याचारी, दैत्य, राक्षस डरते रहते हैं। नवरात्र की तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्तव है।
सभी पाप हो जाते है नष्ट
इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंध और विविध दिव्य ध्वनियां सुनायी देती हैं। मां चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं विनष्ट हो जाती हैं। इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने की होती हैं, अत: भक्तों के कष्ट का निवारण ये शीघ्र कर देती हैं।
इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंध और विविध दिव्य ध्वनियां सुनायी देती हैं। मां चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं विनष्ट हो जाती हैं। इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने की होती हैं, अत: भक्तों के कष्ट का निवारण ये शीघ्र कर देती हैं।
सभी बाधाएं दूर
देवी चन्द्रघंटा की भक्ति से आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। जो व्यक्ति मां चंद्रघंटा की श्रद्धा एवं भक्ति भाव सहित पूजा करता है उसे मां की कृपा प्राप्त होती है जिससे वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान प्राप्त करता है। मां के भक्त के शरीर से अदृश्य उर्जा का विकिरण होता रहता है जिससे वह जहां भी होते हैं वहां का वातावरण पवित्र और शुद्ध हो जाता है, इनके घंटे की ध्वनि सदैव भक्तों की प्रेत-बाधा आदि से रक्षा करती है तथा उस स्थान से भूत, प्रेत एवं अन्य प्रकार की सभी बाधाएं दूर हो जाती है।
देवी चन्द्रघंटा की भक्ति से आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। जो व्यक्ति मां चंद्रघंटा की श्रद्धा एवं भक्ति भाव सहित पूजा करता है उसे मां की कृपा प्राप्त होती है जिससे वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान प्राप्त करता है। मां के भक्त के शरीर से अदृश्य उर्जा का विकिरण होता रहता है जिससे वह जहां भी होते हैं वहां का वातावरण पवित्र और शुद्ध हो जाता है, इनके घंटे की ध्वनि सदैव भक्तों की प्रेत-बाधा आदि से रक्षा करती है तथा उस स्थान से भूत, प्रेत एवं अन्य प्रकार की सभी बाधाएं दूर हो जाती है।

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