स्वच्छ भारत अभियान : जापान की तर्ज पर MP के होशंगाबाद में बना देश का पहला डॉग टॉयलेट
होशंगाबाद। मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में जापान की तर्ज पर देश का पहला डॉग टॉयलेट बनाया गया है।यह डॉग टॉयलेट नगरपालिका परिषद द्वारा बनवाया गया है, ताकी प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा किया जा सके। नपा ने पिछले सत्र में परिषद में डॉग टॉयलेट का प्रस्ताव पारित किया था।जिसका काम काफी दिनों से चल रहा था, अब यह बनकर तैयार हो चुका है, हालांकि कुछ बाहर काम अभी भी बाकी है, जो दो-तीन दिन में पूरा हो जाएगा। पूरे शहरभर में यह चर्चा का केंद्र बना हुआ है तो कई लोग इसके उपयोग करने को लेकर आश्चर्यचकित हैं।दूसरे चरण में नपा अन्य जगहों पर इसी तरह के टॉयलेट बनाने का काम करेगी।
बता दे कि आमतौर पर डॉग टॉयलेट विदेश में बनाए जाते हैं, जापान में इनकी संख्या में कुछ ज्यादा है।
दरअसल, शहर को साफ रखने के लिए नगर पालिका परिषद ने सर्किट हाउस के पास इस टॉयलेट को बनाया गया है। करीब 6 महीने पहले डॉग टॉयलेट बनाने का निर्णय नगर पालिका की बैठक में लिया गया था। अब निर्माण पूरा होने के बाद यह खुले में शौच मुक्त के लिए तैयार किया गया यह टॉयलेट देश में पहला 'डॉग टायलेट' बना गया है। नगर पालिका ने इस काम के लिए 10 लाख रुपए का बजट बनाया गया है। एक डॉग टॉयलेट की लागत करीब 50 हजार है। करीब 9 और जगहों पर ऐसे टॉयलेट बनाए जाना प्रस्तावित है।
ये है खासियत
यह डॉग टॉयलेट सर्किट हाऊस रोड पर 60 हजार की लागत से तैयार किया गया है। डॉग टॉयलेट में सोक पिट के ऊपर प्लेटफॉर्म बनाया है। इसकी सफाई के लिए फ्लश और पानी की सुविधा भी है, जिससे गंदगी पिट के अंदर चली जाएगी।वही लाइट और जाली की बाउंड्री भी बनाई गई है। वही इसके लिए सर्किट चौराहे से घाट, पीडब्ल्यूडी ऑफिस रोड होते हुए एसएनजी मैदान के सामने निकले रास्ते पर 17 लाख की लागत से वॉकिंग पाथ बनाया जा रहा है।
गंदगी पर जुर्माना
इस टॉयलेट को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि देशभर की तरह प्रदेशभऱ में भी स्वच्छता अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। लेकिन शहर अपने कुत्तों को घुमाने बाहर ले जाते हैं, जिसके दौरान वे पार्क, सड़क किनारे टॉयलेट करने के लिए छोड़ देते हैं। इससे शहर में गंदगी बढ़ रही है।अब लोग कुत्तों को सीधे टॉयलेट में ले जाएंगे, जिससे शहर गंदा नहीं होगा।साथ ही उनको चेतावनी दी जाएगी कि वे आदेश का पालन करे नही तो उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
टीम करेगी फैसला
शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 शुरू हो गया है। केंद्र की टीम ने 26 फरवरी तक शहर की सफाई को सर्वेक्षण के पैमानों पर परखेगी। पहले दिन टीम ने नपा से दस्तावेज लेकर सर्किट हाउस क्षेत्र का दौरा किया और स्वच्छता व्यवस्था देखी। टीम निरीक्षण के लिए स्पॉट तय कर के आई है। अब नपा के काम के काम के अलावा नागरिकों का फीडबैक ही शहर की रैंकिंग तय करेगा।
बता दे कि आमतौर पर डॉग टॉयलेट विदेश में बनाए जाते हैं, जापान में इनकी संख्या में कुछ ज्यादा है।
दरअसल, शहर को साफ रखने के लिए नगर पालिका परिषद ने सर्किट हाउस के पास इस टॉयलेट को बनाया गया है। करीब 6 महीने पहले डॉग टॉयलेट बनाने का निर्णय नगर पालिका की बैठक में लिया गया था। अब निर्माण पूरा होने के बाद यह खुले में शौच मुक्त के लिए तैयार किया गया यह टॉयलेट देश में पहला 'डॉग टायलेट' बना गया है। नगर पालिका ने इस काम के लिए 10 लाख रुपए का बजट बनाया गया है। एक डॉग टॉयलेट की लागत करीब 50 हजार है। करीब 9 और जगहों पर ऐसे टॉयलेट बनाए जाना प्रस्तावित है।
ये है खासियत
यह डॉग टॉयलेट सर्किट हाऊस रोड पर 60 हजार की लागत से तैयार किया गया है। डॉग टॉयलेट में सोक पिट के ऊपर प्लेटफॉर्म बनाया है। इसकी सफाई के लिए फ्लश और पानी की सुविधा भी है, जिससे गंदगी पिट के अंदर चली जाएगी।वही लाइट और जाली की बाउंड्री भी बनाई गई है। वही इसके लिए सर्किट चौराहे से घाट, पीडब्ल्यूडी ऑफिस रोड होते हुए एसएनजी मैदान के सामने निकले रास्ते पर 17 लाख की लागत से वॉकिंग पाथ बनाया जा रहा है।
गंदगी पर जुर्माना
इस टॉयलेट को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि देशभर की तरह प्रदेशभऱ में भी स्वच्छता अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। लेकिन शहर अपने कुत्तों को घुमाने बाहर ले जाते हैं, जिसके दौरान वे पार्क, सड़क किनारे टॉयलेट करने के लिए छोड़ देते हैं। इससे शहर में गंदगी बढ़ रही है।अब लोग कुत्तों को सीधे टॉयलेट में ले जाएंगे, जिससे शहर गंदा नहीं होगा।साथ ही उनको चेतावनी दी जाएगी कि वे आदेश का पालन करे नही तो उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
टीम करेगी फैसला
शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 शुरू हो गया है। केंद्र की टीम ने 26 फरवरी तक शहर की सफाई को सर्वेक्षण के पैमानों पर परखेगी। पहले दिन टीम ने नपा से दस्तावेज लेकर सर्किट हाउस क्षेत्र का दौरा किया और स्वच्छता व्यवस्था देखी। टीम निरीक्षण के लिए स्पॉट तय कर के आई है। अब नपा के काम के काम के अलावा नागरिकों का फीडबैक ही शहर की रैंकिंग तय करेगा।

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