दिल्ली गैंगरेपः नाबालिग 'दरिंदे' को मिली तीन साल की सजा
नई दिल्ली | 16 दिसंबर के गैंगरेप के नाबालिग आरोपी को
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने हत्या और गैंगरेप के जुर्म में दोषी करार दिया.
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को हत्या और गैंगरेप के जुर्म में महज
तीन साल कैद की सजा सुनाई.नाबालिग पर रेप और हत्या का आरोप था, 11 जुलाई को
कोर्ट ने इस आरोपी को लूटपाट का दोषी करार दिया था. नाबालिग पर लगे सभी
आरोप सही पाए गए हैं. नाबालिग आरोपी पर लूट, हत्या और गैंगरेप समेत 15
धाराएं लगाई गई थी. शनिवार को नाबालिग को 12 मामलों में दोषी करार दिया
गया.बचाव पक्ष के वकील राजेश तिवारी ने कहा कि बोर्ड इस फैसले की फिर से
समीक्षा करेगी और अगर उसे लगा तो सजा कम भी की जा सकती है. जिस दिन से उसे
बाल सुधार गृह भेजा गया है, उसी दिन से सजा की शुरुआत मानी जाएगी.
पीड़िता की मां ने जताया अफसोस
वहीं इस फैसले से पीड़िता की मां काफी नाखुश हैं. उन्होंने कहा कि 3 साल की सजा देने से अच्छा इस नाबालिग आरोपी को छोड़ ही देते. उन्होंने कहा, 'जनता को गलत संदेश जा रहा है कि नाबालिग आरोपी को सजा नहीं मिलेगी चाहे वो किसी के साथ दरिंदगी करे या कुछ भी करे.'
पहले चार बार टल चुका था फैसला
नाबालिग आरोपी पर पुलिस ने हत्या और रेप की धाराएं लगाई थीं. पुलिस ने उसे सभी आरोपियों में सबसे 'जघन्य' अपराध का आरोपी माना है. हाई कोर्ट ने 22 अगस्त को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को फैसला सुनाने की इजाजत दे दी थी. 11 जुलाई से नाबालिग आरोपी पर फैसला चार बार टल चुका था. इसकी वजह वह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका है, जिसमें 'नाबालिग' शब्द की उम्र सीमा घटाने 18 से घटाकर 16 करने की मांग की गई थी. लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
फैसले पर राजनीतिक गलियारे से प्रतिक्रिया...
दिल्ली गैंगरेप मामले में नाबालिग आरोपी को मिली सजा पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, 'अगर 17 साल उसकी उम्र थी तो उसे मालूम था कि वो क्या अपराध कर रहा है. इसलिए उसे नासमझ मानना ठीक नहीं है.'
बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि कानून में जो बदलाव करना होगा वो जरूर किया जाएगा, लेकिन बच्चों के हक में जो सही होगा वही किया जाएगा.
क्या है पूरा मामला...
16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक 23 साल की छात्रा के साथ छह दरिंदों ने एक चलती बस में गैंगरेप किया था और फिर उसे फेंक दिया था. 13 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद लड़की की सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी. एक नाबालिग भी इस गघन्य अपराध में शामिल था. दिल्ली पुलिस के मुताबिक नाबालिग आरोपी ने ही छात्रा के साथ सबसे ज्यादा हैवानियत की थी. उसी ने बाकी आरोपियों को दरिंदगी के लिए उकसाया भी था.
पीड़िता की मां ने जताया अफसोस
वहीं इस फैसले से पीड़िता की मां काफी नाखुश हैं. उन्होंने कहा कि 3 साल की सजा देने से अच्छा इस नाबालिग आरोपी को छोड़ ही देते. उन्होंने कहा, 'जनता को गलत संदेश जा रहा है कि नाबालिग आरोपी को सजा नहीं मिलेगी चाहे वो किसी के साथ दरिंदगी करे या कुछ भी करे.'
पहले चार बार टल चुका था फैसला
नाबालिग आरोपी पर पुलिस ने हत्या और रेप की धाराएं लगाई थीं. पुलिस ने उसे सभी आरोपियों में सबसे 'जघन्य' अपराध का आरोपी माना है. हाई कोर्ट ने 22 अगस्त को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को फैसला सुनाने की इजाजत दे दी थी. 11 जुलाई से नाबालिग आरोपी पर फैसला चार बार टल चुका था. इसकी वजह वह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका है, जिसमें 'नाबालिग' शब्द की उम्र सीमा घटाने 18 से घटाकर 16 करने की मांग की गई थी. लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
फैसले पर राजनीतिक गलियारे से प्रतिक्रिया...
दिल्ली गैंगरेप मामले में नाबालिग आरोपी को मिली सजा पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, 'अगर 17 साल उसकी उम्र थी तो उसे मालूम था कि वो क्या अपराध कर रहा है. इसलिए उसे नासमझ मानना ठीक नहीं है.'
बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि कानून में जो बदलाव करना होगा वो जरूर किया जाएगा, लेकिन बच्चों के हक में जो सही होगा वही किया जाएगा.
क्या है पूरा मामला...
16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक 23 साल की छात्रा के साथ छह दरिंदों ने एक चलती बस में गैंगरेप किया था और फिर उसे फेंक दिया था. 13 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद लड़की की सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी. एक नाबालिग भी इस गघन्य अपराध में शामिल था. दिल्ली पुलिस के मुताबिक नाबालिग आरोपी ने ही छात्रा के साथ सबसे ज्यादा हैवानियत की थी. उसी ने बाकी आरोपियों को दरिंदगी के लिए उकसाया भी था.

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