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6 करोड़ अनुदान, 7 करोड़ देना पड़ता है वेतन!

जबलपुर | रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) की माली स्थिति कितनी खराब चल रही है। इसका खुलासा खुद आरडीयू कुलपति ने प्राचार्यों की बैठक में कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य शासन से मिलने वाली राशि के मुकाबले विश्वविद्यालय को वेतन में ज्यादा राशि बांटनी पड़ रही है। दरअसल, फीस वृद्धि को जयाज बताने के उद्देश्य से कुलपति यह दलील दे रहे थे। उन्होने बड़ी ही सहजता से फीस वृद्धि का मामला राज्य शासन के पाले में डाल दिया।
बताया जाता है कि कल आरडीयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय से संबंद्ध सात जिलों के प्राचार्यों की एक बैठक बुलाई थी। बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा बढ़ाई गई फीस पर चर्चा की गई। प्राचार्यों को कुलपति केएन सिंह यादव ने बताया कि कर्मचारियों,अधिकारियों व शिक्षकों के वेतन में हर वर्ष करीब 7 करोड़ रुपए भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं राज्य शासन से अनुदान के रूप मात्र 6 करोड़ रुपए ही मिलते हैं। जिसके चलते शैक्षणिक गतिविधियों को अंजाम देने में काफी दिक्कत आ रही है। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए हर वर्ष 12 करोड़ की आवश्यकता है। इसे लेकर जानकारों का कहना है कि कुलपति की बात है तो तर्क संगत। जब तक राजनीतिक समीकरण विश्वविद्यालयों के संचालन में हावी रहेंगे, स्थिति में सुधार होने के आसार कम ही है। यही कारण है कि विवि पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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