हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल: मनमोहन
नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं
पर चिंता जताई और कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों को दंडित किया
जाएगा। राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक के उद्घाटन में प्रधानमंत्री ने कहा
कि सरकार को सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए,
फिर चाहे वे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों। अगर किसी भी पार्टी का कोई
भी व्यक्ति इस तरह की घटनाओं में संलिप्त पाया जाता है तो उसे दंडित किया
जाएगा।
उन्होंने
सांप्रदायिक हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने में सोशल मीडिया का
इस्तेमाल किया गया है। पूर्व में पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हिंसा
भड़काने में इसका इस्तेमाल हुआ था। हमें सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने का
रास्ता तलाशना होगा।
पीएम
ने कहा कि हाल के सांप्रदायिक हिंसा के पीछे कुछ ऐसी नकली वीडियो का
सर्रकुलेशन सामने आया है जिससे सौहार्द बिगड़ा। पिछले साल उत्तर पूर्व में
भी इसी तरह से सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल हुआ था। सोशल मीडिया से युवाओं
को जानकारी मिलती है। मुझे उम्मीद है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने
के लिए भी आज चर्चा होगी।
क्या कहा पीएम ने?
प्रधानमंत्री
ने हिंदी में बोलते हुए कहा कि राष्ट्र आज की बैठक मुजफ्फरनगर दंगो के
तुरंत बाद हो रही है। इस कारण इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। पीएम ने कहा
कि हाल के दिनों में सांप्रदायिक हिंसा की कुछ और घटनाओं भी हुई हैं।
किश्तवाड़ में, बिहार के नवादा में और आंध्र प्रदेश में भी ऐसी घटनाएं होती
रही है। उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में कुछ घटनाएं हुई है।
पीएम
ने कहा कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रविरोधी ताकतें विभिन्न संप्रदायों के बीच
छोटे-छोटे मुद्दों को भड़काती है। उन्होंने कहा कि दंगा करने और भड़काने
वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार की पूरी ताकत का इस्तेमाल होना
चाहिए। चाहे कोई कितना भी बड़ा हो, किसी भी दल का हो सख्त कार्रवाई करनी
चाहिए। पीएम ने कहा कि यह बहस कि दंगों से किस दल को फायदा होगा बहुत ही
दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे न तो साप्रदायिक रंग दे और न ही इस पर राजनीति की
जानी चाहिए।

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