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पहली बार पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी धोनी एंड कंपनी

नई दिल्ली।। टीम इंडिया जब अगले साल इंग्लैंड दौरे पर जाएगी तो कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सहित उनके लगभग सभी साथियों के नाम पर एक रेकॉर्ड जुड़ेगा। ये खिलाड़ी अपने करियर में पहली बार पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेंगे। इंग्लैंड अगले साल जुलाई अगस्त में पांच टेस्ट मैचों के लिये भारतीय टीम की मेजबानी करेगा। पिछले कुछ सालों में अमूमन इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ही एशेज श्रृंखला में पांच टेस्ट मैच शामिल किये जाते रहे हैं, जबकि भारत ने 2002 से ऐसी कोई सीरीज नहीं खेली है।

इस तरह से यह धोनी के लिये भी नया अनुभव होगा जिन्होंने अब तक 77 टेस्ट मैच खेल लिए हैं। यही नहीं 200वां टेस्ट खेलने की दहलीज पर खड़े सचिन तेंडुलकर ने अपने 24 साल के करियर में केवल तीन बार पांच मैचों की सीरीज खेली हैं। भारत के वर्तमान खिलाडि़यों में तेंडुलकर के अलावा केवल जहीर खान और हरभजन सिंह को पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला में खेलने का अनुभव हासिल है। भारत ने आखिरी बार पांच टेस्ट मैचों की सीरीज अप्रैल 2002 में वेस्ट इंडीज दौरे में खेली थी। उस सीरीज में तेंडुलकर के अलावा जहीर खान और हरभजन सिंह ने भी हिस्सा लिया था जो अभी भारत की तरफ से खेल सकते हैं। हरभजन उस सीरीज के केवल तीन मैचों में खेले थे।

तेंडुलकर ने अपने करियर में तीन बार पांच टेस्ट मैचों वाली सीरीज में भाग लिया था। उन्होंने पहली बार 1991-92 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे में पांच टेस्ट मैच खेले थे। इनमें उन्होंने दो शतकों की मदद से 368 रन बनाये थे। इसके बाद वेस्ट इंडीज के खिलाफ मार्च 1991 में उन्होंने कैरेबियाई सरजमीं पर पांच मैचों में 289 रन और 2002 में 331 रन बनाए थे।
भारत ने में पिछले तीन दशक में केवल छह बार पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेली है और इन सभी में उसे हार मिली। भारत को अब तक कुल 26 बार पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में खेलने का मौका मिला है और इनमें से वह केवल पांच में जीत दर्ज कर पाया। इसलिए यह कह सकते हैं कि भारतीय टीम पांच मैचों की श्रृंखला में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है।
भारत ने इसके अलावा छह ऐसी सीरीज खेली जिनमें टेस्ट मैचों की संख्या छह थी और दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें से चार में भारत ने जीत दर्ज की। यह अलग बात है कि ये चारों सीरीज (वेस्ट इंडीज, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ) उसने घरेलू धरती पर खेलीं थी। भारत ने आखिरी बार 1983-84 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपनी सरजमीं पर छह टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेली थी जिसमें उसे 0-3 से हार झेलनी पड़ी थी। इससे पहले पाकिस्तानी दौरे में भी उसे छह मैचों की श्रृंखला में इसी अंतर से हार मिली थी।

असल में भारतीय टीम उस जमाने में पांच मैचों की टेस्ट सी खेला करती थी जबकि उसे दुनिया की कमजोर टीमों में आंका जाता था। भारत ने इस तरह की अधिकतर श्रृंखलाएं 50 या 60 के दशक में खेली हैं और यही वजह है कि इनमें से अधिकतर में उसे हार मिली। भारत ने पांच मैचों की 17 सीरीज गंवाई है। पांच में उसे जीत मिली जबकि चार सीरीज ड्रॉ रहीं थी। भारत ने पांच मैचों की आखिरी सीरीज 1972-73 में जीती थी। इंग्लैंड की टीम तब भारतीय दौरे पर आई थी और अजित वाडेकर की टीम ने कोलकाता और चेन्नै में मैच जीतकर सीरीज 2-1 से अपने नाम की थी। भारत ने इससे पहले वाडेकर की अगुवाई में ही वेस्ट इंडीज को उसकी सरजमीं पर1-0 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। यह सुनील गावस्कर की डेब्यू सीरीज थी।

भारत ने पहली बार पांच मैचों की सीरीज 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ अपनी सरजमीं पर जीती थी। उसने तब पाकिस्तान को 2-1 से हराया था। इसके बाद भारतीय टीम ने 1955-56 में न्यू जीलैंड को 2-0 और 1961-62 में इंग्लैंड को भी इसी अंतर से हराया था। इन दोनों सीरीज की मेजबानी भारत ने की थी। इंग्लैंड ने पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए आखिरी बार भारत की मेजबानी 1959 में की थी। उसने तब पांचों मैच जीतकर क्लीन स्वीप किया था। इन दोनों के बीच हालांकि इस तरह की आखिरी सीरीज 1984-85 में खेली गयी थी। डेविड गॉवर की टीम ने भारत के उस दौरे में 2-1 से जीत दर्ज की थी। धोनी की टीम पर अब इन दोनों हार का बदला चुकता करने का जिम्मा होगा।

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