सबको न्याय का भरोसा ही समाज में सदभाव की कुँजी
नई दिल्ली । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में विज्ञान भवन
में आयोजित राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में कहा कि सामाजिक सदभाव,
सर्वधर्म और एकता की भावना भारत की मिट्टी में रची-बसी है। भारतीय संस्कृति
एक इंसान को इंसान के रूप में देखती है न कि किसी धर्म, जाति, वर्ग आदि
विशेष के रूप में। उन्होंने कहा कि समाज में जब तक सबको न्याय मिलने की आशा
रहेगी तब तक समाज में सदभाव कायम रहेगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश
सरकार हर वर्ग की सरकार है। हमारी सरकार ने किसी वर्ग विशेष के तुष्टीकरण
की नीति नहीं अपनायी परन्तु मध्यप्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान रूप
में योजनाएँ बनायी और प्रदेश के संसाधनों का प्रदेश के हित में पूर्ण उपयोग
किया।
चौहान ने कहा कि समाज में सदभाव के लिए आवश्यक है कि वोट बैंक की राजनीति बंद हो, राजनीतिक दल धर्म, जाति, वर्ग से ऊपर उठकर केवल विकास के आधार पर जनता के बीच समर्थन के लिए जाये, इससे समाज के हर वर्ग का विकास होगा। बैठक की अध्यक्षता यू पी ए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने की। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बैठक को सम्बोधित किया। गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे, वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम्, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए. रहमान, नेता प्रतिपक्ष लोकसभा श्रीमती सुषमा स्वराज और नेता प्रतिपक्ष राज्यसभा अरूण जेटली उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में साम्प्रदायिक दंगों में एक भी मौत नहीं हुई है। इसके लिए उन्होंने गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाये गये आँकड़ों में संशोधन करने की बात भी कही। चौहान ने बताया कि बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और ग्रंथों के संकलन के लिये साँची में बौद्ध यूनिवर्सिटी की स्थापना की गयी है। मुस्लिम भाइयों के लिए भोपाल में हज हाउस का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में पंडित विवाह के वैदिक मंत्र पढ़ाते हैं और मौलवी साहब मुख्यमंत्री निकाह योजना में निकाह का कलमा पढ़ाते हैं। मुख्यमंत्री निवास में सभी धर्मों के प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में प्रदेश के वरिष्ठ नागरिक यदि रामेश्वरम् गये हैं तो अजमेर ख्वाजा साहब के दर पर सर झुकाने भी पहुँचे हैं और वेलंगिनी चर्च भी जा सके हैं। चौहान ने कहा कि हमारे लिए धर्म एक ऐसी चीज है जो विकास को समाज की आंतरिक और स्वाभाविक लय से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि हम सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर जातियों और मजहबों को एक दूसरे से भिड़ाते नहीं हैं। उर्दू यूनिवर्सिटी के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध करवाने का फैसला किया और लंका में सीता माता के मंदिर के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार से अनुमति माँगी। चौहान ने कहा कि जब तक हमारी कथनी और करनी एक समान नहीं होगी तब तक समाज में विद्रोह की स्थिति निर्मित रहेगी। चौहान ने कहा कि आतंकवाद एवं संगठित अपराधों के विरूद्ध कानून बनाकर केन्द्र को मंजूरी के लिए भेजा था किन्तु विगत पाँच वर्ष से वह लंबित है, जबकि महाराष्ट्र में इसी प्रकार का कानून लागू है।
चौहान ने महिला सशक्तीकरण पर कहा कि प्रदेश में महिलाओं के विरूद्ध होने वाले किसी भी अपराध के लिए कड़े कानून बनाये गये हैं। साथ ही किसी भी प्रकार के अपराध के लिए थानों में एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं, जिससे कि समाज में विश्वास का माहौल पैदा हो। उन्होंने कहा कि दतिया जिले में एक विदेशी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना में विवेचना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में 10 दिन में पूरी की गयी और साक्ष्यों के लिए वीडियो कान्फ्रेन्स के माध्यम से सुनवायी की गयी। माननीय न्यायालय द्वारा आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी। प्रदेश में महिलाओं के विकास, उत्थान और सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएँ चलायी जा रही हैं। महिला महापंचायत भी बुलायी गयी थी। ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस में एक महिला प्रकोष्ठ का गठन किया गया है।
चौहान ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के विरूद्ध होने वाले अपराधों में कमी आयी है। साथ ही वर्ग के उत्थान के लिए भी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। शहरों में अध्ययन के लिये प्रतिभावान विद्यार्थियों द्वारा रहने के लिए गये आवास की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जा रहा है। पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा बढ़ाकर तीन लाख कर दी गयी है। जनजाति के प्रचार-प्रसार के लिये प्रदेश में जनजाति संग्रहालय बनाया गया है। चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जहाँ जनजातीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिये अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल आयोजित होते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मेरा विश्वास है कि विकास ही कानून और व्यवस्था, अंर्तसाम्प्रदायिक रिश्तेदारी और अंतर्जातीय सौहार्द का अंतिम निर्धारक है। इन ज्वलंत मुद्दों को मात्र पुलिसिंग के जरिये हल नहीं किया जा सकता, उसके लिए हमें संसाधनों और अवसरों के असमान वितरण की हमारी व्यवस्थागत कमजोरियों को दूर करना ही होगा।
चौहान ने कहा कि समाज में सदभाव के लिए आवश्यक है कि वोट बैंक की राजनीति बंद हो, राजनीतिक दल धर्म, जाति, वर्ग से ऊपर उठकर केवल विकास के आधार पर जनता के बीच समर्थन के लिए जाये, इससे समाज के हर वर्ग का विकास होगा। बैठक की अध्यक्षता यू पी ए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने की। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बैठक को सम्बोधित किया। गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे, वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम्, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए. रहमान, नेता प्रतिपक्ष लोकसभा श्रीमती सुषमा स्वराज और नेता प्रतिपक्ष राज्यसभा अरूण जेटली उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में साम्प्रदायिक दंगों में एक भी मौत नहीं हुई है। इसके लिए उन्होंने गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाये गये आँकड़ों में संशोधन करने की बात भी कही। चौहान ने बताया कि बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और ग्रंथों के संकलन के लिये साँची में बौद्ध यूनिवर्सिटी की स्थापना की गयी है। मुस्लिम भाइयों के लिए भोपाल में हज हाउस का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में पंडित विवाह के वैदिक मंत्र पढ़ाते हैं और मौलवी साहब मुख्यमंत्री निकाह योजना में निकाह का कलमा पढ़ाते हैं। मुख्यमंत्री निवास में सभी धर्मों के प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं।
मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में प्रदेश के वरिष्ठ नागरिक यदि रामेश्वरम् गये हैं तो अजमेर ख्वाजा साहब के दर पर सर झुकाने भी पहुँचे हैं और वेलंगिनी चर्च भी जा सके हैं। चौहान ने कहा कि हमारे लिए धर्म एक ऐसी चीज है जो विकास को समाज की आंतरिक और स्वाभाविक लय से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि हम सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर जातियों और मजहबों को एक दूसरे से भिड़ाते नहीं हैं। उर्दू यूनिवर्सिटी के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध करवाने का फैसला किया और लंका में सीता माता के मंदिर के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार से अनुमति माँगी। चौहान ने कहा कि जब तक हमारी कथनी और करनी एक समान नहीं होगी तब तक समाज में विद्रोह की स्थिति निर्मित रहेगी। चौहान ने कहा कि आतंकवाद एवं संगठित अपराधों के विरूद्ध कानून बनाकर केन्द्र को मंजूरी के लिए भेजा था किन्तु विगत पाँच वर्ष से वह लंबित है, जबकि महाराष्ट्र में इसी प्रकार का कानून लागू है।
चौहान ने महिला सशक्तीकरण पर कहा कि प्रदेश में महिलाओं के विरूद्ध होने वाले किसी भी अपराध के लिए कड़े कानून बनाये गये हैं। साथ ही किसी भी प्रकार के अपराध के लिए थानों में एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं, जिससे कि समाज में विश्वास का माहौल पैदा हो। उन्होंने कहा कि दतिया जिले में एक विदेशी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना में विवेचना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में 10 दिन में पूरी की गयी और साक्ष्यों के लिए वीडियो कान्फ्रेन्स के माध्यम से सुनवायी की गयी। माननीय न्यायालय द्वारा आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी। प्रदेश में महिलाओं के विकास, उत्थान और सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएँ चलायी जा रही हैं। महिला महापंचायत भी बुलायी गयी थी। ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस में एक महिला प्रकोष्ठ का गठन किया गया है।
चौहान ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के विरूद्ध होने वाले अपराधों में कमी आयी है। साथ ही वर्ग के उत्थान के लिए भी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। शहरों में अध्ययन के लिये प्रतिभावान विद्यार्थियों द्वारा रहने के लिए गये आवास की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जा रहा है। पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा बढ़ाकर तीन लाख कर दी गयी है। जनजाति के प्रचार-प्रसार के लिये प्रदेश में जनजाति संग्रहालय बनाया गया है। चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जहाँ जनजातीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिये अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल आयोजित होते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मेरा विश्वास है कि विकास ही कानून और व्यवस्था, अंर्तसाम्प्रदायिक रिश्तेदारी और अंतर्जातीय सौहार्द का अंतिम निर्धारक है। इन ज्वलंत मुद्दों को मात्र पुलिसिंग के जरिये हल नहीं किया जा सकता, उसके लिए हमें संसाधनों और अवसरों के असमान वितरण की हमारी व्यवस्थागत कमजोरियों को दूर करना ही होगा।

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