-->

Breaking News

सजा-ए-मौत सुनते ही रोने लगे दामिनी के गुनहगार

नई दिल्‍ली।  16 दिसंबर 2012 को चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा के साथ गैंगरेप और हत्या मामले में दोषी ठहराए गए चार युवकों को फांसी की सजा सुनाई गई है। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि इस अपराध में इंसाफ फांसी देने से ही मिल सकता है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने जैसे ही कहा कि चारों दोषियों को मौत की सजा दी जाती है, मुल्जिम फूट-फूटकर रोने लगे और 'जज मुझे माफ कर दो' की गुहार लगाने लगे। बचाव पक्ष के वकील एपी सिंह ने कोर्ट रूम में जमकर हंगामा किया। उन्होंने कहा, ‘यह सत्यमेव जयते नहीं, झूठमेव जयते पर आधारित फैसला है।'

एपी सिंह का कहना है कि फैसला सरकार के इशारे पर दिया गया है। अदालत ने बिना किसी गवाह और तथ्यों के आधार पर सभी को फांसी की सजा दी है। उन्‍होंने कहा कि वह फांसी की सजा के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। वकील ने चुनौती देते हुए कहा, 'अगर दो महीने में कोई बलात्कार या हत्या नहीं हुई, तो हम अपील फाइल नहीं करेंगे।' उन्होंने कहा कि फांसी देने से बलात्कार की घटना नहीं रुकने वाली है, तो उनके मुवक्किल को फांसी की सजा क्यों दी जा रही है।

10 सितंबर को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुकेश (26), पवन (19), विनय (20) और अक्षय (28) को हत्या, गैंगरेप, डकैती, सबूत नष्ट करने सहित 11 अपराधों में दोषी ठहराया था। शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाए जाने के वक्‍त 'दामिनी' के माता-पिता भी कोर्ट में मौजूद थे।

कोर्ट ने दामिनी गैंगेरेप केस के चार आरोपियों को 10 सितंबर को दोषी करार दिया था। 11 सितंबर को उनकी सजा पर बहस हुई थी। उस दिन बचाव पक्ष के वकीलों पर लोगों द्वारा हमले की घटना के बाद शुक्रवार को दिल्‍ली पुलिस ने साकेत कोर्ट परिसर में और आसपास सुरक्षा के कड़े बंदोबस्‍त किए थे।

दामिनी गैंगरेप केस में कुछ नाबालिग समेत छह आरोपी थे। राम सिंह की 11 मार्च को तिहाड़ जेल में मौत हो गई थी, वहीं नाबालिग आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 31 अगस्त को दोषी ठहराया था। विशेष लोक अभियोजक दयान कृष्णन ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ करार देते हुए चारों दोषियों को फांसी देने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि वारदात को एक षडयंत्र के तहत अंजाम दिया गया और इन लोगों ने असहाय लड़की पर कोई दया नहीं दिखाई।

बलात्कार करने के बाद पीडि़ता के शरीर में भोंकना और शरीर का भीतरी अंग निकालना यह दर्शाता है कि दोषियों ने उनके नृशंसता की हदें पार कर दी। बचाव पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई थी कि सभी दोषी नौजवान हैं लिहाजा उन पर रियायत बरती जाए। उन्हें मृत्युदंड न दिया जाए। उनमें अभी सुधरने की गुंजाइश है। आवेश में आकर इस वारदात को अंजाम दिया गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने 237 पन्नों के अपने फैसले में कहा था कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित षडयंत्र के साथ असहाय लड़की के साथ बलात्कार किया और उसे मारने की कोशिश की। अदालत ने सभी को हत्या का दोषी ठहराते हुए कहा कि आरोपियों ने पीडि़ता को ऐसे ‘जख्म’ दिए थे उसे उबर पाना पीडि़ता के लिए नामुकिन था। अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच की तारीफ की है। 

दामिनी के गुनहगारों को किन धाराओं के तहत कितनी सजा और जुर्माना लगाया गया..

  • आईपीसी की धारा 302 यानि हत्‍या। इस धारा के तहत चारों आरोपी को फांसी की सजा और प्रत्‍येक को 10,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  •  आईपीसी की धारा 365 यानि अपहरण करना। इस धारा के तहत चारों आरोपी को सात साल कारावास और प्रत्‍येक को 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  • आईपीसी की धारा 366 यानि किसी महिला का गलत इरादे से अपहरण करना। इस धारा के तहत चारों आरोपी को सात साल कारावास की सजा और प्रत्‍येक को 10,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  • आईपीसी की धारा 376 (2जी) यानि सामूहिक बलात्‍कार। इस धारा के तहत चारों आरोपी को उम्रकैद और प्रत्‍येक को 5000 रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  • आईपीसी की धारा 377 यानि अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना। इस धारा के तहत चारों आरोपी को 10 साल की सजा और प्रत्‍येक को 5000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न  देने पर एक माह की सजा।

  • आईपीसी की धारा 397 यानि डकैती के दौरान गंभीर चोट पहुंचना। इस धारा के तहत चारों आरोपी को 10 साल कारावास और प्रत्‍येक को 5000 रुपये की सजा। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  • आईपीसी की धारा 412 यानि चोरी के सामान की बरामदगी। इस धारा के तहत चारों आरोपी को 10 साल की कारावास और प्रत्‍येक को 5000 रुपये की सजा। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  • आइपीसी की धारा 120 (बी) यानि आपराधिक साजिश रचना। इस अपराध में चारों आरोपी को आजीवन कारावास और प्रत्‍येक को 5000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

  • आईपीसी की धारा 201 यानि सबूत मिटाना। चारों आरोपी को सात साल की सजा और प्रत्‍येक को 5000 रुपये जुर्माने की सजा। जुर्माना न देने पर एक माह की सजा।

No comments

सोशल मीडिया पर सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त करते हुए एमपी ऑनलाइन न्यूज़ मप्र का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला रीजनल हिन्दी न्यूज पोर्टल बना हुआ है। अपने मजबूत नेटवर्क के अलावा मप्र के कई स्वतंत्र पत्रकार एवं जागरुक नागरिक भी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ से सीधे जुड़े हुए हैं। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ एक ऐसा न्यूज पोर्टल है जो अपनी ही खबरों का खंडन भी आमंत्रित करता है एवं किसी भी विषय पर सभी पक्षों को सादर आमंत्रित करते हुए प्रमुखता के साथ प्रकाशित करता है। एमपी ऑनलाइन न्यूज़ की अपनी कोई समाचार नीति नहीं है। जो भी मप्र के हित में हो, प्रकाशन हेतु स्वीकार्य है। सूचनाएँ, समाचार, आरोप, प्रत्यारोप, लेख, विचार एवं हमारे संपादक से संपर्क करने के लिए कृपया मेल करें Email- editor@mponlinenews.com/ mponlinenews2013@gmail.com