कोलकाता।। फूड
प्राइसेज की महंगाई से फिलहाल राहत नहीं मिलेगी। ट्रेडर्स और रीटेलर्स का
कहना है कि अगले क्वॉर्टर में इनके दाम 10-20 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। रुपए
में गिरावट, इंटरनैशनल मार्केट में कमोडिटी के दाम बढ़ने और ज्यादा बारिश
से फसलों के बर्बाद होने के चलते फूड प्राइसेज बढ़ेंगे। रीटेल चेन, पैकेज्ड
फूड कंपनियों और कम्यूनिटी ट्रेडर्स ने बताया कि पिछले 6 महीने में इनकी
कीमत पहले ही 20 फीसदी बढ़ चुकी है।
रुपया इस साल 23 फीसदी गिरा है। इससे इम्पोर्ट की कॉस्ट बढ़ी है। इसी वजह से फ्यूल प्राइसेज बढ़े हैं। देश के कई इलाकों में मॉनसून की बारिश ज्यादा होने से फसलों को नुकसान भी हुआ है। एडिबल ऑयल, चावल, दूध, डेयरी प्रॉडक्ट्स, सब्जियां, जूस, बटर, आइसक्रीम, इम्पोर्टेड गॉरमेंट्स और फूड्स के दाम बढ़ रहे हैं। रीटेलर्स और ट्रेडर्स का कहना है कि इस महंगाई से बचने के लिए कंज्यूमर्स सस्ते प्रॉडक्ट्स खरीद रहे हैं।
फूड और ग्रॉसरी रीटेल चेन स्पेंसर्स रीटेल के प्रेजिडेंट और सीईओ मोहित कंपानी ने बताया, 'अब तक ज्यादा कंज्यूमर्स सस्ते प्रॉडक्ट्स की ओर शिफ्ट नहीं हुए हैं। हालांकि, जिन सामानों के दाम ज्यादा बढ़े हैं, उनमें इस तरह का ट्रेंड देखा जा रहा है।' उन्होंने बताया कि मूंगफली के तेल की कीमत पिछले 4 महीनों में 15-20 फीसदी बढ़ी है। इससे सोया और सनफ्लावर ऑयल की मांग बढ़ गई है। साउथ इंडिया में कन्ज़यूमर्स सस्ता बासमती चावल खरीद रहे हैं। यहां के लोग सोना मसूरी राइस ज्यादा खाते हैं, लेकिन इसकी कीमत 20 फीसदी बढ़ी है।
रुपया इस साल 23 फीसदी गिरा है। इससे इम्पोर्ट की कॉस्ट बढ़ी है। इसी वजह से फ्यूल प्राइसेज बढ़े हैं। देश के कई इलाकों में मॉनसून की बारिश ज्यादा होने से फसलों को नुकसान भी हुआ है। एडिबल ऑयल, चावल, दूध, डेयरी प्रॉडक्ट्स, सब्जियां, जूस, बटर, आइसक्रीम, इम्पोर्टेड गॉरमेंट्स और फूड्स के दाम बढ़ रहे हैं। रीटेलर्स और ट्रेडर्स का कहना है कि इस महंगाई से बचने के लिए कंज्यूमर्स सस्ते प्रॉडक्ट्स खरीद रहे हैं।
फूड और ग्रॉसरी रीटेल चेन स्पेंसर्स रीटेल के प्रेजिडेंट और सीईओ मोहित कंपानी ने बताया, 'अब तक ज्यादा कंज्यूमर्स सस्ते प्रॉडक्ट्स की ओर शिफ्ट नहीं हुए हैं। हालांकि, जिन सामानों के दाम ज्यादा बढ़े हैं, उनमें इस तरह का ट्रेंड देखा जा रहा है।' उन्होंने बताया कि मूंगफली के तेल की कीमत पिछले 4 महीनों में 15-20 फीसदी बढ़ी है। इससे सोया और सनफ्लावर ऑयल की मांग बढ़ गई है। साउथ इंडिया में कन्ज़यूमर्स सस्ता बासमती चावल खरीद रहे हैं। यहां के लोग सोना मसूरी राइस ज्यादा खाते हैं, लेकिन इसकी कीमत 20 फीसदी बढ़ी है।
कंपनी ने बताया कि लोग कम सब्जियां भी खरीद रहे हैं। अप्रैल-मई और जुलाई-अगस्त के बीच स्पेंसर्स के आउटलेट में सब्जियों की सेल्स 10-15 फीसदी कम हुई है। दिल्ली के नया बाजार में राजधानी राइस के प्रॉपराइटर ने बताया कि अभी ट्रेडर्स ज्यादा चावल एक्सपोर्ट करना चाहते हैं, क्योंकि इससे उन्हें ज्यादा फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा, 'एक्सपोर्ट मार्केट के बुलिश सेंटिमेंट के चलते डोमेस्टिक मार्केट के लिए चावल महंगा हुआ है। यह और भी बढ़ सकता है।'
साउथ इंडिया में पिछले 6 महीने में चावल की कीमत 20 फीसदी बढ़ी है। बासमती चावल का एक्सपोर्ट बढ़ने और नॉन-बासमती वरायटी के एक्सपोर्ट की इजाजत के चलते दाम में बढ़ोतरी हुई है। जो चावल इंटरनैशनल मार्केट में पॉप्युलर हैं, ट्रेडर्स को उनके दाम में और 5-10 फीसदी बढ़ोतरी के आसार नजर आ रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फूड प्राइसेज बढ़ने से लोगों की बचत कम होगी। कोटक महिंद्रा बैंक में चीफ इकनॉमिस्ट इंद्रनील पान ने कहा, 'कन्जयूमर्स को यह फैसला करना होगा कि वे एस्पिरेशनल प्रॉडक्ट्स पर खर्च करना चाहते हैं या फूड जैसे जरूरी आइटम पर।

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