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उप्र विधानसभा की कार्यवाही बुधवार तक स्थगित

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के चार दिवसीय मानूसन सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने मुजफ्फरनगर हिंसा पर सदन के भीतर चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया. हंगामे को देखते हुए विधानसभा की कार्यवाही बुधवार 18 सितम्बर तक के लिए स्थगित कर दी गई. विधानसभा में विपक्ष की एकजुटता से सरकार पूरी तरह बैकफुट पर दिखाई दी. संसदीय कार्य मंत्री आजम खान ने मामले को संभालने का प्रयास किया. बातचीत के बाद सरकार नियम 56 के तहत विपक्ष की मांग पर मुजफ्फरनगर हिंसा पर चर्चा कराने को राजी हो गई, बावजूद इसके सदन की कार्यवाही बाधित रही.
कांग्रेस के सदस्यों ने अखिलेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया. बढ़ते हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.
कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने कहा कि मेरठ जोन के आईजी और मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी को तुरंत निलंबित किया जाए.
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी भी विधानसभा की दर्शक दीर्घा में मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि सरकारी पक्ष के हाथ खून से रंगे हैं, लिहाजा इस सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए.
रालोद ने मुजफ्फरनगर हिंसा की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की भी मांग की, जबकि बसपा ने सूबे में राष्ट्रपति शासन लागू कराए जाने की मांग की. भाजपा ने एसआईटी से मामले की जांच कराने की मांग की है.
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और विधानसभा में विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा सरकार मुजफ्फरनगर हिंसा पर चर्चा कराने को तैयार नहीं हैं, लेकिन जब तक सरकार अपना रुख नहीं बदलेगी तब तक बसपा का सदन के भीतर विरोध जारी रहेगा.
मौर्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि सपा और भाजपा के बीच सांठगांठ का खुलासा हो गया है. दोनों ही दलों ने आपस में मिलकर हिंसा को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया.
बसपा के एक अन्य नेता नसीमुद्दीन सिद्दकी ने कहा कि सरकार मुजफ्फरनगर हिंसा के मुद्दे पर चर्चा कराने कौ तैयार नहीं है. यह उसकी निष्क्रियता का प्रमाण है.
संसदीय कार्य मंत्री आजम खान ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भाजपा उप्र को गुजरात बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा.

सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और रालोद के सदस्यों ने मुजफ्फरनगर हिंसा को लेकर सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार के खिलाफ जमकर हंगामा शुरू कर दिया. बसपा सदस्यों ने सदन में पोस्टर लहराए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. भाजपा के सदस्य सदन के भीतर ही धरने पर बैठ गए.

विपक्ष ने एक सुर से सरकार पर हल्ला बोलते हुए कहा कि सरकार ने हिंसा को समय रहते काबू में नहीं किया और इस मामले में सरकार की तरफ से लापरवाही बरती गई.

विधानसभा अध्यक्ष के काफी समझाने-बुझाने के बाद भी विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे. हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही पहले आधा घंटे के लिए और फिर 12:15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी.

उल्लेखनीय है कि विधानमंडल का मानसून सत्र 16 सितम्बर से 20 सितंबर तक चलना है. इस बीच मंगलवार 17 अगस्त को विश्वकर्मा पूजा के कारण अवकाश भी रहेगा. 18 सितम्बर को सरकार की तरफ से अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा और 19 और 20 सितम्बर को विधायी कार्य निपटाए जाएंगे.

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