‘खान’दान में फंसे गहलोत, HC से जांच के आदेश
नई दिल्ली। अपने खानदान को अवैध तरीके से खदानें आवंटित करने के मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुरे फंस गए हैं। इस केस की जांच के आदेश सीधे राजस्थान हाईकोर्ट ने दे दिए हैं। खदान के पट्टे देने के खेल का खुलासा आईबीएन7 ने इसी साल 5 मार्च को किया था। आईबीएन7 ने बताया था कि किस तरह जोधपुर के बड़ा कोटेचा इलाके में गहलोत ने अपने रिश्तेदारों को सैंड स्टोन की खदानें देने के लिए खनन नीति और नियमों को दरकिनार कर दिया था। गहलोत समेत 13 लोगों के खिलाफ जयपुर पुलिस को जांच के आदेश दिए गए हैं। 15 दिसंबर तक कोर्ट ने जांच रिपोर्ट मांगी है।
याचिकाकर्ता वकील अजय जैन के मुताबिक आधी खदानों की नीलामी होनी थी और आधी को आरक्षित वर्ग को दिया जाना था। इस मामले में अशोक गहलोत, तत्कालीन उपसचिव और गहलोत के रिश्तेदारों समेत 13 लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट में दाखिल अर्जी में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अपने रिश्तेदारों को खदानें देने के लिए पद के दुरुपयोग करने और विवेकाधीन कोटे का गलत इस्तेमाल करने का इल्जाम है। कोर्ट के आदेश के बाद जांच इन मुद्दों पर होगी।
1. 1996 के नियम के मुताबिक राजस्थान में सैंड स्टोन के खनन पट्टे पाने के लिए न्यूनतम शर्त 5 हेक्टेयर की थी, लेकिन गहलोत के रिश्तेदारों को 1 हेक्टेयर के जमीन के टुकड़े पर भी खनन पट्टे कैसे दिए गए?
2. 28 जनवरी 2011 की खनन नीति के अनुसार 50 फीसदी खदानों का आवंटन नीलामी और 50 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर होना था, लेकिन रिश्तेदारों को आवंटन में नीति का पालन क्यों नहीं हुआ?
3. 21 नवंबर 2012 को कैबिनेट से प्रस्ताव पास करवाकर अशोक गहलोत ने मंडोर स्टोन पार्क के 37 आवेदकों को औद्योगिक इकाई होने की शर्त पर एक हेक्टेयर साइज की खदानें बांट दीं, जबकि इनमें कई आवेदकों के पास इकाइयां थी ही नहीं। इनमें गहलोत के भाई की पत्नी भी शामिल थीं। ऐसा कैसे हुआ?
जिन 37 लोगों को खदानों को आवंटन किया गया था, उनमें से 16 गहलोत के रिश्तेदार और तीन करीबी थे। रिश्तेदारों में उनके भाई अग्रसेन गहलोत की पत्नी मंजुलता गहलोत, भांजे जसवंत सिंह की पत्नी वीणा कच्छावा और भतीजे की पत्नी शालिनी गहलोत शामिल थीं। आईबीएन7 के खुलासे के बाद सरकार ने खदानों का आवंटन रद्द कर दिया था और नीति को दरकिनार कर दी गईं 20 हजार खदानें और 34 हजार आवेदन भी रद्द कर दिए थे।
याचिकाकर्ता वकील अजय जैन के मुताबिक आधी खदानों की नीलामी होनी थी और आधी को आरक्षित वर्ग को दिया जाना था। इस मामले में अशोक गहलोत, तत्कालीन उपसचिव और गहलोत के रिश्तेदारों समेत 13 लोगों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट में दाखिल अर्जी में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अपने रिश्तेदारों को खदानें देने के लिए पद के दुरुपयोग करने और विवेकाधीन कोटे का गलत इस्तेमाल करने का इल्जाम है। कोर्ट के आदेश के बाद जांच इन मुद्दों पर होगी।
1. 1996 के नियम के मुताबिक राजस्थान में सैंड स्टोन के खनन पट्टे पाने के लिए न्यूनतम शर्त 5 हेक्टेयर की थी, लेकिन गहलोत के रिश्तेदारों को 1 हेक्टेयर के जमीन के टुकड़े पर भी खनन पट्टे कैसे दिए गए?
2. 28 जनवरी 2011 की खनन नीति के अनुसार 50 फीसदी खदानों का आवंटन नीलामी और 50 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर होना था, लेकिन रिश्तेदारों को आवंटन में नीति का पालन क्यों नहीं हुआ?
3. 21 नवंबर 2012 को कैबिनेट से प्रस्ताव पास करवाकर अशोक गहलोत ने मंडोर स्टोन पार्क के 37 आवेदकों को औद्योगिक इकाई होने की शर्त पर एक हेक्टेयर साइज की खदानें बांट दीं, जबकि इनमें कई आवेदकों के पास इकाइयां थी ही नहीं। इनमें गहलोत के भाई की पत्नी भी शामिल थीं। ऐसा कैसे हुआ?
जिन 37 लोगों को खदानों को आवंटन किया गया था, उनमें से 16 गहलोत के रिश्तेदार और तीन करीबी थे। रिश्तेदारों में उनके भाई अग्रसेन गहलोत की पत्नी मंजुलता गहलोत, भांजे जसवंत सिंह की पत्नी वीणा कच्छावा और भतीजे की पत्नी शालिनी गहलोत शामिल थीं। आईबीएन7 के खुलासे के बाद सरकार ने खदानों का आवंटन रद्द कर दिया था और नीति को दरकिनार कर दी गईं 20 हजार खदानें और 34 हजार आवेदन भी रद्द कर दिए थे।

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