हिन्दी से सिविल सेवा करने वालों की संख्या बेहद कम
नई दिल्ली : सिविल सेवा परीक्षा में हिन्दी के साथ भेदभाव होने के एक नहीं और भी उदाहरण हैं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अपने विश्लेषण भी बताते हैं कि हिन्दी को वैकल्पिक विषय लेकर परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की सफलता दर अपेक्षाकृत कम है। जबकि उर्दू एवं अन्य भारतीय भाषाओं के विषय लेने वालों की सफलता दर ज्यादा है।
यूपीएससी की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 के दौरान 406 छात्रों ने मुख्य परीक्षा में हिन्दी साहित्य को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना जिसमें से 53 छात्र सफल चुने गए। इस प्रकार हिन्दी साहित्य से सफलता दर 13फीसदी दर्ज गई। लेकिन इसके विपरीत ऊर्द साहित्य लेने वाले छात्रों की सफलता दर 40 फीसदी रह। उर्दू के22 में से नौ छात्र परीक्षा पास करने में सफल हुए।
रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंच साहित्य में 33, मलयाली में 27, असमी में 25, बंगाली में 20, गुजराती में 16, पंजाबी 16 तथा अंग्रेजी में 15 फीसदी सफलता दर दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का विकल्प चुनने वाले ज्यादा सफल हुए हैं। यहां तक की पाली साहित्य में भी 14 फीसदी उम्मीदवार सफल घोषित हुए हैं। संस्कृति जैसी कठिन भाषा में भी सफलता दर 12 फीसदी रही है। पाली साहित्य को लेकर एक रोचक बात यह रही कि सौ से ज्यादा उम्मीदवारों द्वारा चुने गए वैकल्पिक विषय में मेडिकल साइंस के बाद पाली साहित्य दूसरा ज्यादा सफलता दर वाला विषय रहा।
लोकसभा आयोग ने सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में हिन्दी माध्यम से बैठने वाले छात्रों का भी ब्यौरा एकत्र किया है। 2011 में 7322 तथा 2012 में 7888 छात्र हिन्दी माध्यम से मुख्य परीक्षा में बैठे। यदि अन्य भारतीय भाषाओं को भी जोड़ लें तो ऐसे छात्रों की संख्या करीब दस हजार बैठती है।
यूपीएससी की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 के दौरान 406 छात्रों ने मुख्य परीक्षा में हिन्दी साहित्य को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना जिसमें से 53 छात्र सफल चुने गए। इस प्रकार हिन्दी साहित्य से सफलता दर 13फीसदी दर्ज गई। लेकिन इसके विपरीत ऊर्द साहित्य लेने वाले छात्रों की सफलता दर 40 फीसदी रह। उर्दू के22 में से नौ छात्र परीक्षा पास करने में सफल हुए।
रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंच साहित्य में 33, मलयाली में 27, असमी में 25, बंगाली में 20, गुजराती में 16, पंजाबी 16 तथा अंग्रेजी में 15 फीसदी सफलता दर दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का विकल्प चुनने वाले ज्यादा सफल हुए हैं। यहां तक की पाली साहित्य में भी 14 फीसदी उम्मीदवार सफल घोषित हुए हैं। संस्कृति जैसी कठिन भाषा में भी सफलता दर 12 फीसदी रही है। पाली साहित्य को लेकर एक रोचक बात यह रही कि सौ से ज्यादा उम्मीदवारों द्वारा चुने गए वैकल्पिक विषय में मेडिकल साइंस के बाद पाली साहित्य दूसरा ज्यादा सफलता दर वाला विषय रहा।
लोकसभा आयोग ने सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में हिन्दी माध्यम से बैठने वाले छात्रों का भी ब्यौरा एकत्र किया है। 2011 में 7322 तथा 2012 में 7888 छात्र हिन्दी माध्यम से मुख्य परीक्षा में बैठे। यदि अन्य भारतीय भाषाओं को भी जोड़ लें तो ऐसे छात्रों की संख्या करीब दस हजार बैठती है।

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