छत्तीसगढ़ में कम हो रहे हैं जंगल
रायपुर : छत्तीसगढ़ में बीते दो सालों में वनों में कमी आई है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालों में छत्तीसगढ़ में खनन और कब्जे की वजह से 53 वर्ग किलोमीटर वन कम हुआ है। इंडियन स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट वर्ष 2013 के आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों में 53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन कम हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011 में राज्य में 55 हजार 674 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन था लेकिन वर्ष 2013 में यह घटकर 55 हजार 621 वर्ग किलोमीटर हो गया।
आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 10 वर्ग किलोमीटर अति घने वन और 46 वर्ग किलोमीटर घने वनों में कमी आई है, जबकि इस दौरान मात्र तीन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन लगाए गए।इस दौरान राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर जिले में 19 वर्ग किलोमीटर में, दुर्ग में 12 वर्ग किलोमीटर में, दंतेवाड़ा जिले में 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, कांकेर में नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, कवर्धा में छह वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, सरगुजा और बिलासपुर में पांच पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, कोरबा में चार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में और महासमुंद, रायगढ़ और राजनांदगांव जिले में दो दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन कम हुए हैं।आंकड़ों के मुताबिक इन क्षेत्रों में होने वाले विकास के कामों, खनन और कब्जा होने की वजह से वनों में कमी आई है।
आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 10 वर्ग किलोमीटर अति घने वन और 46 वर्ग किलोमीटर घने वनों में कमी आई है, जबकि इस दौरान मात्र तीन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन लगाए गए।इस दौरान राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर जिले में 19 वर्ग किलोमीटर में, दुर्ग में 12 वर्ग किलोमीटर में, दंतेवाड़ा जिले में 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, कांकेर में नौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, कवर्धा में छह वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, सरगुजा और बिलासपुर में पांच पांच वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में, कोरबा में चार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में और महासमुंद, रायगढ़ और राजनांदगांव जिले में दो दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन कम हुए हैं।आंकड़ों के मुताबिक इन क्षेत्रों में होने वाले विकास के कामों, खनन और कब्जा होने की वजह से वनों में कमी आई है।

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