श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की दूसरी इकाई से अक्टूबर से उत्पादन
भोपाल । प्रदेश की प्रथम चरण की बहुप्रतिष्ठित श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना 2X600 मेगावाट ग्राम डोंगलिया, जिला खण्डवा की दूसरी इकाई से आगामी अक्टूबर माह से व्यवसायिक उत्पादन शुरू होगा। परियोजना की 600 मेगावॉट की प्रथम इकाई से एक फरवरी 2014 से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। परियोजना पर 6822 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है। परियोजना की कुल लागत 7820 करोड़ रुपये है। परियोजना की द्वितीय चरण की इकाई क्रमांक 3 तथा 4 से क्रमश: मार्च तथा जून 2018 से व्यवसायिक उत्पादन होगा। इस परियोजना की लागत 6500 करोड़ रुपये है। इसके वित्त-पोषण के लिये राज्य शासन द्वारा 20 प्रतिशत अंश पूँजी प्रदान की गई है। शेष 80 प्रतिशत राशि की व्यवस्था पीएफसी से ऋण प्राप्त कर की जा रही है।
प्रथम चरण की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की विभिन्न बीओपी प्रणालियाँ लगभग पूर्णत: पर है। शेष कार्य प्रगति पर है। इसी प्रकार सुरगाँव बंझारी से बीड तक रेलवे लाईन का कार्य प्रगति पर है। यह लाईन विद्युतीकरण तथा सिंग्नलिंग के साथ शीघ्र पूर्ण होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि परियोजना के मुख्य संयंत्र (मेन पॉवर ब्लाक) के लिए कार्यादेश मेसर्स बीएचईएल को 12 दिसम्बर 2008 को जारी किये गये थे। इकाइ क्रमांक 1 से व्यवसायिक उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। इकाई क्रमांक 2 में व्यवसायिक उत्पादन अक्टूबर 2014 से होना संभावित है। शेष संयंत्र के कार्यों के लिए मेसर्स एलएनटी लिमिटेड, बड़ोदरा को 26 अक्टूबर 2009 को जारी किये गये थे।
द्वितीय चरण
परियोजना के द्वितीय चरण की अनुमानित लागत 6500 करोड़ रुपये है। इस परियोजना की इकाई क्रमांक 3 से व्यवसायिक उत्पादन मार्च 2018 से तथा इकाई क्रमांक 4 से जून 2018 से होना संभावित है। परियोजना की स्थापना के लिये आवश्यक जल एवं भूमि उपलब्ध है तथा परियोजना के लिये वित्तीय लेखाबंदी प्राप्त की गई है।
परियोजना की अनुमानित लागत 6500 करोड़ में से वित्त पोषण के लिए मेसर्स पीएफसी से 6862 करोड़ ऋण तथा राज्य शासन से 1300 करोड़ रुपये अंश पूँजी के रूप में प्राप्त होगा। ऋण प्राप्ति के लिये पॉवर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा मेसर्स पीएफसी के साथा मेमोरण्डम ऑफ अण्डरस्टेडिंग हस्ताक्षरित किया गया है। परियोजना की 275 मी. ऊँची चिमनी निर्माण के लिए एयरपोर्ट ऑथारिटी ऑफ इंडिया से अनापत्ति प्राप्त हो चुकी है। परियोजना के लिए केन्द्रीय कोयला मंत्रालय ने गोंद बहेरा, सिगरौली कोल ब्लाक आंवटित किया गया है।
राज्य शासन ने द्वितीय चरण की स्थापना मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी लिमिटेट द्वारा किये जाने की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। परियोजना को मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर, भारत सरकार द्वारा मेगा पाँवर प्रोजेक्ट का स्टेटस प्रदान किया गया है। परियोजना के लिए जल आवंटन तथा भूमि उपलब्ध है। परियोजना सलाहकार भी नियुक्त किया जा चुका है। मध्यप्रदेश पॉवर ट्रेडिंग कम्पनी लिमिटेट (वर्तमान में पॉवर मेनेजमेंट कम्पनी लिमिटेट) के साथ विद्युत क्रय अनुबंध 4 जनवरी 2011 को किया गया था।
इसी प्रकार पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को 19 जनवरी 2011 को आवेदन दिया गया है। गोंद बहेरा, सिगरौली कोयला ब्लाक के आधार पर पर्यावरण मंत्रालय की पर्यावरणीय विशेषज्ञ कमेटी की एक जुलाई को हुई बैठक में परियोजना पर चर्चा हो चुकी है। पर्यावरणीय स्वीकृति के बाद अंतिम कार्यवाही संभव हो सकेगी।
प्रथम चरण की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की विभिन्न बीओपी प्रणालियाँ लगभग पूर्णत: पर है। शेष कार्य प्रगति पर है। इसी प्रकार सुरगाँव बंझारी से बीड तक रेलवे लाईन का कार्य प्रगति पर है। यह लाईन विद्युतीकरण तथा सिंग्नलिंग के साथ शीघ्र पूर्ण होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि परियोजना के मुख्य संयंत्र (मेन पॉवर ब्लाक) के लिए कार्यादेश मेसर्स बीएचईएल को 12 दिसम्बर 2008 को जारी किये गये थे। इकाइ क्रमांक 1 से व्यवसायिक उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। इकाई क्रमांक 2 में व्यवसायिक उत्पादन अक्टूबर 2014 से होना संभावित है। शेष संयंत्र के कार्यों के लिए मेसर्स एलएनटी लिमिटेड, बड़ोदरा को 26 अक्टूबर 2009 को जारी किये गये थे।
द्वितीय चरण
परियोजना के द्वितीय चरण की अनुमानित लागत 6500 करोड़ रुपये है। इस परियोजना की इकाई क्रमांक 3 से व्यवसायिक उत्पादन मार्च 2018 से तथा इकाई क्रमांक 4 से जून 2018 से होना संभावित है। परियोजना की स्थापना के लिये आवश्यक जल एवं भूमि उपलब्ध है तथा परियोजना के लिये वित्तीय लेखाबंदी प्राप्त की गई है।
परियोजना की अनुमानित लागत 6500 करोड़ में से वित्त पोषण के लिए मेसर्स पीएफसी से 6862 करोड़ ऋण तथा राज्य शासन से 1300 करोड़ रुपये अंश पूँजी के रूप में प्राप्त होगा। ऋण प्राप्ति के लिये पॉवर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा मेसर्स पीएफसी के साथा मेमोरण्डम ऑफ अण्डरस्टेडिंग हस्ताक्षरित किया गया है। परियोजना की 275 मी. ऊँची चिमनी निर्माण के लिए एयरपोर्ट ऑथारिटी ऑफ इंडिया से अनापत्ति प्राप्त हो चुकी है। परियोजना के लिए केन्द्रीय कोयला मंत्रालय ने गोंद बहेरा, सिगरौली कोल ब्लाक आंवटित किया गया है।
राज्य शासन ने द्वितीय चरण की स्थापना मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी लिमिटेट द्वारा किये जाने की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। परियोजना को मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर, भारत सरकार द्वारा मेगा पाँवर प्रोजेक्ट का स्टेटस प्रदान किया गया है। परियोजना के लिए जल आवंटन तथा भूमि उपलब्ध है। परियोजना सलाहकार भी नियुक्त किया जा चुका है। मध्यप्रदेश पॉवर ट्रेडिंग कम्पनी लिमिटेट (वर्तमान में पॉवर मेनेजमेंट कम्पनी लिमिटेट) के साथ विद्युत क्रय अनुबंध 4 जनवरी 2011 को किया गया था।
इसी प्रकार पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को 19 जनवरी 2011 को आवेदन दिया गया है। गोंद बहेरा, सिगरौली कोयला ब्लाक के आधार पर पर्यावरण मंत्रालय की पर्यावरणीय विशेषज्ञ कमेटी की एक जुलाई को हुई बैठक में परियोजना पर चर्चा हो चुकी है। पर्यावरणीय स्वीकृति के बाद अंतिम कार्यवाही संभव हो सकेगी।

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