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मोदी जब चाहें पाक आएं, उनका स्वागत होगा: बासित

नई दिल्ली : भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब चाहें पाकिस्तान पहुंचें, उनका स्वागत होगा। बासित ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान विदेश सचिवों की बैठक के लिए एक-दूसरे के संपर्क में हैं।

यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) में पत्रकारों से मुखातिब अब्दुल बासित ने कहा, ‘मोदी जब भी पाकिस्तान जाएंगे, उनका स्वागत किया जाएगा...हमें उम्मीद है कि यात्रा उच्च-स्तरीय होगी।’ बासित ने मई में मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच हुई मुलाकात को ‘‘अच्छी शुरुआत’’ करार देते हुए कहा कि दोनों ने एक तारतम्य कायम किया।

गौरतलब है कि शरीफ मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ-ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। बासित ने कहा कि मोदी और शरीफ के बीच मई महीने में हुई बातचीत के दौरान हुए फैसले के मुताबिक दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक के लिए पाकिस्तान भारत के संपर्क में है।

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने इस मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हम एक-दूसरे के संपर्क में हैं और चीजें आगे बढ़ रही हैं।’ सभी मुद्दों का जन्म जम्मू-कश्मीर पर चल रहे विवाद से होने का जिक्र करते हुए बासित ने भारत के साथ बेहतर संबंधों की अपनी सरकार की इच्छा जाहिर की और कहा कि निर्बाध बातचीत हर चीज हासिल करने का आधार है।

क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत के साथ संबंध बेहतर बनाने को लेकर पाकिस्तान की ठोस प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए बासित ने कहा, ‘सभी विवादों का जन्म जम्मू-कश्मीर के मुद्दे से होता है...हमें सारे मुद्दे सुलझाने की जरूरत है।’  26/11 हमले के आरोपियों पर मुकदमा चलाने में हो रही ‘देरी’ और इस मामले को देख रहे सरकारी वकीलों पर कथित खतरे के बारे में पूछे जाने पर बासित ने सीधा जवाब देने से इनकार किया और सिर्फ इतना कहा कि पाकिस्तान दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेशन कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी, मजहर इकबाल, हमद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और अंजुम पर नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले की योजना बनाने, हमले के लिए धन मुहैया कराने और हमले को अंजाम देने का आरोप है। इस बात पर जोर देते हुए कि पाकिस्तान और भारत को एक-दूसरे के प्रति ‘पुराने रवैये’ को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की जरूरत है, बासित ने कहा कि आपसी सम्मान के आधार पर सभी प्रमुख मुद्दों को सुलझाया जाएगा। पाकिस्तान द्वारा भारत को सबसे ज्यादा तरजीही मुल्क (एमएफएन) का दर्जा दिए जाने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बासित ने कहा कि दोनों देशों के वाणिज्य मंत्री 24 जुलाई को मिलेंगे और उन्होंने संकेत दिए कि इस बातचीत में यह मुद्दा उठ सकता है।

भारत ने 1990 के दशक में पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया था और कुछ नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाई थीं जबकि पाकिस्तान 2011 में भारत को एमएफएन का दर्जा देने पर सहमत हुआ था । बहरहाल, पाकिस्तान ने भारत को अब तक एमएफएन का दर्जा नहीं दिया। भारत के साथ बेहतर संबंधों की वकालत करते हुए पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच ‘बगैर किसी बाधा के बातचीत’ की मंशा जाहिर की ताकि आतंकवाद सहित विभिन्न चुनौतियों का सामना किया जा सके। बासित ने कहा कि भारत-पाक संबंध क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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