मध्यप्रदेश में सुशासन की दृष्टि से अनूठी : नंदकुमार
भोपाल । भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के 10 हजार पदों पर भर्ती किये जाने के मध्यप्रदेश सरकार के निर्णय को लोक कल्याणकारी बताते हुए कहा कि इससे दशकों से लंबित बैकलॉग समाप्त होगा और इन वर्गो को सुशासन का अहसास होगा।
उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश शासन ने स्थायी जाति प्रमाण-पत्र जारी करनें का प्रदेश में ऐतिहासिक अभियान आरंभ किया है जिसके तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के इस वर्ष 1 करोड़ 6 लाख प्रमाण-पत्र जारी किये जायेंगे। जाति प्रमाण-पत्र के सरलीकरण की प्रक्रिया आरंभ किये जाने से 50 वर्षो का रिकार्ड पेश करनें की किल्लत से मुक्ति मिल गयी है। इससे जहां जाति प्रमाण-पत्र के इच्छुक लोगों की कार्यालयों में भीड़ छट जायेगी वहीं इनका धन और समय भी बचेगा। स्व-प्रमाणित आवेदन पर ही जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, मूल निवासी प्रमाण-पत्रों की प्रतियां भी मान्य कर दी गयी है। जाति प्रमाण-पत्र इस दृष्टि से भी उपयोगी और सरंक्षणीय होंगे कि इनकों लेमिनेट किया जायेगा। इन पर डिजीटल हस्ताक्षर होंगे और इसका डाटा-बेस तैयार रहेगा, गुम हो जाने की दशा में कंप्यूटर से निकाला जा सकेगा।
नंदकुमार सिंह चौहान ने सुशासन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा की गयी अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान और सामान्य प्रशासन मंत्री श्री लालसिंह आर्य को बधाई देते हुए कहा कि 1950 में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि जाति प्रमाण-पत्र की सरल व्यवस्था हो, लेकिन आज तक केन्द्र और राज्य सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जाति प्रमाण-पत्र के बनाये जाने की प्रक्रिया का सरलीकरण करके आम आदमी की बहुप्रतिक्षित मांग को पूरा किया है। कक्षा पहली से कक्षा बारहवीं तक के प्रवेश लेने पर विद्यालय में जाति प्रमाण पत्र बनाकर उसे प्राचार्य संकुल प्रभारी को भेजेगा जो अनुविभागीय दंडाधिकारी को प्रेषित किया जायेगा। 30 दिन के भीतर जाति प्रमाण-पत्र संकुल प्रभारी के मार्फत विद्यालय पहुंचा दिया जायेगा। इस प्रक्रिया को लोक सेवा गारंटी में शामिल कर इसकी वैधानिकता के साथ समयबद्धता भी अनिवार्य कर दी गयी है।
उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश शासन ने स्थायी जाति प्रमाण-पत्र जारी करनें का प्रदेश में ऐतिहासिक अभियान आरंभ किया है जिसके तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के इस वर्ष 1 करोड़ 6 लाख प्रमाण-पत्र जारी किये जायेंगे। जाति प्रमाण-पत्र के सरलीकरण की प्रक्रिया आरंभ किये जाने से 50 वर्षो का रिकार्ड पेश करनें की किल्लत से मुक्ति मिल गयी है। इससे जहां जाति प्रमाण-पत्र के इच्छुक लोगों की कार्यालयों में भीड़ छट जायेगी वहीं इनका धन और समय भी बचेगा। स्व-प्रमाणित आवेदन पर ही जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, मूल निवासी प्रमाण-पत्रों की प्रतियां भी मान्य कर दी गयी है। जाति प्रमाण-पत्र इस दृष्टि से भी उपयोगी और सरंक्षणीय होंगे कि इनकों लेमिनेट किया जायेगा। इन पर डिजीटल हस्ताक्षर होंगे और इसका डाटा-बेस तैयार रहेगा, गुम हो जाने की दशा में कंप्यूटर से निकाला जा सकेगा।
नंदकुमार सिंह चौहान ने सुशासन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा की गयी अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान और सामान्य प्रशासन मंत्री श्री लालसिंह आर्य को बधाई देते हुए कहा कि 1950 में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि जाति प्रमाण-पत्र की सरल व्यवस्था हो, लेकिन आज तक केन्द्र और राज्य सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जाति प्रमाण-पत्र के बनाये जाने की प्रक्रिया का सरलीकरण करके आम आदमी की बहुप्रतिक्षित मांग को पूरा किया है। कक्षा पहली से कक्षा बारहवीं तक के प्रवेश लेने पर विद्यालय में जाति प्रमाण पत्र बनाकर उसे प्राचार्य संकुल प्रभारी को भेजेगा जो अनुविभागीय दंडाधिकारी को प्रेषित किया जायेगा। 30 दिन के भीतर जाति प्रमाण-पत्र संकुल प्रभारी के मार्फत विद्यालय पहुंचा दिया जायेगा। इस प्रक्रिया को लोक सेवा गारंटी में शामिल कर इसकी वैधानिकता के साथ समयबद्धता भी अनिवार्य कर दी गयी है।

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