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आपको दिखाते है हम दुनिया का सबसे ऊंचा पुल

जम्मू : एफिल टॉवर का नाम किसने नहीं सुना। लेकिन शायद यह बहुत कम लोगों को ही मालूम होगा कि अब भारत में एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा पुल बनने को है। यह करिश्मा कर दिखाया है भारतीय इंजीनियरों ने। जम्मू कश्मीर के दरिया चिनाब पर बनने जा रहे इस 1.3 किमी लंबे पुल की ऊचांई 359 मीटर की होगी जो कुतुब मीनार की 72 मीटर ऊंचाई से करीब पांच गुणा ज्यादा है। और तो और अपने पड़ोसी चीन को भी भारत इस पुल के निर्माण के बाद मात दे देगा। अभी तक दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल चीन के गीझू राज्य में स्थित बाइपंजिएंग नदी पर बना है। लेकिन इसकी ऊंचाई महज 275 मीटर ही है। कहा जा सकता है कि जब यह पुल निर्मित हो जाएगा तो इसके सामने चीन का यह पुल बौना दिखाई देगा। भारतीय रेलवे ने इसका नाम दिया है चिनाब रेलवे पुल।

कैसे बनेगा यह पुल : देश के सबसे दुर्गम रेल मार्ग यानि वादी-ए-कश्मीर को सारे भारत से जोडऩे के लिए दरिया चिनाब पर यह पुल कौरी इलाके में बन रहा है। इस पुल में कुल 17 स्टील के पिल्लर यानि खम्बे लगाए जा रहे हैं। सबसे लम्बे खम्बे की ऊंचाई अधिकारी 133 मीटर बता रहे हैं। इस पुल पर आने वाली लागत की बात करें तो अदांजन 92 मिलियन डॉलर यानि 552 करोड़ रूपए की भारी-भरकम राशि इस पुल पर खर्च होगी। विश्व के सबसे ऊंचे इस रेलवे पुल को कोंकण रेलवे कारपोरेशन लिमिटेड (के.आर.सी.एल) द्वारा बनाया जा रहा है।

आलम यह है कि इस पुल को बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही स्टील और अन्य निर्माण सामग्री को हैलीकाप्टर की मदद से ऊपर पहुंचाया जा रहा है। कारण साफ है, अधिकारी बताते हैं कि एपरोच रोड़ न होने के कारण कच्चा माल हवाई रास्ते से पुल के आखिरी सिरे तक पहुंचाया जा रहा है। अगले दो सालों में इस पुल के तैयार होने की संभावना है। इस पुल के निर्माण में 25 हजार टन स्टील का इस्तेमाल होगा। कोंकण रेलवे के एक इंजीनियर ने बताया कि जिस वक्त इसके मुख्य आर्क यानि कमान के अकार की स्पान जिसकी लम्बाई 485 मीटर है को दोनो किनारों से जोड़ा जाएगा वो वास्तव में स्काई स्क्रेपर की दुनिया में यह एक नायाब मिसाल होगी। दरअसल इस आर्क को दरिया चिनाब के दोनो सिरों से जोडऩे के लिए दो बड़ी केबल क्रेनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पुल के प्रयोग में आने के बाद बारामूला से जम्मू तक की दूरी मात्र साढ़े छह घंटों में तय होने की उम्मीद है। वर्तमान में पहाड़ी और घुमावदार रास्तों के चलते इस दूरी को तय करने में लगभग 12 घंटों का समय लग जाता है।

इस पुल से जुडने वाले स्टेशन : साल 2004 में भारतीय रेलवे ने इस पुल को बनाने का खाका तैयार किया था। 2008 में इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन इतनी ऊंचाई पर चलने वाली प्रबल वेग की हवा ने इसके निर्माण कार्य में बाधा डाली जिसके चलते इस ऐतिहासिक पुल का निर्माण होते होते इतने साल लग गए। इस पुल के बनने के बाद जो रेलवे ट्रैक प्रभाव में आएगा उसमें छुकछुक करती रेलगाड़ी जम्मू से उधमपुर होती हुई रियासी, संगलदान, बनिहाल, काजीकुंड और आखिरकर बारामूला पहुंचेगी।

रोमांच से भरा होगा सफर : कल्पना कीजिए आप दुनिया के सबसे ऊंचे पुल पर से होकर जा रहे हैं। हवा की रफ्तार अदांजन अढ़ाई सौ किमी प्रति घंटा है, और आप दरिया चिनाब को दूर आसमान से होते हुए पार कर रहे हैं। जी हां यही अंदाजा इंजीनियर लगा रहे हैं। इस पुल के निर्माण में दरिया चिनाब का तेज वेग और इतनी ऊंचाई पर चलने वाली प्रचंड हवा तो बाधक है ही अलबत्ता इसके बनने के बाद भी रेल का यह सफर हवा के तेज थपेड़ों में से होकर पूरा होगा। फिलवक्त तक देश का सबसे ऊंचा रेल पुल आधार शिविर कटड़ा में है जिसकी ऊंचाई 85 मीटर है।

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