ट्राई संशोधन विधेयक का विरोध नहीं करेंगे: पवार
मुंबई : राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी ट्राई कानून में संशोधन के लिए लाये गये विधेयक का विरोध नहीं करेगी। इस विधेयक में दूरसंचार नियामक निकाय के पूर्व अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र को प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव बनाने में कानूनी अड़चनों को दूर करने के प्रावधान हैं।
पवार ने इस मुद्दे पर संप्रग में मतभेद के संकेत देते हुए कहा, ‘हम संसद में इसका विरोध नहीं करेंगे। किसी अतिवादी कदम को उठाने की कोई जरूरत नहीं है।’ कांग्रेस ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण कानून में संशोधन के सरकार के कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अनावश्यक जल्दबाजी में किया जा रहा है।
राकांपा अध्यक्ष ने टीकीए नायर का उदाहरण दिया जो पंजाब काडर के आईएएस अधिकारी थे। नायर सेवानिवृत्त होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधान सचिव बन गये थे। राजनीतिक दलों के विरोध को अनदेखा करते हुए सरकार ने कल इस विधेयक को लोकसभा में पेश कर दिया। इस विधेयक के जरिये 28 मई को जारी एक अध्यादेश को बदला जायेगा। मूल कानून के प्रावधान के अनुसार मिश्रा सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी नौकरी नहीं कर सकते।कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह विधेयक का विरोध करेगी। उसने कहा कि इस विधेयक को लेकर दिखायी अनावश्यक जल्दबाजी से पता चलता है कि उनके (सरकार) मन में कानून की प्रक्रिया को लेकर अल्प सम्मान है।
पवार ने इस मुद्दे पर संप्रग में मतभेद के संकेत देते हुए कहा, ‘हम संसद में इसका विरोध नहीं करेंगे। किसी अतिवादी कदम को उठाने की कोई जरूरत नहीं है।’ कांग्रेस ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण कानून में संशोधन के सरकार के कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अनावश्यक जल्दबाजी में किया जा रहा है।
राकांपा अध्यक्ष ने टीकीए नायर का उदाहरण दिया जो पंजाब काडर के आईएएस अधिकारी थे। नायर सेवानिवृत्त होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधान सचिव बन गये थे। राजनीतिक दलों के विरोध को अनदेखा करते हुए सरकार ने कल इस विधेयक को लोकसभा में पेश कर दिया। इस विधेयक के जरिये 28 मई को जारी एक अध्यादेश को बदला जायेगा। मूल कानून के प्रावधान के अनुसार मिश्रा सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी नौकरी नहीं कर सकते।कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह विधेयक का विरोध करेगी। उसने कहा कि इस विधेयक को लेकर दिखायी अनावश्यक जल्दबाजी से पता चलता है कि उनके (सरकार) मन में कानून की प्रक्रिया को लेकर अल्प सम्मान है।

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