किसलिए हटाए गए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा जानिए
नई दिल्ली : मोदी सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में कई दिग्गज मंत्रियों के कामकाज में फेरबदल किया गया है इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम सदानंद गौड़ा का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदानंद गौड़ा को अपना पहला रेल मंत्री बनाया था, लेकिन वह उनसे अपने हिसाब से काम नहीं ले सके।
करीब एक महीना पहले गौड़ा ने इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस के एक अफसर को रेलवे बोर्ड में एक महत्वपूर्ण व गोपनीय ब्रांच का प्रमुख चुना था, लेकिन लिखित आदेश के बावजूद नौकरशाहों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं लिया और वह पद अभी तक खाली है।
बताया जाता है कि मोदी ने गौड़ा को 30 अहम कामों की सूची सौंपी थी। पीएमओ लगातार इन कामों की प्रगति पर नजर रख रहे थे। लेकिन इनमें से ज्यादातर काम के मामले में संतोषजनक प्रगति नहीं पाई गई। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने पिछले सप्ताह रेलवे कनेक्टिविटी-इन्फ़्रॉस्ट्रक्चर के मसले पर बैठक आयोजित की थी, जिसमें उन्होंने आशा के अनुरूप कार्यों की प्रगति नहीं होने पर रेलवे अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी।
जिन कामों पर पीएमओ की लगातार नजर थी, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए गौड़ा द्वारा की गई कोशिशें बैठकों तक ही सीमित रहीं। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय छुट्टी के दिन भी उन्होंने एक बैठक बुलाई थी। लेकिन, बात बैठकों से आगे नहीं बढ़ सकी। अब कानून मंत्री बनाए गए गौड़ा रेल मंत्रालय में रहते हुए जिन अहम मुद्दों पर कोई ठोस काम नहीं कर सके उनमें मधेपुरा और मथुरा में लोकोमोटिव फैक्टरी की स्थापना, रेलवे में एफडीआई लाना और ट्रेनों व स्टेशनों पर वाईफाई जैसी सुविधा देने के वादे पर अमल कराना आदि शामिल हैं।
करीब एक महीना पहले गौड़ा ने इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस के एक अफसर को रेलवे बोर्ड में एक महत्वपूर्ण व गोपनीय ब्रांच का प्रमुख चुना था, लेकिन लिखित आदेश के बावजूद नौकरशाहों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं लिया और वह पद अभी तक खाली है।
बताया जाता है कि मोदी ने गौड़ा को 30 अहम कामों की सूची सौंपी थी। पीएमओ लगातार इन कामों की प्रगति पर नजर रख रहे थे। लेकिन इनमें से ज्यादातर काम के मामले में संतोषजनक प्रगति नहीं पाई गई। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने पिछले सप्ताह रेलवे कनेक्टिविटी-इन्फ़्रॉस्ट्रक्चर के मसले पर बैठक आयोजित की थी, जिसमें उन्होंने आशा के अनुरूप कार्यों की प्रगति नहीं होने पर रेलवे अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी।
जिन कामों पर पीएमओ की लगातार नजर थी, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए गौड़ा द्वारा की गई कोशिशें बैठकों तक ही सीमित रहीं। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय छुट्टी के दिन भी उन्होंने एक बैठक बुलाई थी। लेकिन, बात बैठकों से आगे नहीं बढ़ सकी। अब कानून मंत्री बनाए गए गौड़ा रेल मंत्रालय में रहते हुए जिन अहम मुद्दों पर कोई ठोस काम नहीं कर सके उनमें मधेपुरा और मथुरा में लोकोमोटिव फैक्टरी की स्थापना, रेलवे में एफडीआई लाना और ट्रेनों व स्टेशनों पर वाईफाई जैसी सुविधा देने के वादे पर अमल कराना आदि शामिल हैं।
पीएम द्वारा सुरेश प्रभु पर पर विश्वास जताने की वजह यह बताई जा रही है कि प्रभु की छवि सुधारवादी और मोदी के विश्वासपात्र नेता की रही है। मोदी को उम्मीद है कि प्रभु रेलवे में नौकरशाही की जड़ता खत्म कर सकेंगे और रेलवे का ब्रांड एम्बेसेडर बनते हुए नए-नए आइडियाज लागू कराएंगे।

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