'मेसेंजर ऑफ गॉड' को मिली हरी झंड़ी, सेंसर बोर्ड प्रमुख ने दिया इस्तीफा!
नई दिल्ली : डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की फिल्म 'MSG' को हरी झंडी दिए जाने से नाराज सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैमसन ने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने सूचना प्रसारण मंत्रालय को इससे अवगत करा दिया है. हेडलाइंस टुडे को ईमेल पर दिए जवाब में उन्होंने इसकी पुष्टि की.
लीला सैमसन ने गैरजरूरी दखल और पैनल के सदस्यों और संस्था के अधिकारियों के भ्रष्टाचार को अपने इस्तीफे की मुख्य वजह बताया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सेंसर बोर्ड का मजाक बना दिया गया है और मंत्रालय की ओर से नियुक्त किए गए अधिकारी ही इसे चला रहे हैं.
विवादास्पद फिल्म 'MSG (मैसेंजर आफ गॉड)' को फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण (एफसीएटी) ने प्रदर्शन के लिए हरी झंडी दे दी है, जबकि पहले सेंसर बोर्ड ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. फिल्म को हरी झंडी के बाद बोर्ड प्रमुख लीला सैमसन ने गुरुवार रात ही इस्तीफे का फैसला कर लिया था.
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें मीडिया में आई उन खबरों की जानकारी है कि फिल्म को प्रदर्शन के लिए एफसीएटी द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है, सैमसन ने कहा, 'मैंने ऐसा सुना है. अभी तक लिखित में कुछ नहीं है. फिर भी यह फिल्म प्रमाणन बोर्ड का मजाक है. मेरा त्यागपत्र तय है. मैंने (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) के सचिव को सूचित कर दिया है.'
बहरहाल, एफसीएटी के निर्णय, यदि ऐसा कोइ निर्णय हुआ है तो, को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. सेंसर बोर्ड ने 'मेसेंजर आफ गॉड' फिल्म के मुद्दे को एफसीएटी को भेज दिया था. फिल्म शुक्रवार को जारी होनी थी. यह पूछे जाने पर कि उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय क्यों किया, उन्होंने फिल्म को कथित मंजूरी मिलने का उल्लेख नहीं किया, लेकिन कहा कि बताये गए कारणों में कथित हस्तक्षेप, दबाव, पैनल सदस्यों और संगठन अधिकारियों का भ्रष्टाचार शामिल है जिनकी नियुक्ति मंत्रालय द्वारा की जाती है.'
सैमसन के अनुसार, 'एक ऐसे संगठन का प्रबंधन करना पड़ा है, जिसके बोर्ड की नौ माह से ज्यादा समय से बैठक नहीं हुई क्योंकि मंत्रालय के पास सदस्यों की बैठक को अनुमति देने के लिए कोष नहीं है.' उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड के सभी सदस्यों और अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन चूंकि नई सरकार नया बोर्ड और अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है, कुछ का कार्यकाल बढ़ा दिया गया और उन्हें प्रक्रिया पूरी होने तक कार्य जारी रखने को कहा गया.
इस बीच सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हमारी सूचना के अनुसार एफसीएटी ने फिल्म को मंजूरी दे दी है, लेकिन लिखित आदेश का इंतजार है.' प्रवक्ता ने कहा, 'फिल्म मादक पदार्थ के खिलाफ है और उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है.' गृह मंत्रालय इसे लेकर चिंतित है कि फिल्म के रिलीज होने से कुछ वर्गों की ओर से विरोध हो सकता है क्योंकि सिख संगठन फिल्म का विरोध कर रहे हैं. मंत्रालय ने इस संबंध में राज्यों को परामर्श जारी किया है.
फिल्म का पोस्टर फाड़े जाने पर बवाल
पंजाब के मोगा जिले में फिल्म 'MSG' के एक पोस्टर फाड़े जाने के बाद तनाव हो गया. बताया जा रहा है कि मंगलवार को फिल्म के चार फ्लेक्स बोर्ड और पोस्टर फाड़ दिए गए. डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने बघपुराना पुलिस स्टेशन के सामने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. घटना के बाद डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी और सिख संगठनों के लोग भिड़ गए, जिसमें पांच लोगों को चोटें आईं.
लीला सैमसन ने गैरजरूरी दखल और पैनल के सदस्यों और संस्था के अधिकारियों के भ्रष्टाचार को अपने इस्तीफे की मुख्य वजह बताया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सेंसर बोर्ड का मजाक बना दिया गया है और मंत्रालय की ओर से नियुक्त किए गए अधिकारी ही इसे चला रहे हैं.
विवादास्पद फिल्म 'MSG (मैसेंजर आफ गॉड)' को फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण (एफसीएटी) ने प्रदर्शन के लिए हरी झंडी दे दी है, जबकि पहले सेंसर बोर्ड ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. फिल्म को हरी झंडी के बाद बोर्ड प्रमुख लीला सैमसन ने गुरुवार रात ही इस्तीफे का फैसला कर लिया था.
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें मीडिया में आई उन खबरों की जानकारी है कि फिल्म को प्रदर्शन के लिए एफसीएटी द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है, सैमसन ने कहा, 'मैंने ऐसा सुना है. अभी तक लिखित में कुछ नहीं है. फिर भी यह फिल्म प्रमाणन बोर्ड का मजाक है. मेरा त्यागपत्र तय है. मैंने (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) के सचिव को सूचित कर दिया है.'
बहरहाल, एफसीएटी के निर्णय, यदि ऐसा कोइ निर्णय हुआ है तो, को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. सेंसर बोर्ड ने 'मेसेंजर आफ गॉड' फिल्म के मुद्दे को एफसीएटी को भेज दिया था. फिल्म शुक्रवार को जारी होनी थी. यह पूछे जाने पर कि उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय क्यों किया, उन्होंने फिल्म को कथित मंजूरी मिलने का उल्लेख नहीं किया, लेकिन कहा कि बताये गए कारणों में कथित हस्तक्षेप, दबाव, पैनल सदस्यों और संगठन अधिकारियों का भ्रष्टाचार शामिल है जिनकी नियुक्ति मंत्रालय द्वारा की जाती है.'
सैमसन के अनुसार, 'एक ऐसे संगठन का प्रबंधन करना पड़ा है, जिसके बोर्ड की नौ माह से ज्यादा समय से बैठक नहीं हुई क्योंकि मंत्रालय के पास सदस्यों की बैठक को अनुमति देने के लिए कोष नहीं है.' उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड के सभी सदस्यों और अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन चूंकि नई सरकार नया बोर्ड और अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है, कुछ का कार्यकाल बढ़ा दिया गया और उन्हें प्रक्रिया पूरी होने तक कार्य जारी रखने को कहा गया.
इस बीच सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हमारी सूचना के अनुसार एफसीएटी ने फिल्म को मंजूरी दे दी है, लेकिन लिखित आदेश का इंतजार है.' प्रवक्ता ने कहा, 'फिल्म मादक पदार्थ के खिलाफ है और उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है.' गृह मंत्रालय इसे लेकर चिंतित है कि फिल्म के रिलीज होने से कुछ वर्गों की ओर से विरोध हो सकता है क्योंकि सिख संगठन फिल्म का विरोध कर रहे हैं. मंत्रालय ने इस संबंध में राज्यों को परामर्श जारी किया है.
फिल्म का पोस्टर फाड़े जाने पर बवाल
पंजाब के मोगा जिले में फिल्म 'MSG' के एक पोस्टर फाड़े जाने के बाद तनाव हो गया. बताया जा रहा है कि मंगलवार को फिल्म के चार फ्लेक्स बोर्ड और पोस्टर फाड़ दिए गए. डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने बघपुराना पुलिस स्टेशन के सामने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. घटना के बाद डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी और सिख संगठनों के लोग भिड़ गए, जिसमें पांच लोगों को चोटें आईं.

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