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पाक के सिंध में अंतिम सांस लेना चाहता है रीवा का चेतन दास

रीवा। दरअसल यह दासतां एक ऐसे शख्स की है जिसने जन्म तो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में लिया था लेकिन आजादी के कुछ सालों बाद वह हिन्दुस्तान आ गया था। यहां आने के बाद वह रीवा आ पहुंचा और यहीं का होकर रह गया। आज ज्यादातर लोग उन्हें रीवा का ही मानते आ रहे हैं। यह शख्स हैं चेतन दास बजाज पुत्र चूहरमल बजाज जो कि वर्तमान समय पर वार्ड क्रमांक 21 कटरा में रह रहे हैं। चेतन दास का जन्म 1940 में सिंध प्रांत में हुआ था।

जिसके बाद वे वहीं पढ़-लिखकर बड़े हुए तथा 25 साल की उम्र में पाकिस्तान से हिन्दुस्तान आ गये। मप्र के कई स्थान में रुके व अपना गुजर-बसर करने के लिए नौकरी भी की। इसी दौरान चेतन दास रीवा आए और जानकी पार्क के समीप संचालित गोप स्वीट्स नामक दुकान में नौकरी शुरू कर दी। यहां की आत्मियता उन्हें इस कदर भा गई कि वे रीवा के ही होकर रह गये। उनसे जुड़े लोगों की माने तो कई बार उन्हें शादी के लिए दबाव डाला गया लेकिन समाज के बड़े लोगों के इस दबाव को वे हंस कर टालते रहे और शादी का ख्वाब दिल और दिमाग से निकाल दिया। 

चेतन दास अपने काम से बेहद खुश रहते थे तथा बचे हुए समय में ईश्वर की आराधना में लीन रहते थे। जब कभी उन्हें मौका मिलता तो वे अपने परिवार के सदस्यों से हाल-चाल लेते रहते थे। इतना ही नहीं मौका मिलने पर वे एक-दो बार अपने सिंध क्षेत्र भी जा चुके हैं। उनके अस्वस्थ्य होने की जानकारी परिजनों को मिल चुकी है। ऐसे में परिजनों की भी हसरत है कि वे हम सबके बीच आ जाएं। इतना ही नहीं परिजनों द्वारा इस संबंध में अपने स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सिंधी समाज भी पूरे जोर-शोर के साथ उनकी इस अंतिम अभिलाषा को पूरा करने के लिए जुट गया है।

70 के दशक में जब चेतन दास यहां आए थे उस समय के नियम और कायदे इतने सख्त नहीं थे। लिहाजा उनके आने-जाने में किसी भी तरह की अड़चन नहीं आती थी। बदलते नियमों के चलते अब उनकी वापसी के लिए पासपोर्ट महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संबंध में सिंधी समाज के लोगों ने जानकारी देते हुए बताया है कि चेतन दास जल्द से जल्द अपने मुल्क पहुंच जाए इसके लिए हम सब अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। इतना ही नहीं जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को भी इस कार्य के संबंध में जानकारी देकर उनका भी सहयोग मांगा जा रहा है।

77 वर्षीय चेतन दास बजाज का स्वास्थ्य वर्तमान समय पर ठीक नहीं है। इस बात की जानकारी जैसे ही सिंधी समाज के लोगों को हुई तो उन्हें उपचार के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी दौरान उन्होंने समाज के लोगों के बीच यह इच्छा जताई की वे अंतिम सांस पाक स्थित सिंध प्रांत में लेना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक समाज के लोगों द्वारा चेतन दास के बेहतर स्वास्थ्य की हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

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