इनने किया था बॉल पेन आविष्कार, ऐसे लिखा इतिहास...
आज के समय में सभी जानते हैं कि लिखने के लिए बॉल पेन का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं बॉल प्वॉइंट पेन हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। इसका आविष्कार हंगरी के एक पत्रकार ने किया था...
पहले लोग फाउंटेन पेन से लिखते थे, लेकिन यह कई मायनों में असफल साबित हुआ। इसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसका इस्तेमाल ज्यादा ऊंचाई पर करने से इंक लीक करने लगती थी। ऐसे में बॉल पेन के आविष्कार ने लिखना आसान बना दिया। विश्व में कुछ महान आविष्कारों की सूची बनाई जाए तो बॉल पेन का नाम निश्चय ही उसमें शामिल किया जाएगा। सदियों पहले लोग लिखने के लिए ब्रश का इस्तेमाल करते थे। बाद में सरकंडे ने ब्रश का स्थान ले लिया। वहीं मध्यकालीन यूरोप में लोग लिखने के लिए पक्षियों के पंखों का इस्तेमाल करते थे। वे पंखों के पीछे के नुकीले हिस्से को स्याही में डुबोकर लिखते थे।
1884 में अमेरिका के एलई वॉटरमैन ने फाउंटेन पेन का आविष्कार किया। 19वीं सदी के मध्य में मेटल से बने पेन और निब की मांग में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। हालांकि इसके इस्तेमाल में कई दिक्कतें भी होती थीं। अक्सर स्याही लीक होने लगती थी। साथ ही इसके इंक को कागज ठीक से नहीं सोख पाता था, जिससे पेपर पर कई जगह स्याही के दाग-धब्बे लग जाते थे। हंगरी के जर्नलिस्ट लाज्लो बिरो को भी खबर लिखने के दौरान इन्हीं समस्याओं से दो-चार होना पड़ता था। एक बार उन्होंने गौर किया कि अखबार को छापने के लिए जिस तरह की इंक का इस्तेमाल किया जाता है, वह कागज पर अच्छी तरह से अवशोषित हो जाती है। उसी समय उन्होंने सोचा कि इस इंक का इस्तेमाल सामान्य पेन में करने पर यह नहीं फैलेगी। इस तरह उनके दिमाग में बॉल पेन बनाने का विचार आया और 1939 में इस तरह का पेन बनाने में वह सफल भी रहे। पेन के क्षेत्र में इस अभूतपूर्व आविष्कार का नाम बिरो के नाम पर ही बॉल पेन पड़ा।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ज्यादातर देशों की वायु सेना बॉल पेन का इस्तेमाल कर रही थी। अब सैनिक कितनी भी ऊंचाई पर गुप्त सूचनाएं लिख पाने में सक्षम थे। इस दौरान इस पेन की मांग में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई। इस पेन के आ जाने से बार-बार इंक भरने की समस्या से निजात मिल गई। इसके रिफिल के अगले हिस्से में लगा छोटा सा बॉल किसी भी दबाव और खुरदरी सतह पर लिखने में सक्षम होता है। इसीलिए अगली बार तुम जब भी बॉल पेन पकड़ों तो उस छोटे से बॉल को जरूर देखना, जो देखने में छोटा है, मगर काम करता है बड़ा।
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