मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला- किसानों के कर्ज के ब्याज पर मिलेगी ज्यादा छूट
नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है जिसके तहत अब किसानों को कर्ज के ब्याज पर ज्यादा छूट मिलेगी. इसका फायदा उन किसानों को मिलेगा जो एक साल में कर्ज को चुकाएंगे. कैबिनेट की आज की बैठक में ब्याज की दर तीन फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी कर दी गई है. सरकार ने कृषि ऋण पर 2 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और समय पर भुगतान करने वालों को 3 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता को मंजूरी दी.
मोदी सरकार के इस फैसले के तहत किसानों को कर्ज के ब्याज पर अब पहले के मुकाबले ज्यादा छूट मिलेगी. किसानों को तीन लाख तक के ऋण पर ब्याज में यह छूट मिलेगी. ब्याज में छूट तीन फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी किया गया है. इसका फायदा उन्हीं किसानों को मिलेगा जो एक साल में ऋण चुकता करेंगे. कैबिनेट के इस फैसले से केंद्र पर 19 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा.
आम आदमी पर असर डालता है किसानों की कर्जमाफी का फैसला
बैंकों पर बोझ बढ़ने का सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है, क्योंकि अगर बैंक के पास पैसे की कमी होगी तो किसी भी कर्ज के लिए ब्याज दरें ऊंची रहेंगी. वहीं दूसरी तरफ सरकार जब भी कर्जमाफी का एलान करती है तो उसका बोझ भी महंगाई की शक्ल में आम आदमी पर ही पड़ता है. यानी किसी भी स्थिति में कर्जमाफी सीधे आपकी जेब में सेंध लगाती है.
इससे पहले 2014 में आंध्र प्रदेश ने किसानों का 40 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया.तेलंगाना में 17 हजार करोड़ कर्ज माफ हो चुका है.उत्तर प्रदेश सरकार ने 36 हजार करोड़ कर्जमाफी का एलान किया है.महाराष्ट्र सरकार ने भी किसानों का करीब 30 हजार करोड़ कर्ज माफ करेगी.कर्जमाफी का वादा करके सत्ता में आयी पंजाब सरकार भी कर्जमाफी की तैयारी कर रही है.
इनमें से कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जो खुद कर्ज में न दबा हो
पंजाब पर 1.25 लाख करोड़ का कर्ज है.मध्य प्रदेश पर 1.11 लाख करोड़ का कर्ज है.महाराष्ट्र पर 3.5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है.और उत्तर प्रदेश पर भी करीब 3.75 लाख करोड़ का कर्ज है.
यानी इन राज्यों में कर्जमाफी का मतलब होगा सरकार पर और ज्यादा आर्थिक बोझ. जानकारों का कहना है कि सरकार पर बोझ बढ़ेगा तो उसकी भरपाई टैक्सपेयर यानी आपके पैसे से ही होगी.
नाबार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 में देशभर के किसानों पर कुल 8 लाख 77 हजार करोड़ का कर्ज बकाया है. अभी दो राज्यों में कर्जमाफी के एलान के बाद अगर देश के सभी किसान कर्जमाफी की मांग करते हैं तो इसका मतलब है देश की अर्थव्यवस्था पर लगभग 9 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ. जाहिर सी बात है ऐसा होने पर सरकार का राजस्व घाटा बढ़ेगा और दूसरी विकास योजनाएं प्रभावित होंगी.
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