शिक्षा पैदा कर रही शिक्षित बेरोजगार
हम भारत के नोजवान है।हमसे ही बनता है भारत का युवा समुदाय। हमारे पास इंजीनियर की डिग्री है, हमारे पास कम्प्यूटर की डिग्री है, हमारे पास वाणिज्य की डिग्री भी है। लेकिन हमारी ये योग्यता की पोथी फाइलो में बंद पड़ी है। ये बड़ी बड़ी डिग्रीयां लेकर भी हम आज प्राइवेट स्कूलो में ब्लैकबोर्ड पर चॉक घिसने पर मजबूर है जहाँ हमारी मेहनत के बदले दो चार हज़ार रूपये की चिल्लड़ पकड़ा दी जाती है। क्या आज की दुनिया में चार हज़ार रूपये वेतन पाने वाला शिक्षक अपने परिवार की मूलभूत आवश्यकताओ को पूरा कर सकता है?
लेकिन अब प्राइवेट शिक्षको ने इनकी पूर्ती के लिए निजी कोचिंग संसथान चलाने शुरू कर दिए और पूरी शिक्षा प्रणाली की बैंड बजा दी। ये बात अलग है की अपनी जरूरते पूरी करने के लिए कुछ बच्चों को घर पर पढ़ाना और उनसे न्यूनतम शुल्क लेना। लेकिन आज हालात कुछ ऐसे हो गए है की लोगो ने शिक्षा को धंधा बना लिया है। बड़े बड़े कोचिंग संसथान खुल चुके है जो सैकड़ो की तादात में विद्याथियों को प्रवेश देते है और हज़ारो रूपये लुटे जाते है। इस वज़ह से विद्यालय केवल परीक्षा पास करने का माध्यम बन कर रह गया है। किसी विशेष कोर्स के लिए खोले गए कोचिंग संसथान महत्वपूर्ण होते है जेसे - पीएससी, यूपीएससी,कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट, पीएमटी,नीट,जेईई आदि आदि।।
लेकिन विद्यालय स्तर की पढ़ाई के लिए जब विद्यार्थियो को केवल परीक्षा उपयोगी ज्ञान प्राप्त होता है तब वे आगे चलकर शिक्षित बेरोजगार बन जाते है। क्योंकि उनका प्रारंभिक एवम् व्यवहारिक ज्ञान कमजोर होता है। आज कई विद्यार्थी स्नातक एवम् स्नाकोत्तर करके भी बेरोजगार है। सिर्फ और सिर्फ बिगड़ी हुई शिक्षा प्रणाली के कारण। आज शासन द्वारा और प्राइवेट विद्यालय संस्थानों द्वारा इतनी सुविधाये प्रदान की जा रही है ताकि विद्यार्थी को उत्तम से उत्तम शिक्षा दी जा सके किन्तु विद्यार्थियो का इस ओर कोई रुझान नही है। इस प्रकार आगे चलकर उन्हें शिक्षित बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे बड़ा दुषप्रभाव यह है की आज के पढे लिखे युवा राजनेतिक एवम् सामाजिक मुद्दों पर दंगा मचाने का काम करने लगे है। चाहे हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई को या किसान आंदोलन। हमारे देश के युवा अपना हुनर सड़को पर दिखाने निकल पड़ते है। यदि इनके पास कोई काम होता तो उन्हें काम की चिंता होती न की दंगा मचाने की। तो हालात कुछ ऐसे हो गए है की आज की शिक्षा प्रणाली पढ़े लिखे बेरोजगार पैदा कर रही है और दूसरी ओर आरक्षण जेसी नीति बेरोजगारो की संख्या बढ़ने में अपना योगदान दे रही है। गरीब विद्यार्थयो को बीपीएल कार्ड के कारण छात्रवृत्ति मिल जाती है और सरकार द्वारा रोजगार भी उबलब्ध करा दिए जाते है। दूसरी ओर अमीर विद्यार्थी या तो पारिवारिक व्यवसाय अपना लेते है या फिर भ्रष्टाचार की आड़ में सब कुछ पा जाते है। लेकिन जो मिडिल क्लास विद्यार्थी है उन्हें सरकार की ओर से कभी कुछ नही मिलता और सामान्य वर्ग को तो आरक्षण निगल जाता है। देश में सबसे ज्यादा शिक्षित बेरोजगार मध्यम वर्गीय परिवार के और सामान्य वर्ग के है। जिनके मुह का निवाला कोई और छीन कर ले जाता है। और वर्तमान में ऐसे शिक्षित बेरोजगार दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है। जो बेहद संवेदनशील विषय है।
- शिवांगी पुरोहित - स्वतंत्र लेखक

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