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PM मोदी की 'मन की बात': छुट्टियों में घूमने जाएं तो #incredibleindia के साथ शेयर करें फोटो


नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के तीन साल पूरे हो गए हैं. 'मन की बात' कार्यक्रम के 36वें एपिसोड के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक जन-मन में जो भाव उमड़ते रहते हैं ‘मन की बात’ ने उन सब भावों से मुझे जुड़ने का एक बड़ा अद्भुत अवसर दिया है. मैं तो महीने में एक बार आधा घंटा आपका लेता हूं, लेकिन लोग, तीसों दिन ‘मन की बात’ के ऊपर अपनी बातें पहुंचाते हैं. मन की बात’ की तीन साल की ये यात्रा देशवासियों की, भावनाओं की, अनुभूति की एक यात्रा है. मन की बात में मैंने हमेशा आचार्य विनोबा भावे की उस बात को याद रखा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मैंने मन की बात में कहा था, हमें भोजन करते समय चिंता करनी चाहिये कि जितनी ज़रूरत है उतना ही लें, हम उसको बर्बाद न करें.' उन्होंने कहा कि मैंने महाराष्ट्र के एक रिटायर्ड शिक्षक चन्द्रकान्त कुलकर्णी की बात कही थी, जिन्होंने स्वच्छता के लिये दान दिया था. उसके बाद तो मैंने देखा कि स्वच्छता के लिए, इस प्रकार के काम करने के लिए कितने लोग आगे आए.

पीएम ने कहा, एक बार मैंने हरियाणा के एक सरपंच की #SelfieWithDaughter को देखा और मैंने ‘मन की बात’ में सबके सामने रखा. मैंने जब टूर पर जाने वाले लोगों से कहा था कि आप #incredibleindia पर, जहां भी जाएं वहां की फोटो भेजिये.

पीएम मोदी ने कहा, देश का हर नागरिक दूसरे की भलाई के लिए समाज की अच्छाई के लिए, देश की प्रगति के लिए, कुछ न कुछ करना चाहता है तो मेरे तीन साल के 'मन की बात' के अभियान में मैंने देशवासियों से जाना है, समझा है, सीखा है. देश सही दिशा में जाने के लिए हर पल अग्रसर है.

मैंने एक बार मन की बात में खादी के विषय में चर्चा की थी. खादी एक वस्त्र नहीं, एक विचार है. मैंने देखा कि इन दिनों खादी के प्रति काफी रूचि बढ़ी है. खादी की बिक्री बढ़ी है और उसके चलते गरीब के घर में सीधा-सीधा  रोजगारी का संबंध जुड़ गया है. 2 अक्टूबर से खादी में छूट दिया जाता है, कापुी छूट रियायत मिलती है. मैं फिर एक बार आग्रह करूंगा, खादी का जो अभियान चला है उसको हम और आगे चलाएं और बढ़ाएं.

पीएम मोदी ने कहा कि खादी के गरीब के घर में दिवाली का दीया जलाएं, इस हम भाव को लेकर के हम काम करें. उत्तर प्रदेश, वाराणसी सेवापुर में, सेवापुरी का खादी आश्रम 26 साल से बंद पड़ा था लेकिन आज पुनर्जीवित हो गया.

पिछले महीने हमने एक संकल्प किया था और तय किया था कि गांधी-जयंती से पहले 15 दिन देश-भर में स्वच्छता का उत्सव मनायेंगे. हमारे आदरणीय राष्ट्रपति जी ने इस कार्य का आरंभ किया और देश जुड़ गया है. अबाल, वृद्ध, पुरुष हो, स्त्री हो, शहर हो, गांव हो, हर कोई आज इस स्वच्छता-अभियान का हिस्सा बन गया है. जब मैं कहता हूं, 'सकल्प से सिद्धि' ये स्वच्छता अभियान एक संकल्प सिद्धि की ओर कैसे आगे बढ़ रहा है हम अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं.

पीएम ने कहा, सार्वजनिक स्थानों पर दबाव पैदा हुआ है अब सार्वजनिक स्थान गंदे हों तो लोग टोकते हैं,वहाँ काम करने वालों को दबाव महसूस होने लगा है. मैं इसे अच्छा मानता हूं और मेरे लिए खुशी है कि स्वच्छता ही सेवा अभियान के सिर्फ पहले चार दिन में ही करीब-करीब 75 लाख से ज्यादा लोग 40 हजार से ज्यादा लोग इस गतिविधि में जुड़ गए. कुछ लोगों को तो मैंने देखा कि लगातार काम कर रहे हैं, परिणाम लाकर रहने का फैसला ले करके काम कर रहे हैं.

इस बार 'स्वच्छता ही सेवा' के साथ प्रतियोगिताएं हुईं. ढाई करोड़ से ज्यादा बच्चों ने स्वच्छता के निबंध स्पर्धा में भाग लिया, हजारों बच्चों ने पेंटिंग बनाई. बहुत से लोगों ने कविताएं बनाई और इन दिनों तो मैं सोशल मीडिया पर ऐसे जो हमार नन्हे साथियों ने छोटे-छोटे बालकों ने चित्र भेजे हैं वे मैं पोस्ट भी करता हूं, उनका गौरवगान करता हूं.

पीएम ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया देश की कितनी बड़ी सेवा कर सकता है ये स्वच्छता ही सेवा आंदोलन में हम देख पाते हैं.

पीएम ने किया बिलाल डार का जिक्र
नगर निगम श्रीनगर ने 18 साल के नौजवान बिलाल डार को स्वच्छता के लिए अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है. बिलाल डार स्वयं 12-13 साल की उम्र में स्वच्छता में लग गया है. एशिया की सबसे बड़ी झील श्रीनगर के पास वहां प्लास्टिक हो, पॉलिथीन हो, यूज्ड बॉटल हो, कूड़ा-कचरा हो, बस हो साफ करता रहता है. उसमें से कुछ कमाई भी कर लेता है क्योंकि उसके पिता जी की बहुत छोटी आयु में कैंसर से मौत हो गई थी. इसके बाद भी उसने अपना जीवन आजीविका के साथ-साथ स्वच्छता के साथ जोड़ दिया. एक अनुमान है कि बिलाल ने सालाना 12 हजार किलो से ज्यादा कूड़ा कचरा साफ किया है.

महापुरुषों को याद करने का है अक्टूबर का महीना
इस बात को हमें स्वीकार करना होगा कि भावी इतिहास, इतिहास की कोख में जन्म लेता है. जब इतिहास की बात आती है तो महापुरुष याद आना बहुत स्वभाविक है. ये अक्टूबर महीना हमारे इतने सारे महापुरुषों को स्मरण करने का महीना है.

दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्म जयंती है तो 11 अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जन्म जयंती है. साथ ही 25 सितंबर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म जयंती है.

गांधी जी, जयप्रकाश जी, दीनदयाल जी ये ऐसे महापुरुष हैं जो सत्ता के गलियारों से कोसो दूर रहे हैं:  नानाजी देशमुख राजीनतिक जीवन को छोड़ करके ग्रामोदय में लग गए थे और जब आज उनका शताब्दी पर्व मनाते हैं तो उनके ग्रामोदय के काम के प्रति आदर होना स्वभाविक है.

भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी जब नौजवानों से बात करते थे तो हमेशा नानाजी देशमुख के ग्रामीण विकास की बातें किया करते थे. अगले ‘मन की बात’ में, मैं जरुर सरदार वल्लभ भाई पटेल के विषय में कहूंगा.

31 अक्टूबर को देश के हर शहर में, हर नगर में बहुत बड़ी मात्रा में RUN for Unity के कार्यक्रम होने चाहिए और मौसम भी ऐसा है कि दौड़न का मजा आता है. सरदार साहब जैसी लौह शक्ति पाने के लिए ये भी तो जरूरी है. साथ ही सरदार साहब ने देश को एक किया था. हमने भी एकता के लिए दौड़ करके एकता के मंत्र को आगे बढ़ाना चाहिए.

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