अब मुंगावली के साथ कोलारस की भी जिम्मेदारी सिंधिया पर...
भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी सत्ता में आने के लिए कोशिश करती जब नजर आती है। कोई न कोई अनहोनी कांग्रेस के साथ घटित हो जाती है। कुछ दिन पहले ही मुंगावली से कांग्रेस विधायक महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के सदमें से पार्टी बाहर भी नहीं निकली थी कि अब कोलारस के विधायक राम सिंह यादव का निधन होने से कांग्रेस को इस भंवर से निालने की जिम्मेदारी सिंधिया के कंधों पर आ गई है। चुनाव आयोग मुंगावली के साथ अब कोलारस सीट पर उपचुनाव एक साथ करवा सकता है। दोनों विधानसभा क्षेत्र में सिंधिया को बोलबाला है, ऐसे में अब सिंधिया की प्रतिष्ठता दांव पर लग चुकी है। इस उपचुनाव का प्रभाव विधानसभा चुनाव में भी पड़ेगा।
प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के बुरे दिन तो पिछले 14 साल से चल रहे हैं। पार्टी पिछले 14 सालों से वनवास झेल रही है और हाशिए पर आ चुकी है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एकजुटता का संदेश तो दे रहे हैं लेकिन उनके अच्छे दिन अभी भी नहीं आए हैं। अब मिशन-2018 को लेकर कांग्रेस ने आक्रामक होने की तैयारी की तो पार्टी अपने विधाकायों के निधन से कमजोर हो रही है। बीते एक साल में पार्टी के चार बड़े चेहरे साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने अस्तित्व को बचाने का संकट खड़ा हो चुका है।
इसमें सबसे अधिक झटका पूर्व के न्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगा है, क्योकि उनके समर्थक तीन विधायकों की मौत हो चुकी है। सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष रहे सत्यदेव कटारे का निधन होने से सिंधिया के ऊपर अटेर फतह की जिम्मेदारी आई थी ओर उस चुनाव में उन्होंने जमकर मेहनत कर पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह के साथ जुगलबंदी कर कांग्रेस की प्रतिष्ठा को बचा लिया था। इसके बाद कांग्रेस पूरे प्रदेश में एकजुटता का संदेश देने के प्रयास में लगी हुई थी ओर इसके लिए कई जगह सभाएं भी की गई थी, लेकिन इसी बीच सिंधिया परिवार के सबसे नजदीकी पूर्व मंत्री एवं मुंगावली से विधायक महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा का निधन हो गया ओर वहां अभी चुनाव की घोषणा भी नहीं हो पाई थी कि अब शिवपुरी जिले के कोलारस विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम सिंह यादव का हृदयघात से निधन हो गया। इससे पहले चित्रक ूट विधानसभा से विधायक रहे प्रेम सिंह का भी निधन हो चुका है ओर वहां उप चुनाव की घोषणा हो चुकी है।
प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के बुरे दिन तो पिछले 14 साल से चल रहे हैं। पार्टी पिछले 14 सालों से वनवास झेल रही है और हाशिए पर आ चुकी है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एकजुटता का संदेश तो दे रहे हैं लेकिन उनके अच्छे दिन अभी भी नहीं आए हैं। अब मिशन-2018 को लेकर कांग्रेस ने आक्रामक होने की तैयारी की तो पार्टी अपने विधाकायों के निधन से कमजोर हो रही है। बीते एक साल में पार्टी के चार बड़े चेहरे साथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने अस्तित्व को बचाने का संकट खड़ा हो चुका है।
इसमें सबसे अधिक झटका पूर्व के न्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगा है, क्योकि उनके समर्थक तीन विधायकों की मौत हो चुकी है। सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष रहे सत्यदेव कटारे का निधन होने से सिंधिया के ऊपर अटेर फतह की जिम्मेदारी आई थी ओर उस चुनाव में उन्होंने जमकर मेहनत कर पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह के साथ जुगलबंदी कर कांग्रेस की प्रतिष्ठा को बचा लिया था। इसके बाद कांग्रेस पूरे प्रदेश में एकजुटता का संदेश देने के प्रयास में लगी हुई थी ओर इसके लिए कई जगह सभाएं भी की गई थी, लेकिन इसी बीच सिंधिया परिवार के सबसे नजदीकी पूर्व मंत्री एवं मुंगावली से विधायक महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा का निधन हो गया ओर वहां अभी चुनाव की घोषणा भी नहीं हो पाई थी कि अब शिवपुरी जिले के कोलारस विधानसभा क्षेत्र से विधायक राम सिंह यादव का हृदयघात से निधन हो गया। इससे पहले चित्रक ूट विधानसभा से विधायक रहे प्रेम सिंह का भी निधन हो चुका है ओर वहां उप चुनाव की घोषणा हो चुकी है।

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