जिला स्तरीय गोपाल पुरुस्कार प्रतियोगिता संपन्न
जिला स्तरीय गोपाल पुरुस्कार प्रतियोगिता संपन्न
अनूपपुर / प्रदीप मिश्रा -8770089979
भारतीय उन्नत नस्ल के गायों एवं भैंसों के पालन को बढ़ावा देने एवं अधिक दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए गोपाल पुरुस्कार प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इस प्रतियोगिता में विकासखंड स्तर में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुओं को जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जाता है। अनूपपुर जिले में सत्र 2017-18 के लिए जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन जिला पशु चिकित्सालय में किया गया। इस प्रतियोगिता में भैंस वंश के लिए 10 प्रतिभागी एवं गौवंश के लिए 7 प्रतिभागी शामिल हुए। सफल प्रतिभागियों को अनूपपुर विधायक जी के द्वारा सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में दोनों ही स्तरों गौवंश एवं भैंस वंश में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालकों को क्रमशः 50 हजार, 25 हजार एवं 10 हजार रुपए की पुरुस्कार राशि प्रदान की गई। गौवंश स्तर में श्री रामबाबू पटेल निवासी पिपरिया की गाय(गिर नस्ल) जिसका औसत प्रति दिवस उत्पादन 10.17 ली0 को प्रथम पुरुस्कार, श्रीमती शुकवरिया पनिका निवासी सुलखारी की गाय(गिर नस्ल) जिसका औसत प्रति दिवस उत्पादन 10.06 ली0 को द्वितीय पुरुस्कार एवं श्री चूड़ा सिंह निवासी सुलखारी की गाय(गिर नस्ल) जिसका औसत प्रति दिवस उत्पादन 9 ली0 को तृतीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ। इसी प्रकार भैंसवंश स्तर में विशाल गुप्ता निवासी भालूमाड़ा की भैंस(मुर्रा नस्ल) जिसका औसत प्रति दिवस उत्पादन 17.58 ली0 को प्रथम पुरुस्कार, श्री संतोष पटेल निवासी पिपरिया की भैंस(मुर्रा नस्ल) जिसका औसत प्रति दिवस उत्पादन 15.46 ली0 को द्वितीय पुरुस्कार एवं विनोद यादव निवासी कोतमा की भैंस(मुर्रा नस्ल) जिसका औसत प्रति दिवस उत्पादन 14.36 ली0 को तृतीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ। साथ ही प्रतियोगिता में शामिल हुए समस्त पशुपालकों को सांत्वना पुरुस्कार के रूप में 5 हजार रुपए प्रदान किए गए।
भारतीय नस्लें दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सक्षम
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक अनूपपुर श्री रामलाल रौतेल ने गौ एवं भैंस पालकों से कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए भारतीय नस्लें लाभप्रद हैं। इनसे न केवल उत्पादन बढ़ता है, वरन् पौष्टिक आहार की भी प्राप्ति होती है। आपने यह भी कहा कि पशु पालन से जीवकोपार्जन एवं उत्तरोत्तर प्रगति संभव है। शासन की योजनाओं के माध्यम से पशुपालन का व्यवसाय अधिक से अधिक जनों को करना चाहिए।पशुपालन से प्राप्त की जा सकती है आत्मनिर्भरता
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के.व्ही.एस. चैधरी ने कहा कि भारतीय नस्लों की उत्पादकता से यह बात स्पष्ट है कि अगर गौवंश एवं भैंस वंश का उचित तरीके से पालन-पोषण किया जाय तो प्रतियोगिता में प्राप्त परिणामों को हर घर में प्राप्त किया जा सकता है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अगर विधिवत् तरीके से पशुपालन किया जाय तो यह एक सक्षम व्यवसाय बन सकता है। जो कि क्षेत्र को एवं पशुपालकों को प्रगति के मार्ग में प्रशस्त करेगा एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगा।

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