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विंध्य और सागर के कुछ विधायकों को मुख्यमंत्री ने किया अलर्ट,कह डाली ये सब बाते ...


भोपाल : आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा विधायकों की सर्वे रिपोर्ट पर बातचीत शुरू कर दी है। वन-टू-वन में विधायकों को बता दिया है कि वे कहां कमजोर हैं, क्या कमियां और उन्हें एक साल में कैसे दूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि छह माह बाद एक और सर्वे कराया जाएगा, जिसमें यदि स्थिति नहीं सुधरी तो टिकट काट दिया जाएगा।

- मुख्यमंत्री ने इस बार अपने सर्वे में विधायकों की संपत्ति का आंकलन करवाया है कि विधायक बनने के बाद वह कितनी बढ़ी। साथ ही चर्चा के दौरान विधायकों को बता भी दिया। मुख्यमंत्री ने सीएम निवास में बुधवार दोपहर 12 बजे से लेकर रात करीब 8 बजे तक विधायकों से 10-10 मिनट बात की। विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लगभग 40 विधायक सीएम हाउस पहुंचे।
- विंध्य और सागर के कुछ विधायकों को मुख्यमंत्री ने अलर्ट किया है क्योंकि सागर में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच अनबन काफी है। इसकी सुर्खियां भी बन रही, जिससे पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसी तरह विंध्य में कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में कुछ फायदा मिला था, इस बार विधायक अपने क्षेत्र के साथ-साथ उन क्षेत्रों में भी ध्यान दें।
- वन-टू-वन के दौरान अटकलें थीं कि सागर की सुरखी से विधायक पारुल साहू को लेकर सीएम कुछ नाराज हुए, लेकिन साहू ने इससे साफ इनकार किया है। पारुल ने कहा कि क्षेत्र विकास और कामकाज को लेकर ही बात हुई है। नाराजगी जैसी कोई बात नहीं।
विंध्य और बुंदेलखंड की 44 सीटों का चुनावी गणित
भाजपा को मिले वोट : 45.19 प्रतिशत
कांग्रेस को मिले वोट : 36.79 प्रतिशत
अंतर : 8.40 प्रतिशत
- वोटों का अंतर ज्यादा नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री ने पहले इन्हीं क्षेत्रों के विधायकों से बात की। जतारा सीट तो भाजपा सिर्फ 0.18 प्रतिशत वोट के अंतर से हारी।
- मलहरा कम वोटों से जीती। सागर सीट पर भी कांग्रेस को अच्छे वोट मिले। सुरखी में भाजपा सिर्फ 0.10 फीसदी वोट के अंतर से जीती।
- सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल आदि जिले शामिल हैं।
- मुख्यमंत्री ने महाकौशल क्षेत्र के बालाघाट, मंडला, सिवनी और नरसिंहपुर के भी कुछ विधायकों को बुलाया था।)

 अब नई घोषणा न करें :
-मुख्यमंत्री ने विधायकों को नसीहत दी है कि पुरानी पेंडिंग घोषणाओं को पूरा कराएं, नई घोषणाएं करने से बचें। बहुत ही जरूरी हो तो ही नए वादे करें।
 
क्षेत्र के बड़े मुद्दे
बुंदेलखंड : औद्योगिक करण नहीं है। बुंदेलखंड पैकेज का लाभ नहीं मिला। केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट अटका।
विंध्य : जमीन अधिग्रहण से किसान परेशान हैं। शहडोल संभाग में आदिवासी हैं, लेकिन अभी भी कई क्षेत्र पिछड़े।
 
सर्वे रिपोर्ट में पूछा
- पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय।
- आरएसएस के साथ क्षेत्र में संबंध कैसे हैं।
- विधायक बनने के बाद कितनी संपत्ति बढ़ी।
- जनता के बीच लोकप्रियता कितनी बढ़ी या घटी।
- कौन-कौन से काम कराएं हैं, कितनी घोषणाएं कीं।
- ग्रामीण इलाकों और शहरों में स्थिति क्या है?
- आगामी चुनाव में कांग्रेस में कौन प्रबल उम्मीदवार हो सकता है।

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