गरीबी रेखा की सूची में जारी नाम जोड़ने का स्कैंडल
मामला जवा तहसील का अमीरों के नाम जोड़े गए गरीबों की सूची में तहसीलदार के अभियान में उठ रहे सवाल
रीवा/जवा
*एमपी ऑनलाइन न्यूज़ 08/11/2017 दिन बुधवार*
वैसे तो राजस्व विभाग की कार्यशैली एवं कर्तव्य निष्ठा आम जनता के लिए कभी भी विश्वसनीय नहीं रही।भ्रष्टाचार का आरोप राजस्व विभाग के लिए टानिक से कम नही होता।हर शिकायत या आरोप के बाद अमले की कार्य पद्धति और समर्पण ग्रहण करती है वजाय सुधार के।इसी कार्य पद्धति की तहसीलदार न्यायालय की गरीबी रेखा में नाम जोड़ने का अभियान पुष्टि कर रहा है।
जनपद जवा कार्यालय से नये गरीबी रेखा की सूची में जोड़े गए नामों की जानकारी माँगे जाने पर तहसील जवा के भ्रष्टाचार पोषित अभियान से कुछ ऐसा पर्दा उठा की तहसीलदार सी एम सोनी की मानसिकता और आचरण संदिग्ध नजर आने लगा ।
तहसीलदार सोनी द्वारा अपीली चयनित सूची पर गौर करें एवं सूत्रों पर भरोसा करें तो स्पष्ट होता है की तहसीलदार श्री सोनी ने गरीबी रेखा की सूची में नाम जोड़ने का पैमाना शासन के तय मापदंडों के बाहर अपना निर्धारित कर रखा है।जिससे बड़ा से बड़ा अमीर भी सूची में नाम जोड़ने की पात्रता प्राप्त कर वास्तविक गरीबों का हक हड़प कर रहा है।
तहसीलदार श्री सोनी ने नगवां ग्राम पंचायत की सूची में तो ऐसे नाम जुड़वा दिए जो वास्तविक रूप से जवा तहसील के बड़े व्यवसायी हैं ।यह अलग बात है की सत्तर प्रतिशत पात्रता तहसीलदार के सजातीयों को ही नसीब हुई है।सूत्रों पर भरोसा करें तो गयीबी रेखा की सूची में नाम जोड़ने के लिए पात्रता की बहस और फैसले के लिए तहसीलदार के दलाल सक्रिय है जो मनमाफिक सौदे पर नाम जोड़ने के फैसले कराते हैं ।इस बात की पुष्टि स्वयं तहसीलदार द्वारा जोड़े गए नामों की सूची करती है।अगर उच्च स्तरीय जांच कराई जाय तो जोड़े गए सभी नाम अपात्र सिद्ध होंगे और तहसीलदार का गैर संवैधानिक कृत्य से पर्दा उठेगा।
इतना ही नही अगर सूत्रों में भरोसा करें तो तहसीलदार सरकारी व्यय पर नित डभौरा से जवा आना जाना करते हैं ।क्योंकि वो रात्रि विश्राम अपने घर सतना में करते हैं ।जिससे वो न फील्ड का भ्रमण करते हैं और न ही समय से समय तक कार्यालय को ही समय देते हैं ।सतना से आने जाने के कारण देर से जवा पहुँचना एवं ट्रेन के समय से वापस हो जाना उनकी दिन चर्या बनी हुई है।अगर कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे उनके वर्तमान में होने की जानकारी मांगता है तो वो डभौरा में होने की बात बता देते हैं अथवा फील्ड में होने की बात कहते हैं चाहे वो ट्रेन में ही क्यों न रहें ।अगर उनके नंबर की टावर लोकेशन ट्रैस कराया जाय तो उनकी कर्तव्यनिष्ठा की सच्चाई उजागर हो सकती है।
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