खूब लुटा किसान धान खरीदी केन्द्र नौवस्ता में
राहुल तिवारी एमपी ऑनलाइन न्यूज़ संवाददाता
बेपरवाह रहा शासन प्रशासन लाखों रुपये तौलाई गई जेब से किसानों के अधिक तौली गई किसानों की लाखों रुपए की धान
बेपरवाह रहा शासन प्रशासन लाखों रुपये तौलाई गई जेब से किसानों के अधिक तौली गई किसानों की लाखों रुपए की धान
रीवा (जवा) : सरकार 2022 तक किसानों की आय दो गुना करके उनके जीवन स्तर में सुधार का स्वप्न दिखाती है। वहीं प्रदेश में किसान पुत्र मुख्यमंत्री के औहदे पर बैठ किसान कल्याण का दम भरते हैं परंतु किसान कल्याण पर ग्रहण उनका सरकारी अमला ही लगाने में मशगूल है और मजबूर किसान बेवश आंशू बहा रहा है। सरकार ने बाजार की लूट से किसानों को बचाने के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए खरीदी केन्द्र बनाये और व्यवस्था दी की किसान अपनी धान खरीदी केन्द्र पहुँचाए बाकी का खर्च सरकार उठाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा खरीदी केन्द्र समितियों को चालिस रुपये प्रति क्विटल खर्च एवं कमीशन हेतु दिए।खरीदी खर्च के रूप में 18 रुपए तक प्रति क्विंटल एवं कमीशन के रूप में 22 रुपए प्रति क्लिंटल। जिसमें तौलाई बोरी की सिलाई पल्लोदारी के साथ साथ किसानों के रुकने बैठने एवं भोजन पानी की व्यवस्था सामिल थी।
सरकार की आदेश रूपी चाक चौबंद व्यवस्था के बीच खरीदी केन्द्र जवा में किसानों की दोहरी लूट की गई।एक तरफ पांच रुपए प्रति बोरी तौलाई ली गईं तो दूसरी तरफ पाँच से छः सौ ग्राम प्रति बोरी धान ज्यादा तौलाई गई । किसान गुहार भी मारता रहा। नवस्वदेश ने कई बार शासन प्रशासन को खबर छाप कर आगाह किया।कई किसानों ने प्रशासनिक अमले तक शिकायत पहुँचाई परंतु किसान की लूट नहीं रुकी।सुविधा के नाम पर किसानों को खुले आसमान में पूस- माघ की रातें खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ी।किसानों की सुविधा के आदेश कागजों में कैद रहे।
अगर धान खरीदी केन्द्र नौवस्ता पर गौर किया जाय तो 48 हजार 194 क्विंटल 80 किलोग्राम रिकार्ड के अनुसार खरीदी हुई है।जिसके लिहाज से कुल 1 लाख 20 हजार 487 बोरी धान खरीदी गई।जिसमें तौलाई के नाम पर किसानों से पाँच रुपए प्रति बोरी की दर से 6 लाख 2 हजार 4 सौ 35 रुपये लिए गए।इसी तरह तौलाई में नमी के आड़ में 602 क्विंटल 43 किलोग्राम नौवस्ता खरीदी केन्द्र में किसानों की धान लूटी गई।जिसकी कुल कीमत 9 लाख 33 हजार 774 रुपये होती है।
अगर किसानों से लिए गए मजदूरी एवं अधिक ली गईं धान की कीमत जोड़ी जाय तो यह 15 लाख 36 हजार 209 रुपये होती है।खरीदी केन्द्र द्वारा बोरी की सिलाई एवं ट्रक लोड करने की पल्लेदारी खर्च की गई है।जबकि खरीदी खर्च के रूप में शासन द्वारा 12 रुपये प्रति क्विंटल एवं किसानों की व्यवस्था तथा अन्य व्यवस्था खर्च के लिए 6 रुपए प्रतिक्लिंटल दिये गये थे।
नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा दिए गये खर्च की राशि के लिहाज से नौवस्ता खरीदी केन्द्र को धान तौलाई बोरी की सिलाई एवं पल्लेदारी के लिए 5 लाख 78 हजार 337 रुपए एवं किसानों पर खर्च करने तथा अन्य खर्च के लिए 2 लाख 89 हजार 168 रुपए मिले।इसके अलावा खरीदी केन्द्र समिति को कमीशन के रूप में 10 लाख 60 हजार 285 रुपए दिए गए।
सबसे अहम यह रहा की जहाँ किसानों को पाँच रुपए प्रति बोरी तौलाई भरने को मजबूर किया गया वहीं बोरी का कृत्रिम अभाव दिखा कर किसानों को इतना मजबूर कर दिया गया की किसान अधिक धान की तौलाई का बिरोध न कर सकें।मजदूरी देने से आनाकानी न करे तथा बोरियों के लिए भी आरजू मिन्नत करे।अगर पूरे खरीदी केन्द्र की गतिविधियों पर गौर करें तो पहले नवम्बर महीने में खरीदी न करना फिर बोरियों के अभाव के नाटक में किसानों को खुले सड़क पर भीषण ठंड में कई कई रातें बिताने को मजबूर करना और पीड़ित किसानों की किसी भी शिकायत पर प्रशासन का गौर न करना कई सवालों को जन्म देता है।
एक और अहम सवाल की जो धान किसानों का गला दबाकर अधिक तौली गई क्या वह नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम के गोदाम को मिली ? ऐसा संभव नहीं क्योंकि वजन कराकर ही गोदाम को दिया जाता है।फिर अधिक ली गई 1439 बोरी से ज्यादा धान को कहाँ ठिकाने लगाया गया ? इसका भी उत्तर खरीदी चालू रहते पीड़ित किसानों ने प्रशासन को दे दिया था ।खरीदी केन्द्र प्रभारी के कुछ करीबी पंजीकृत किसानों पर आरोप लगाया गया था कि एक भी बीघे धान बोई नहीं और सैकड़ों क्लिंटल खाते में चढ़ गये।
अब सवाल उठता है की क्या नौवस्ता खरीदी केन्द्र प्रभारी को शासन प्रशासन ने भ्रष्टाचार एवं किसानों की लूट की छूट दे रखी है ? क्या इसी तरह किसानों का कल्याण जारी रहेगा ? क्या जनप्रतिनिधि किसानों की समस्या से अपने को अलग कर चुके हैं ? क्या पीड़ित किसानों को न्याय मिल पायेगा ?
सरकार की आदेश रूपी चाक चौबंद व्यवस्था के बीच खरीदी केन्द्र जवा में किसानों की दोहरी लूट की गई।एक तरफ पांच रुपए प्रति बोरी तौलाई ली गईं तो दूसरी तरफ पाँच से छः सौ ग्राम प्रति बोरी धान ज्यादा तौलाई गई । किसान गुहार भी मारता रहा। नवस्वदेश ने कई बार शासन प्रशासन को खबर छाप कर आगाह किया।कई किसानों ने प्रशासनिक अमले तक शिकायत पहुँचाई परंतु किसान की लूट नहीं रुकी।सुविधा के नाम पर किसानों को खुले आसमान में पूस- माघ की रातें खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ी।किसानों की सुविधा के आदेश कागजों में कैद रहे।
अगर धान खरीदी केन्द्र नौवस्ता पर गौर किया जाय तो 48 हजार 194 क्विंटल 80 किलोग्राम रिकार्ड के अनुसार खरीदी हुई है।जिसके लिहाज से कुल 1 लाख 20 हजार 487 बोरी धान खरीदी गई।जिसमें तौलाई के नाम पर किसानों से पाँच रुपए प्रति बोरी की दर से 6 लाख 2 हजार 4 सौ 35 रुपये लिए गए।इसी तरह तौलाई में नमी के आड़ में 602 क्विंटल 43 किलोग्राम नौवस्ता खरीदी केन्द्र में किसानों की धान लूटी गई।जिसकी कुल कीमत 9 लाख 33 हजार 774 रुपये होती है।
अगर किसानों से लिए गए मजदूरी एवं अधिक ली गईं धान की कीमत जोड़ी जाय तो यह 15 लाख 36 हजार 209 रुपये होती है।खरीदी केन्द्र द्वारा बोरी की सिलाई एवं ट्रक लोड करने की पल्लेदारी खर्च की गई है।जबकि खरीदी खर्च के रूप में शासन द्वारा 12 रुपये प्रति क्विंटल एवं किसानों की व्यवस्था तथा अन्य व्यवस्था खर्च के लिए 6 रुपए प्रतिक्लिंटल दिये गये थे।
नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम द्वारा दिए गये खर्च की राशि के लिहाज से नौवस्ता खरीदी केन्द्र को धान तौलाई बोरी की सिलाई एवं पल्लेदारी के लिए 5 लाख 78 हजार 337 रुपए एवं किसानों पर खर्च करने तथा अन्य खर्च के लिए 2 लाख 89 हजार 168 रुपए मिले।इसके अलावा खरीदी केन्द्र समिति को कमीशन के रूप में 10 लाख 60 हजार 285 रुपए दिए गए।
सबसे अहम यह रहा की जहाँ किसानों को पाँच रुपए प्रति बोरी तौलाई भरने को मजबूर किया गया वहीं बोरी का कृत्रिम अभाव दिखा कर किसानों को इतना मजबूर कर दिया गया की किसान अधिक धान की तौलाई का बिरोध न कर सकें।मजदूरी देने से आनाकानी न करे तथा बोरियों के लिए भी आरजू मिन्नत करे।अगर पूरे खरीदी केन्द्र की गतिविधियों पर गौर करें तो पहले नवम्बर महीने में खरीदी न करना फिर बोरियों के अभाव के नाटक में किसानों को खुले सड़क पर भीषण ठंड में कई कई रातें बिताने को मजबूर करना और पीड़ित किसानों की किसी भी शिकायत पर प्रशासन का गौर न करना कई सवालों को जन्म देता है।
एक और अहम सवाल की जो धान किसानों का गला दबाकर अधिक तौली गई क्या वह नागरिक खाद्य आपूर्ति निगम के गोदाम को मिली ? ऐसा संभव नहीं क्योंकि वजन कराकर ही गोदाम को दिया जाता है।फिर अधिक ली गई 1439 बोरी से ज्यादा धान को कहाँ ठिकाने लगाया गया ? इसका भी उत्तर खरीदी चालू रहते पीड़ित किसानों ने प्रशासन को दे दिया था ।खरीदी केन्द्र प्रभारी के कुछ करीबी पंजीकृत किसानों पर आरोप लगाया गया था कि एक भी बीघे धान बोई नहीं और सैकड़ों क्लिंटल खाते में चढ़ गये।
अब सवाल उठता है की क्या नौवस्ता खरीदी केन्द्र प्रभारी को शासन प्रशासन ने भ्रष्टाचार एवं किसानों की लूट की छूट दे रखी है ? क्या इसी तरह किसानों का कल्याण जारी रहेगा ? क्या जनप्रतिनिधि किसानों की समस्या से अपने को अलग कर चुके हैं ? क्या पीड़ित किसानों को न्याय मिल पायेगा ?

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