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चुनाव भुनाने को हरियाणा, दिल्ली से होगी शुरू फूड सिक्योरिटी की सियासत


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 82 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा देने वाले अध्यादेश को लागू करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। चूकि, नवंबर में दिल्ली और अगले साल लोकसभा चुनाव के ठीक बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इस योजना की शुरुआत भी इन्हीं दो कांग्रेस शासित राज्यों से होगी। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने योजना शुरू करने के लिए 20 अगस्त की तारीख तय की है। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती है। सोनिया ने शनिवार को अपने घर पर पार्टी के 13 मुख्यमंत्रियों की बैठक ली। हालांकि, कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने बताया कि इस अध्यादेश का चुनाव से लेना-देना नहीं है। योजना के तहत चावल तीन रुपए किलो, गेहूं दो रुपए और मोटा अनाज एक रुपए प्रति किलो मिलेगा।

कैसी सियासत
कांग्रेस ने 2009 में मनरेगा व कर्ज माफी योजनाओं से सत्ता में वापसी की थी। इस बार उसे इस योजना से उम्मीद है।
दिल्ली में नवंबर में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए वहां इसका तत्काल फायदा मिल सकता है।
हरियाणा खाद्यान्न संपन्न राज्य है। यहां योजना सफल होने की उम्मीद ज्यादा है। इसका फायदा लोकसभा व विधानसभा चुनाव दोनों में हो सकता है।
शुक्रवार को तय हुआ कि पार्टी प्रवक्ता प्रदेश अध्यक्षों से मुलाकातें करेंगे। योजना के प्रचार को लेकर स्थानीय स्तर पर रणनीति बनाएंगे।
हरियाणा का दावा, तैयारियां पूरी
सीएम भूपेंद्र ङ्क्षसह हुड्डा ने कहा कि योजना लागू करने की तैयारियां पूरी हैं। बीपीएल परिवारों को गेहूं, चावल और मोटे अनाज के साथ 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दाल भी दी जाएगी।
...लेकिन, खामियां किसी से छिपी नहीं : प्रदेश में अभी तक अनाज वितरण के लिए डिपो होल्डर्स का मजबूत स्ट्रक्चर नहीं है।  फिलहाल ९००० डिपो होल्डर्स के माध्यम से ही सरकार एक करोड़ ३० हजार लोगों को अनाज उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है।

क्या है देश में स्थिति?
खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लागू होने से पहले भाजपा शासित छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और अन्नाद्रमुक शासित तमिलनाडु में एक-दो रु/ किलो की दर पर अनाज दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु जैसे राज्यों में तो सभी परिवारों को योजना के दायरे में रखा गया है।
कांग्रेस शासित कर्नाटक, आंध्रप्रदेश की सरकारें भी रियायती दर पर अनाज दे रहीं हैं।

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