अमिताभ बच्चन 2013 के ग्लोबल डाइवर्सिटी अवार्ड से सम्मानित
लंदन : बालीवुड मैगास्टार अमिताभ बच्चन को ब्रिटेन के हाउस आफ कामन्स के
स्टेट रूम में वर्ष 2013 के ग्लोबल डाइवर्सिटी अवार्ड से सम्मानित किया गया
है ।हाउस आफ कामन्स की स्पीकर होन जॉन बारकाउ ने अमिताभ बच्चन को
बालीवुड प्रतीक और भारतीय सिनेमा की सर्वकालिक लोकप्रिय हस्ती बताते हुए 71
वर्षीय अभिनेता को अवार्ड प्रतिमा भेंट की।
अमिताभ बच्चन को एक आदर्श बताते हुए स्पीकर बारकाउ ने कहा कि आप एक आदर्श हैं और अमिताभ आप इस पुरस्कार के हकदार हैं । ब्रिटिश अभिनेता हग ग्रांट पुरस्कार समारोह में मौजूद थे । समारोह की अध्यक्षता गृह मामलों की प्रवर समिति के अध्यक्ष और सांसद कीथ वाज ने की।
इस अवसर पर उपस्थिति लोगों को उपलब्ध करायी गयी पुस्तिका में कहा गया था ‘ अमिताभ ने सबसे पहले 1970 के दशक में एक ‘एंग्री यंग मैन ’ के रूप में लोकप्रियता हासिल की और उसके बाद से वह अपने चार दशकों से अधिक के कैरियर में 180 से अधिक फिल्मों में काम कर चुक हैं । बच्चन को भारतीय सिनेमा के इतिहास में महान और सर्वाधिक प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक माना जात है ।’ पुरस्कार हासिल करते हुए बच्चन ने कहा कि वह ‘ऐतिहासिक पुरस्कार’ को हासिल कर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं । (एजेंसी)
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता को दिया और उन्हें याद करते हुए कहा, ‘‘ मेरे पिता इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाते थे और 1952 में कैम्ब्रिज विवि से अंग्रेजी में डाक्टरेट उपाधि हासिल करने वाले पहले भारतीय थे । उन्होंने अपना डाक्टरेट सामान्य चार की बजाय केवल दो वर्ष में पूरा किया था।
अमिताभ बच्चन को एक आदर्श बताते हुए स्पीकर बारकाउ ने कहा कि आप एक आदर्श हैं और अमिताभ आप इस पुरस्कार के हकदार हैं । ब्रिटिश अभिनेता हग ग्रांट पुरस्कार समारोह में मौजूद थे । समारोह की अध्यक्षता गृह मामलों की प्रवर समिति के अध्यक्ष और सांसद कीथ वाज ने की।
इस अवसर पर उपस्थिति लोगों को उपलब्ध करायी गयी पुस्तिका में कहा गया था ‘ अमिताभ ने सबसे पहले 1970 के दशक में एक ‘एंग्री यंग मैन ’ के रूप में लोकप्रियता हासिल की और उसके बाद से वह अपने चार दशकों से अधिक के कैरियर में 180 से अधिक फिल्मों में काम कर चुक हैं । बच्चन को भारतीय सिनेमा के इतिहास में महान और सर्वाधिक प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक माना जात है ।’ पुरस्कार हासिल करते हुए बच्चन ने कहा कि वह ‘ऐतिहासिक पुरस्कार’ को हासिल कर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं । (एजेंसी)
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता को दिया और उन्हें याद करते हुए कहा, ‘‘ मेरे पिता इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाते थे और 1952 में कैम्ब्रिज विवि से अंग्रेजी में डाक्टरेट उपाधि हासिल करने वाले पहले भारतीय थे । उन्होंने अपना डाक्टरेट सामान्य चार की बजाय केवल दो वर्ष में पूरा किया था।

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