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अमेरिका ने पाक परमाणु हथियारों की निगरानी बढ़ाई: रिपोर्ट

वाशिंगटन: अल कायदा, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों की निगरानी पर अरबों डालर खर्च करने वाला अमेरिका अपने सहयोगी पाकिस्तान पर भी बराबर की गहन नजर रख रहा है और उसने , उसके परमाणु हथियारों की निगरानी बढ़ा दी है.वाशिंगटन पोस्ट में आज प्रकाशित एक रिपोर्ट में गोपनीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया है कि ‘‘अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान के कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत के परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं.’’ हालांकि इस रिपोर्ट में भारत के कार्यक्रम के बारे में ब्यौरा नहीं दिया गया है.
पोस्ट ने लिखा है, ‘‘ अमेरिका, अल कायदा , उत्तर कोरिया और ईरान समेत अपने स्पष्ट विरोधियों पर केंद्रित निगरानी पर 52. 6 अरब डालर खर्च करता है लेकिन अति गोपनीय बजट दस्तावेजों में खुलासा किया गया है कि इतनी ही गहन निगरानी वह अपने सहयोगी पाकिस्तान की भी करता है .’’
खुफिया समुदाय के ‘‘ब्लैक बजट’’ के 178 पन्नों के सार का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की निगरानी बढ़ा दी है और वह वहां जैविकीय और रासायनिक हथियार स्थलों को लेकर चिंतित है . इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने सीआईए द्वारा भर्ती किए गए पाकिस्तानी आतंकवाद विरोधी एजेंटों की वफादारी को आंकने का भी प्रयास किया है.
वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ अमेरिका के खुफिया चार्ट में पाकिस्तान शीर्ष स्थान पर है . इसे एक नवगठित निगरानी सेल के लक्ष्य के रूप में नामित किया गया है और साथ ही इसके परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा को लेकर अमेरिका इस कदर चिंतित है कि बजट के एक भाग में इसका विशेष रूप से उल्लेख किया गया है .
बजट दस्तावेज में कहा गया है कि अवैध हथियारों के विस्तार ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है : पाकिस्तान और बाकी अन्य .’’ दैनिक ने लिखा है कि पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी कांट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडेन ने उसे ये गोपनीय दस्तावेज मुहैया कराए हैं जिसने अमेरिका के कुछ बेहद गुप्त राज दुनिया के सामने उजागर किए थे .
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ इस खुलासे ने अमेरिकी अविश्वास की नयी परतें सामने ला दी हैं कि वह एक राजनीतिक रूप से अस्थिर और बढ़ते इस्लामी आतंकवाद का सामना कर रहे देश में किस प्रकार पहले से ही नाजुक सुरक्षा भागीदारी में आगे बढ़ रहा है .’’ अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान में सहयोग के बदले पाकिस्तान को 12 साल में 26 अरब डालर की सहायता प्रदान की है .
दैनिक लिखता है, ‘‘ लेकिन ओसामा बिन लादेन के मारे जाने और अल कायदा की हालत खराब होने के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियां , ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के सीआईए ड्रोन विमानों के गश्त वाले क्षेत्रों से आगे जाकर नए खतरों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं .’’ ऐसा अनुमान है कि पाकिस्तान के पास 120 परमाणु हथियारों का जखीरा है और दस्तावेज से संकेत मिलता है कि अमेरिकी एजेंसियों को संदेह है कि इस्लामाबाद इस जखीरे में और इजाफा कर रहा है.

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