आदिवासियों पर मंडला में बर्बर लाठीचार्ज की भूरिया ने की निंदा
भोपाल। पिछले अगस्त महीने में मंडला जिले में जिला पंचायत एवं जिला
सहकारी केन्द्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष दीनू ताराम के 30 वर्षीय एकलौते
पुत्र एवं कांग्रेस के युवा नेता मुकेश ताराम की संदिग्ध हालातों में हुई
मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर कल मंडला में एसपी कार्यालय का
घेराव कर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर रहे आदिवासी स्त्री-पुरूषों
और मृतक मुकेश ताराम के परिजनों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया। इस
प्रकरण में 15 दिन पूर्व बम्हनी थाने पर भी प्रदर्शन किया गया था, किंतु
मांग पर कोई आश्वासन न मिलने के कारण आक्रोशित आदिवासियों ने बड़ी संख्या
में कल मंडला पहुंचकर एसपी कार्यालय का घेराव किया और मुकेश ताराम की मौत
की निष्पक्ष जांच की मांग दोहरायी। एसपी ने प्रदर्शनकारियों ने आदिवासियों
को पहले तो बातों ही बातों में टालने की कोशिश की, किंतु प्रदर्शनकारी
प्रकरण को हत्या का प्रकरण मानकर जांच के बारे में आश्वासन मिले बिना वहां
से हटने से इंकार दिया। तब पुलिस द्वारा अश्रुगैस का प्रयोग किया गया फिर
भी प्रदर्शनकारी डटे रहे, तो उन पर बर्बर लाठीचार्ज हुआ, जिसमें दिवंगत
मुकेश ताराम की मां के हाथ की हड्डी टूट गई तथा कई अन्य व्यक्ति भी घायल
हुए जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदेश कांग्रेस
अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने मुकेश ताराम की संदिग्ध मौत की जांच की मांग
करने वाले आदिवासियों पर निर्दयतापूर्वक लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा
की है।
श्री भूरिया ने कहा है कि कांग्रेस का युवा नेता मुकेश
ताराम आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ने में हमेशा आगे रहता था। वह आगामी
विधान सभा चुनाव लड़ने का आकांक्षी भी था। मुकेश जिले में रेत माफियों
द्वारा किये जाने वाले रेत के अवैध कारोबार एवं लाखों रूपयों का रायल्टी की
चोरी का लगातार विरोध कर रहा था। इस कारण वह जिले के रेत माफियाओं की आंख
की किरकिरी बन गया था। पुलिस मुकेश ताराम की मौत को मोटर सायकल दुर्घटना
बताकर दबाने की कोशिश में लगी हुई दिखाई दे रही है। ऐसी आशंका है कि
सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं के राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस इस कोशिश में है
कि घटना की निष्पक्ष जांच की नौबत न आवे, जबकि मृतक के परिवार ने सबूत
प्रस्तुत करते हुए खुलासा किया है कि मुकेश दुर्घटना का नहीं, बल्कि रेत
माफिया के षड्यंत्र का शिकार हुआ है।श्री भूरिया ने मुकेश ताराम की मौत की
जांच कराने की माग को उचित बताते हुए प्रकरण में निष्पक्ष एजेंसी से जांच
की मांग की है। आपने सवाल किया है कि आखिर सरकार प्रकरण में निष्पक्ष जांच
से घबरा क्यों रही है ?

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