हिंदी बोल कलाम ने जीता लखनऊवासियों का दिल
लखनऊ: पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने साइंटिफिक
कन्वेंशन सेंटर के लोकार्पण के दौरान शुक्रवार को टूटी-फूटी हिंदी बोलकर
लखनऊवासियों का दिल जीत लिया. उनकी हिंदी सुनकर पूरा सभागार तालियों से
गूंज उठा.इस बीच बीजेपी के लखनऊ से सांसद लालजी टंडन भी पूर्व प्रधानमंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी को याद कर भावुक हो गए. लोकार्पण के दौरान लालकृष्ण
आडवाणी ने कहा कि मैंने कलाम साहब से हिंदी बोलने का आग्रह किया है.
उन्होंने अपनी हामी भरी है.आडवाणी के इस बयान के बाद मंच पर बोलने के लिए
जब कलाम खड़े हुए तो उन्होंने आडवाणी सहित हजारों लोगों को हिंदी बोलकर
चौंका दिया.
कलाम ने कहा कि लखनऊ के इस ऐतिहासिक सेंटर के दूसरे चरण के लोकार्पण समारोह में शामिल होकर बहुत खुश हूं. अटल जी का सपना साकार हो गया.कलाम का इतना बोलना था कि पूरे सभागार में लोगों ने खड़े होकर उनका शुक्रिया अदा किया. इसके बाद हालांकि कलाम अंग्रेजी में ही बोले.कलाम से पहले अटल के सपनों को पूरा करने वाले लालजी टंडन भी अपने संबोधन के दौरान कई बार अटल को याद कर भावुक हो गए. अटल का नाम लेते कई बार उनका गला भर आया, ऐसा लगा मानो वह अब रो देंगे.
सभागार में मौजूद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए टंडन ने कहा कि लोगों ने सवाल उठाया कि इस कार्यक्रम में आप आडवाणी जी को ही क्यों बुला रहे हैं, मैं आज यह बताना चाहता हूं कि अटल जी का सपना आज साकार हो रहा है. इस वक्त वह मौजूद नहीं हैं. मुझे लगा कि केवल आडवाणी ही ऐसे व्यक्ति हैं जो उनकी कमी कुछ हद तक पूरी कर सकते हैं, क्योंकि अटल और आडवाणी कभी जुदा नहीं हो सकते.
कलाम ने कहा कि लखनऊ के इस ऐतिहासिक सेंटर के दूसरे चरण के लोकार्पण समारोह में शामिल होकर बहुत खुश हूं. अटल जी का सपना साकार हो गया.कलाम का इतना बोलना था कि पूरे सभागार में लोगों ने खड़े होकर उनका शुक्रिया अदा किया. इसके बाद हालांकि कलाम अंग्रेजी में ही बोले.कलाम से पहले अटल के सपनों को पूरा करने वाले लालजी टंडन भी अपने संबोधन के दौरान कई बार अटल को याद कर भावुक हो गए. अटल का नाम लेते कई बार उनका गला भर आया, ऐसा लगा मानो वह अब रो देंगे.
सभागार में मौजूद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए टंडन ने कहा कि लोगों ने सवाल उठाया कि इस कार्यक्रम में आप आडवाणी जी को ही क्यों बुला रहे हैं, मैं आज यह बताना चाहता हूं कि अटल जी का सपना आज साकार हो रहा है. इस वक्त वह मौजूद नहीं हैं. मुझे लगा कि केवल आडवाणी ही ऐसे व्यक्ति हैं जो उनकी कमी कुछ हद तक पूरी कर सकते हैं, क्योंकि अटल और आडवाणी कभी जुदा नहीं हो सकते.

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