वित्तीय प्रोत्साहन नीतियों में धीमा बदलाव हो: ब्रिक्स
सेंट पीटर्सबर्ग : ब्राज़ील,रूस,भारत,चीन और दक्षिण अफ्रीका समूह यानी ब्रिक्स देशों के नेताओं ने समृद्ध देशों द्वारा अपनाई जा रही मौद्रिक प्रोत्साहन नीति की धीमी वापसी का आह्वान किया है.दुनिया की ताक़तवर अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी20 के गुरूवार को शुरू हुए शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से कुछ घंटे पहले ब्रिक्स देशों ने बैठक करके अपने विचार रखे.
सेंट पीटर्सबर्ग में जी 20 देशों की मुख्य बैठक से ठीक पहले क्लिक करें ब्रिक्स नेताओं की एक अनौपचारिक बातचीत पर जारी किए गए प्रेस नोट में कहा गया है, ‘‘हाल के दिनों में वित्तीय बाज़ारों और पूंजी प्रवाह में बढ़ी अनिश्चितता को देखते हुए ब्रिक्स देशों ने डरबन बैठक के दौरान व्यक्त की गई अपनी चिंताओं को एक बार फिर दोहराया है.ये चिंताएं कुछ विकसित देशों की ग़ैर-पारंपरिक मौद्रिक नीतियों के विकासशील देशों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर से जुड़ी हैं.
ब्रिक्स देशों ने ज़ोर देकर कहा है कि मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया बेहद सावधानी से तय की जानी चाहिए और इसकी पूरी जानकारी भी दी जानी चाहिए.रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह,चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा औऱ ब्राज़ील के राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ़ ने हिस्सा लिया.
विकासशील देशों का डर
हालांकि साफ़ तौर पर अमरीका का नाम नहीं लिया गया लेकिन माना जा रहा है कि ब्रिक्स देशों का इशारा अमरीकी नीति में बदलाव की तरफ़ था जिसने उनकी अर्थव्यवस्था पर असर डाला है.ग़ौरतलब है कि अमरीकी केन्द्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व की इस घोषणा के बाद कि वह प्रोत्साहन पैकेज वापिस लेने के लिए क़दम उठाएग., भारत और ब्राज़ील की मुद्राएं लगातार दबाव में हैं जबकि चीन जैसी ताकतवर अर्थव्यवस्था में भी विकास की गति धीमी पड़ गई है.
ब्रिक्स देशों ने जी 20 में अपने संगठित पक्ष के साफ़ संकेत देते हुए बयान में कहा है कि क्लिक करें जी 20 देश वैश्विक मांग को बढ़ाने औऱ बाज़ार में आत्मविश्वास पैदा करने में और ज़्यादा कारगर तरीक़े से काम कर सकते हैं.
बैठक के अध्यक्ष रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों की प्राथमिकता दो परियोजनाओं पर विचार करना था. लगभग 50 बिलियन डॉलर वाले एक क्लिक करें विकास बैंक औऱ 100 बिलियन डॉलर की पूंजी वाले एक आरक्षित फंड की स्थापना.
बयान के मुताबिक़ ब्रिक्स देशों को अगली बैठक तक इन दोनों परियोजनाओं के शुरू हो जाने की उम्मीद है.ब्रिक्स देशों की ये बैठक वित्तीय मामलों में इस समूह की संगठित आवाज़ की बढ़ती मज़बूती का सुबूत है.
सेंट पीटर्सबर्ग में जी 20 देशों की मुख्य बैठक से ठीक पहले क्लिक करें ब्रिक्स नेताओं की एक अनौपचारिक बातचीत पर जारी किए गए प्रेस नोट में कहा गया है, ‘‘हाल के दिनों में वित्तीय बाज़ारों और पूंजी प्रवाह में बढ़ी अनिश्चितता को देखते हुए ब्रिक्स देशों ने डरबन बैठक के दौरान व्यक्त की गई अपनी चिंताओं को एक बार फिर दोहराया है.ये चिंताएं कुछ विकसित देशों की ग़ैर-पारंपरिक मौद्रिक नीतियों के विकासशील देशों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर से जुड़ी हैं.
ब्रिक्स देशों ने ज़ोर देकर कहा है कि मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की प्रक्रिया बेहद सावधानी से तय की जानी चाहिए और इसकी पूरी जानकारी भी दी जानी चाहिए.रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह,चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा औऱ ब्राज़ील के राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ़ ने हिस्सा लिया.
विकासशील देशों का डर
हालांकि साफ़ तौर पर अमरीका का नाम नहीं लिया गया लेकिन माना जा रहा है कि ब्रिक्स देशों का इशारा अमरीकी नीति में बदलाव की तरफ़ था जिसने उनकी अर्थव्यवस्था पर असर डाला है.ग़ौरतलब है कि अमरीकी केन्द्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व की इस घोषणा के बाद कि वह प्रोत्साहन पैकेज वापिस लेने के लिए क़दम उठाएग., भारत और ब्राज़ील की मुद्राएं लगातार दबाव में हैं जबकि चीन जैसी ताकतवर अर्थव्यवस्था में भी विकास की गति धीमी पड़ गई है.
ब्रिक्स देशों ने जी 20 में अपने संगठित पक्ष के साफ़ संकेत देते हुए बयान में कहा है कि क्लिक करें जी 20 देश वैश्विक मांग को बढ़ाने औऱ बाज़ार में आत्मविश्वास पैदा करने में और ज़्यादा कारगर तरीक़े से काम कर सकते हैं.
बैठक के अध्यक्ष रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देशों की प्राथमिकता दो परियोजनाओं पर विचार करना था. लगभग 50 बिलियन डॉलर वाले एक क्लिक करें विकास बैंक औऱ 100 बिलियन डॉलर की पूंजी वाले एक आरक्षित फंड की स्थापना.
बयान के मुताबिक़ ब्रिक्स देशों को अगली बैठक तक इन दोनों परियोजनाओं के शुरू हो जाने की उम्मीद है.ब्रिक्स देशों की ये बैठक वित्तीय मामलों में इस समूह की संगठित आवाज़ की बढ़ती मज़बूती का सुबूत है.

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