जोगी की जाति रिपोर्ट वापस, हाईकोर्ट से राहत
रायपुर । पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को जाति मामले
में हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राज्य शासन ने उच्चस्तरीय छानबीन समिति
द्वारा प्रस्तुत दोनों रिपोर्ट को वापस ले लिया है। इनमें से एक रिपोर्ट
में जोगी को कंवर बताया गया है, जबकि दूसरे रिपोर्ट में उनकी जाति संदिग्ध
बताई गई है।जोगी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होनी थी। इसके पहले शासन के उप
महाधिवक्ता यशवंत सिंह ने एक शपथ पत्र देते हुए उनकी जाति को लेकर कोर्ट
में प्रस्तुत दोनों रिपोर्ट को वापस लेने की जानकारी दी। शासन के इस आवेदन
के साथ ही जोगी की ओर से प्रस्तुत वह याचिका निराकृत हो गई, जिसमें
उन्होंने उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट को खारिज
करने की मांग की थी। शासन ने अब उच्च स्तरीय समिति से उनकी जाति को लेकर नए
सिरे से जांच करने की बात भी कही है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य शासन ने जोगी के जाति की जांच करने की जिम्मेदारी उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति को सौंपा था। यह मामला दो साल से समिति के पास लंबित था। इसी बीच 6 मई 2013 को हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने समिति को 2 महीने के अदंर जाति की जांच कर रिपोर्ट मांगा। इस आदेश के बाद समिति ने जोगी को नोटिस जारी कर जाति के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। इसके लिए समिति ने उन्हें एक महीने का समय दिया।
नोटिस का जवाब देने के बजाए श्री जोगी ने हाईकोर्ट में दो याचिका लगाई, जिसमें से एक में समिति की रिपोर्ट को खारिज करने की मांग की, और दूसरी याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि समिति ने दो रिपोर्ट पेश किया है, जिसमें से एक रिपोर्ट तो न्यायालय के आदेश पर दिया गया है। दूसरी रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रस्तुत किया गया है। जबकि हाईकोर्ट ने जाति की जांच करने के लिए एक ही आदेश दिया है।
जोगी के अधिवक्ता राहुल त्यागी ने बताया कि शासन ने हाईकोर्ट में जाति को लेकर दो रिपोर्ट प्रस्तुत किया। एक रिपोर्ट 22 अप्रैल 2013 प्रस्तुत की गई, जिसमें जोगी को कंवर माना गया है, लेकिन दूसरी रिपोर्ट 22 जून 2013 दी गई, जिसमें उनकी जाति को संदिग्ध बताया गया है।
राज्य बनते ही शुरू हुआ था जाति का विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति का विवाद अलग राज्य बनते ही शुरू हो गया था। भाजपा नेता संत कुमार नेताम ने अनुसूचित जनजाति आयोग में वर्ष 2000 में शिकायत की थी। इसमें उन्होंने बताया कि जोगी कंवर जाति के नहीं हैं। आयोग ने जांच के बाद उनकी जाति को फर्जी करार दिया था। साथ ही राज्य शासन को कार्रवाई के लिए अनुशंसा की थी। इस आदेश को जोगी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां से उन्हें स्टे मिल गया था।
बनवारी ने भी लगाई थी याचिका
आयोग के आदेश पर हाईकोर्ट में मामला चल ही रहा था कि तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई और उनके आदिवासी होने पर संदेह जताया। यह मामला आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और इसी मामले में सुको ने छानबीन समिति को जाति की जांचकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। वहां से श्री जोगी को राहत दी मिली। साथ ही समिति की जांच पर असंतुष्ट होने पर हाईकोर्ट में फिर से अपील करने की छूट दी थी।
एक याचिका साय की भी
मरवाही विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी रहे नंदकुमार साय ने भी उनसे चुनाव हारने के बाद हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी। इसमें भी श्री साय ने श्री जोगी के आदिवासी नहीं होने का आरोप लगाया था। याचिका में उनके आदिवासी होने पर आपत्ति की गई है। याचिका में श्री साय ने कहा है कि श्री जोगी को आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीट से चुनाव नहीं ल़़डने का अधिकार नहीं है।
राजनीति से प्रेरित हैं याचिकाएं
मामला निराकृत होने और शासन की ओर से रिपोर्ट वापस लेने के बाद श्री जोगी के अधिवक्ता राहुल त्यागी ने बताया कि जाति को लेकर प्रस्तुत सभी याचिकाएं और आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। इस बात को जोगी भी शुरू से कहते आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शासन ने अभी जाति को लेकर उच्च स्तरीय छानबीन समिति की दो रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश किया था। इन दोनो रिपोर्ट में अलग-अलग बातें कही गई थीं। इससे स्पष्ट है कि जांच रिपोर्ट पहले से ही संदिग्ध था।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य शासन ने जोगी के जाति की जांच करने की जिम्मेदारी उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति को सौंपा था। यह मामला दो साल से समिति के पास लंबित था। इसी बीच 6 मई 2013 को हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने समिति को 2 महीने के अदंर जाति की जांच कर रिपोर्ट मांगा। इस आदेश के बाद समिति ने जोगी को नोटिस जारी कर जाति के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। इसके लिए समिति ने उन्हें एक महीने का समय दिया।
नोटिस का जवाब देने के बजाए श्री जोगी ने हाईकोर्ट में दो याचिका लगाई, जिसमें से एक में समिति की रिपोर्ट को खारिज करने की मांग की, और दूसरी याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि समिति ने दो रिपोर्ट पेश किया है, जिसमें से एक रिपोर्ट तो न्यायालय के आदेश पर दिया गया है। दूसरी रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रस्तुत किया गया है। जबकि हाईकोर्ट ने जाति की जांच करने के लिए एक ही आदेश दिया है।
जोगी के अधिवक्ता राहुल त्यागी ने बताया कि शासन ने हाईकोर्ट में जाति को लेकर दो रिपोर्ट प्रस्तुत किया। एक रिपोर्ट 22 अप्रैल 2013 प्रस्तुत की गई, जिसमें जोगी को कंवर माना गया है, लेकिन दूसरी रिपोर्ट 22 जून 2013 दी गई, जिसमें उनकी जाति को संदिग्ध बताया गया है।
राज्य बनते ही शुरू हुआ था जाति का विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति का विवाद अलग राज्य बनते ही शुरू हो गया था। भाजपा नेता संत कुमार नेताम ने अनुसूचित जनजाति आयोग में वर्ष 2000 में शिकायत की थी। इसमें उन्होंने बताया कि जोगी कंवर जाति के नहीं हैं। आयोग ने जांच के बाद उनकी जाति को फर्जी करार दिया था। साथ ही राज्य शासन को कार्रवाई के लिए अनुशंसा की थी। इस आदेश को जोगी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां से उन्हें स्टे मिल गया था।
बनवारी ने भी लगाई थी याचिका
आयोग के आदेश पर हाईकोर्ट में मामला चल ही रहा था कि तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई और उनके आदिवासी होने पर संदेह जताया। यह मामला आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और इसी मामले में सुको ने छानबीन समिति को जाति की जांचकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। वहां से श्री जोगी को राहत दी मिली। साथ ही समिति की जांच पर असंतुष्ट होने पर हाईकोर्ट में फिर से अपील करने की छूट दी थी।
एक याचिका साय की भी
मरवाही विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी रहे नंदकुमार साय ने भी उनसे चुनाव हारने के बाद हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी। इसमें भी श्री साय ने श्री जोगी के आदिवासी नहीं होने का आरोप लगाया था। याचिका में उनके आदिवासी होने पर आपत्ति की गई है। याचिका में श्री साय ने कहा है कि श्री जोगी को आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीट से चुनाव नहीं ल़़डने का अधिकार नहीं है।
राजनीति से प्रेरित हैं याचिकाएं
मामला निराकृत होने और शासन की ओर से रिपोर्ट वापस लेने के बाद श्री जोगी के अधिवक्ता राहुल त्यागी ने बताया कि जाति को लेकर प्रस्तुत सभी याचिकाएं और आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। इस बात को जोगी भी शुरू से कहते आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शासन ने अभी जाति को लेकर उच्च स्तरीय छानबीन समिति की दो रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश किया था। इन दोनो रिपोर्ट में अलग-अलग बातें कही गई थीं। इससे स्पष्ट है कि जांच रिपोर्ट पहले से ही संदिग्ध था।

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