संन्यास के मुद्दे पर सचिन ने साधी 'चुप्पी'
नई दिल्ली। वेस्टइंडीज़ के खिलाफ 2 मैचों की टेस्ट सीरीज़ के आयोजन की बात के साथ ही सचिन तेंदुलकर की संन्यास की अटकलें और तेज हो गईं हैं। लेकिन, हमेशा की तरह तेंदुलकर की चुप्पी ने इस मुद्दे पर सस्पेंस और बढ़ा दिया है।
वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ नवंबर में टेस्ट सीरीज़ के आयोजन के बाद इस बात की संभावना काफी तेज़ हो गई है कि वो सीरीज़ सचिन तेंदुलकर के लिए आखिरी अंत्तराष्ट्रीय सीरीज़ भी हो। लेकिन, खुद मास्टर ब्लास्टर इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं, उन्होंने अपनी राय सार्वजनिक नहीं की है। दरअसल, तेंदुलकर संन्यास के मुद्दे पर कभी खुलकर अपनी राय रखने के लिए नहीं जाने जाते हैं। भारत तो भारत, विदेश में भी सचिन के संन्यास का मुद्दा एक बड़ी चर्चा का विषय है।
साउथ अफ्रीका के दिग्गज ऑलराउंडर जैक कैलिस ने हाल ही में तेंदुलकर के संन्यास पर मजाक में चुटकी भी ली थी। एक इंटरव्यू के दौरान अपने संन्यास के सवाल पर कैलिस ने मजाकिया लहज़े में कहा कि मेरे लिए संन्यास का फैसला उतना मुश्कलि नहीं है जितना की भारतीय खिलाड़ी तेंदुलकर के लिए। मैं जब चाहूं अपने संन्यास का फैसला ले सकता हूं। लेकिन तेंदुलकर के लिए ये फैसला शायद उनका फैसला ना होकर भारतीय सरकार का फैसला हो। मेरी और तेंदुलकर की हस्ती में काफी फर्क है। ख़ासकर अपने अपने देशों में। मैं इस बात को पूरी तरह से आशव्स्त होकर ये नहीं कह सकता कि सचिन को अलविदा कहने की इजाजत भी है या नहीं।
वाकई में कोई सौ फीसदी आश्वत होकर ये दावा नहीं कर सकता कि वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ होने वाली सीरीज़ तेंदुलकर की विदाई सीरीज़ ही हो। हो सकता है कि घरेलू मैदान पर सचिन का ये आखिरी टेस्ट हो, लेकिन तेंदुलकर को करीब से जानने वालों का मानना है कि खुद तेंदुलकर साउथ अफ्रीका दौरे को ध्यान में रखते हुए पिछले कुछ हफ्ते से अभ्यास कर रहे हैं। इतना ही नहीं तेंदुलकर अफ्रीका के बाद 2014 में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का दौरा भी कर सकते हैं।
ये बात किसी से छिपी नहीं कि तेंदुलकर को क्रिकेट से बेहद लगाव है और विदाई का फैसला उनके लिए सबसे मुश्किल है। 2011 वर्ल्ड कप में ख़िताबी जीत के बाद भी तेंदुलकर ने वन-डे क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा था तो उनकी काफी आलोचना हुई थी।
2012 दिसंबर में पाकिस्तान के खिलाफ वन-डे सीरीज के चयन के दिन अचानक एक बीसीसीआई प्रेस रिलीज के जरिए तेंदुलकर के इस फॉर्मेट से संन्यास की बात सामने आई थी।
नवंबर 1989 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले तेंदुलकर इस साल नवंबर में अपने 24 साल की अंत्तराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके होंगे। तेंदुलकर से कई सालों बाद क्रिकेट खेलने वाले उनके साथी खिलाड़ी राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण अब कामेंट्री बाक्स में नजर आते हैं। ऐसा नहीं है कि 40 साल की उम्र के बाद खिलाड़ियों ने टेस्ट क्रिकेट नहीं खेली है।
लेकिन, 16 साल की उम्र से लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं। इतना ही नहीं तेंदुलकर सबसे ज़्यादा 198 टेस्ट के अलावा, सबसे ज़्यादा 463 वन-डे, 307 फर्स्ट क्लास मैच, 551 लिस्ट ए, और 91 टी 20 मैच भी खेल चुके हैं।
तेंदुलकर की थकान का अंदाज़ा शायद खुद तेंदुलकर ही लगा सकते हैं। और ऐसे में अपने संन्यास पर आखिरी फैसला भी तेंदुलकर ही लेंगे। लेकिन, इतना तय है कि तेंदुलकर के चाहने वालों को कम से कम भारत में उन्हें 200 टेस्ट खेलते देखने का मौका ज़रूर मिलेगा।

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