अनूपपुर में पराजय से खफा है CM
भोपाल | अल्पसंख्यक और खासकर मुस्लिम समुदाय की भाजपा से बढ़ती नजदीकियों के प्रदर्शन के बीच अनूपपुर नगर पालिका चुनाव में पराजय से पार्टी को तगड़ा झटका लगा है, यहां के अल्पसंख्यक मतदाताओं को भाजपा जोड़ नहीं पाई। कांग्रेस के पूर्व मंत्री बिसाहूलाल सिंह के प्रभावक्षेत्र में मिली इस पराजय से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खफा बताए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी नाराजगी का इजहार भी पार्टी के प्रमुख नेताओं के सामने किया है।
अनूपपुर नगर पालिका के चुनाव का जिम्मा प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन और महामंत्री विनोद गोटिया ने लिया था। गोटिया पूरे समय क्षेत्र में डटे रहे। करीब 1200 अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने के लिए अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष हिदायतुल्लाह शेख और अन्य नेताओं को भी यहां लगाया गया। बावजूद इसके भाजपा अध्यक्ष चुनाव हार गई और 15 वार्डों में से महज पांच पर उसे संतोष करना पड़ा। भाजपा नेता मानते हैं कि अध्यक्ष पद के चुनाव में महज 50 वोटों से हुई पराजय पार्टी के मिस मैनेजमेंट की देन है। एक तो भाजपा ने यहां पूर्व नपाध्यक्ष ओमप्रकाश द्विवेदी के खास छोटेलाल पटेल को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया। दूसरे किसी भी वार्ड में अल्पसंख्यक उम्मीदवार नहीं उतारा, कांग्रेस से इस वर्ग के तीन प्रत्याशी थे। वार्ड आठ में तो भाजपा का प्रत्याशी ही नहीं था। भाजपा को पिछले सालों में हुए नगरीय निकाय चुनावों में अल्पसंख्यक समुदाय का अच्छा समर्थन मिलता रहा है। इच्छावर, कोतमा, उमरिया आदि निकाय चुनाव में उसे जीत इनकी वजह से ही हासिल हुई थी। इसके अलावा क्षेत्र में मुख्यमंत्री के आने के नाम पर लोगों की भीड़ जोड़कर सभाएं की गर्इं। मुख्यमंत्री का नाम लेकर किए गए इस खेल की शिकायत भी उन तक पहुंची है। अपने नाम पर इस तरह जनता को भ्रमित करने को लेकर चौहान ने पार्टी नेताओं से नाराजगी जताई है|बताया जाता है कि संगठन से पूछा गया है कि ऐसे में जनता की नाराजगी किसके प्रति होगी? ज्ञात रहे कि
न सीएम पहुंचे और न ही तोमर गए
अनूपपुर नगर पालिका के चुनाव को पार्टी ने इतने हल्के से लिया कि वहां मुख्यमंत्री की सभा नहीं रखी। प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के प्रचार का कार्यक्रम भी नहीं बनाया। यहां तक कि अजय प्रताप सिंह जैसे नेता भी वहां नहीं पहुंचे। मेनन और गोटिया के अलावा चुनिंदा नेता ही वहां लगाए गए थे।
अनूपपुर नगर पालिका के चुनाव को पार्टी ने इतने हल्के से लिया कि वहां मुख्यमंत्री की सभा नहीं रखी। प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के प्रचार का कार्यक्रम भी नहीं बनाया। यहां तक कि अजय प्रताप सिंह जैसे नेता भी वहां नहीं पहुंचे। मेनन और गोटिया के अलावा चुनिंदा नेता ही वहां लगाए गए थे।

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