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चोरी हुईं हैं फाइलें तो क्यों नहीं कराई FIR : सुषमा

नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक आवंटन संबंधी फाइलों के गायब होने के मुद्दे पर आज राज्यसभा और लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही बार बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि कोयला घोटाले से जुड़ी फाइलें गायब नहीं हुईं बल्कि चोरी हुई हैं और सरकार ने एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई है। बीजेपी ने सरकार से मांग की सरकार जवाब दे कि वो गायब फाइलों की एफआईआर दर्ज नहीं कराती तो ये समझा जाएगा कि सरकार की नीयत में खोट है।
राज्यसभा में बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कोयला ब्लॉक आवंटन संबंधी फाइलों के गायब होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस कोयला घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी प्रधानमंत्री से पूछताछ करना चाहते हैं क्योंकि जब कोयला ब्लॉक आवंटन हुआ था तब कोयला मंत्रालय का जिम्मा प्रधानमंत्री के पास था। कोयला घोटाले की गायब फाइलों को लेकर बीजेपी लगातार सरकार को घेर रही है।
गौरतलब है कि 2005 से 2009 के बीच पीएम के पास कोयला मंत्रालय था। 142 कोयला खदानों का आवंटन इसी दौरान किया गया। खदानों की नीलामी ना होने पर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को 1.86 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। सीएजी ने कहा कि सरकार ने नीलामी के लिए कोयला सचिव की राय नदरअंदाज की।
कोयला घोटाला की लापता फाइल केस में सीबीआई की जांच में कोयला मंत्रालय ने कई चिट्ठियों के बावजूद सीबीआई को जवाब नहीं दिया है। लापता फाइलों में आवंटन की प्रक्रिया का ब्यौरा था। लापता फाइलों में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकों का ब्यौरा भी था। कुछ खास कंपनियों पर मेहरबानी की जांच के लिए फाइलों का मिलना जरूरी है। इन लापता फाइलों में कांग्रेस सांसद विजय दर्डा की कंपनी को आवंटन का ब्यौरा भी है। 1995 से 2005 के बीच की 45 फाइलें भी लापता हुई है।
इससे पहले राज्यसभा में भी बीजेपी ने आरोप लगाया कि कोयला घोटाले पर दिए बयान में प्रधानमंत्री ने सदन को गुमराह किया है। इसके जवाब में कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि इस मामले में सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। इसके बाद जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया।

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